Google को जोर का झटका! European Union ने पक्षपातपूर्ण रवैये पर ठोका 89 करोड़ यूरो का बड़ा जुर्माना

गूगल के खोज परिणामों में पक्षपात और ऐप स्टोर की नीतियों पर लगाया गया यह आर्थिक दंड डिजिटल प्रभुत्व को संतुलित करने की यूरोपीय आयोग की नीतिगत प्रतिबद्धता को उजागर करता है। इस घटनाक्रम से न केवल अमेरिका और यूरोपीय संघ के तकनीकी संबंधों में नए समीकरण बनेंगे, बल्कि यह भविष्य के डिजिटल नवाचारों के लिए समान अवसर भी सृजित करेगा। कीवर्ड्स: गूगल न्यूज हिंदी, यूरोपीय आयोग कार्रवाई, डिजिटल मार्केट एक्ट उल्लंघन, टेक कंपनी जुर्माना
यूरोपीय संघ ने दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजिकल कंपनियों में शामिल गूगल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उस पर कुल 89 करोड़ यूरो का जुर्माना लगाया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई डिजिटल बाजार कानून के तहत प्रतिस्पर्धा के नियमों के उल्लंघन के आरोप में की गई है। इस फैसले के बाद अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापारिक और तकनीकी संबंधों में नए तनाव की संभावना भी जताई जा रही है।
बता दें कि यूरोपीय आयोग ने गूगल पर दो अलग-अलग मामलों में यह जुर्माना लगाया है। पहला जुर्माना 46 करोड़ यूरो का है। आयोग का आरोप है कि गूगल ने अपने खोज परिणामों में अपनी ही सेवाओं, जैसे उड़ान और होटल खोज सुविधा, को प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में अधिक प्राथमिकता दी। आयोग का मानना है कि इससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई है।
दूसरा जुर्माना 43 करोड़ यूरो का लगाया गया है। आयोग के अनुसार गूगल ने अपने अनुप्रयोग भंडार के माध्यम से काम करने वाले अनुप्रयोग निर्माताओं को ग्राहकों तक वैकल्पिक और बिना शुल्क वाले प्रस्ताव पहुंचाने की पूरी स्वतंत्रता नहीं दी। यह अवधि मार्च 2024 से दिसंबर 2025 के बीच की बताई गई है।
यूरोपीय संघ की टेक्निकल प्रमुख हेन्ना विरक्कुनेन ने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य डिजिटल बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है ताकि नई और छोटी कंपनियों को भी नवाचार का समान अवसर मिल सके। वहीं प्रतिस्पर्धा मामलों की प्रमुख तेरेसा रिबेरा ने कहा कि सबसे अच्छे उत्पादों को उनकी गुणवत्ता के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए, न कि केवल इसलिए कि वे खोज मंच चलाने वाली कंपनी के स्वामित्व में हैं।
दूसरी ओर गूगल ने यूरोपीय संघ के फैसले का विरोध किया है। कंपनी के वैश्विक मामलों के प्रमुख केंट वॉकर ने कहा कि नए नियमों के कारण यूरोप के यूजर्स को मिलने वाली कई उपयोगी सुविधाएं प्रभावित होंगी। उनका दावा है कि यह निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि कंपनी के उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा को कमजोर करने वाला कदम है।
गौरतलब है कि डिजिटल बाजार कानून वर्ष 2024 में लागू किया गया था। इसका उद्देश्य बड़ी टेक्नोलॉजिकल कंपनियों के प्रभाव को संतुलित करना और सभी कंपनियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है। इसी कानून के तहत इससे पहले मेटा और एप्पल पर भी भारी जुर्माना लगाया जा चुका है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यदि गूगल अगले 60 दिनों के भीतर आयोग के निर्देशों का पालन नहीं करता है तो उस पर अतिरिक्त आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। इससे पहले भी वर्ष 2017 से 2019 के बीच यूरोपीय संघ गूगल पर कई अरब यूरो का जुर्माना लगा चुका है। ऐसे में यह मामला वैश्विक डिजिटल नियमों और बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों की जवाबदेही से जुड़ी बहस को और तेज करने वाला माना जा रहा है।
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