7.8 करोड़ से ज्यादा ITR दाखिल, Income Tax Refund बढ़कर 2.20 लाख करोड़ के पार पहुंचा

सरकार के आंकड़ों के अनुसार 17 सितंबर तक आयकर रिफंड 29.19 प्रतिशत बढ़कर 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। 31 अगस्त तक 7.8 करोड़ से ज्यादा रिटर्न दाखिल किए गए। यदि रिटर्न भरने के बाद रिफंड नहीं मिला है, तो करदाता टैक्स कटौती के आंकड़े, पुराना बकाया, विभागीय संदेश और बैंक खाते की जानकारी जरूर जांच लें।
आयकर रिटर्न भरने के बाद अगर आपका रिफंड अभी तक खाते में नहीं आया है तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले यह पता करना जरूरी है कि आपका रिटर्न किस चरण में अटका हुआ है। सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 17 सितंबर 2026 तक करदाताओं को 2,20,026.72 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया जा चुका है। पिछले साल इसी अवधि में यह रकम 1,70,310.28 करोड़ रुपये थी। यानी इस साल रिफंड में सालाना आधार पर 29.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, 31 अगस्त तक 7.8 करोड़ से ज्यादा आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके थे। बड़ी संख्या में करदाताओं के रिटर्न दाखिल करने के बीच कई लोग अभी भी रिफंड का इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि सिर्फ रिटर्न दाखिल करने और उसका सत्यापन पूरा करने से रिफंड तुरंत खाते में नहीं आता है। पहले आयकर विभाग रिटर्न की जांच और प्रक्रिया पूरी करता है, इसके बाद ही रिफंड जारी किया जाता है।
रिटर्न की प्रक्रिया के दौरान विभाग करदाता की ओर से दी गई जानकारी का मिलान अलग-अलग कर रिकॉर्ड से करता है। इसमें वेतन या अन्य आय से काटे गए स्रोत पर कर, स्रोत पर वसूला गया कर, अग्रिम कर और स्वयं जमा किया गया कर जैसी जानकारियां शामिल होती हैं। अगर इन आंकड़ों में अंतर मिलता है तो रिफंड जारी होने में समय लग सकता है।
सबसे आम वजहों में कर कटौती से जुड़ी जानकारी का मेल न खाना भी शामिल है। उदाहरण के लिए, अगर करदाता ने रिटर्न में जितनी कर कटौती का दावा किया है, उतनी रकम उसके कर रिकॉर्ड में दिखाई नहीं दे रही है तो विभाग को पहले इस अंतर की जांच करनी पड़ सकती है। कर सूचना विवरण, वार्षिक सूचना विवरण या फॉर्म 26 AS में दर्ज आंकड़ों और रिटर्न में दी गई जानकारी के बीच अंतर होने पर भी मामला अटक सकता है।
इसके अलावा पुराने किसी आकलन वर्ष का बकाया कर भी रिफंड में देरी की वजह बन सकता है। अगर करदाता के नाम पहले का कोई बकाया है तो विभाग नियमों के तहत मिलने वाले रिफंड की रकम को उस बकाये के साथ समायोजित कर सकता है। किसी रिटर्न में गलती मिलने, अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ने या विभाग की ओर से भेजे गए किसी संदेश का जवाब लंबित रहने पर भी रिफंड रुक सकता है।
बैंक खाते से जुड़ी समस्या भी कई बार रिफंड में रुकावट डालती है। करदाता को देखना चाहिए कि आयकर विभाग की वेबसाइट पर दर्ज बैंक खाता चालू है या नहीं और उसका पहले से सत्यापन हुआ है या नहीं। गलत बैंक विवरण, बंद खाता या सत्यापन पूरा न होने की स्थिति में पैसा खाते में नहीं पहुंच पाता है।
गौरतलब है कि करदाता आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर जाकर दाखिल किए गए रिटर्न वाले हिस्से में अपने रिटर्न की स्थिति देख सकते हैं। वहां सत्यापन, प्रक्रिया पूरी होने, गलती से जुड़ा संदेश, रिफंड में समायोजन, रिफंड जारी होने और रिफंड विफल होने जैसी अलग-अलग स्थितियां दिखाई दे सकती हैं।
अगर रिटर्न की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और रिफंड तय हो गया है, लेकिन बैंक खाते में पैसा नहीं आया है तो रिफंड की स्थिति अलग से देखनी चाहिए। बैंक से जुड़ी वजह से रिफंड विफल होने पर सही जानकारी दर्ज करके दोबारा रिफंड जारी कराने की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। इसलिए शिकायत दर्ज कराने से पहले रिटर्न और रिफंड की सही स्थिति जांचना जरूरी हैं।
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