Samsung India Layoffs: 100 अधिकारियों पर गिरी गाज, दिवाली के बाद और भी Job Cut की बड़ी आशंका

Samsung
प्रतिरूप फोटो
social media
Ankit Jaiswal । Sep 8 2026 8:01PM

सैमसंग इंडिया द्वारा घरेलू उपकरणों और टेलीविजन डिवीजन में की जा रही छंटनी बढ़ती परिचालन लागत और बाजार पुनर्गठन की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है। लगभग 100 अधिकारियों की विदाई के बाद कंपनी का लक्ष्य खर्चों में कटौती कर वित्तीय दक्षता बढ़ाना है, हालांकि मोबाइल सेगमेंट को फिलहाल इस कटौती से सुरक्षित रखा गया है। सैमसंग की यह छंटनी भारतीय बाजार में बदलते मांग पैटर्न और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव का संकेत देती है।

सैमसंग इंडिया में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए मुश्किल खबर सामने आई है। बढ़ती लागत, कमजोर मांग और कंपनी में चल रहे पुनर्गठन के बीच टेलीविजन और घरेलू उपकरण कारोबार में कर्मचारियों की संख्या घटाई जा रही है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक करीब 80 से 100 अधिकारियों को कंपनी छोड़ने के लिए कहा जा चुका है। यह प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में चल रही है और इसमें कई स्तरों के कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, प्रभावित कर्मचारियों में निदेशक स्तर के अधिकारी, मुख्यालय के दल प्रमुख, शाखा प्रबंधक और क्षेत्रीय प्रबंधक शामिल हैं। कुछ कर्मचारियों को पिछले कुछ दिनों से रोजाना छोटे-छोटे समूहों में नौकरी समाप्त करने के पत्र दिए जा रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ कर्मचारियों को नोटिस अवधि पूरी किए बिना ही काम छोड़ने को कहा गया है।

कंपनी की ओर से कर्मचारियों को मुआवजे के तौर पर तीन महीने का वेतन देने के साथ सेवा के प्रत्येक वर्ष के लिए एक अतिरिक्त महीने का वेतन देने की पेशकश की जा रही है। हालांकि, मौजूदा कटौती केवल टेलीविजन और घरेलू उपकरण कारोबार तक सीमित दिखाई दे रही है, लेकिन आने वाले समय में इसका दायरा बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

उद्योग से जुड़े एक अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि सैमसंग के इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार की बिक्री और विपणन से जुड़ी करीब 25 प्रतिशत कार्यशक्ति प्रभावित हो सकती है। इसमें कंपनी के सीधे कर्मचारी और एजेंसियों के माध्यम से रखे गए कर्मचारी दोनों शामिल हैं। घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री टीम में लगभग 550 से 600 अधिकारी हैं। इसमें कंपनी की बड़ी मोबाइल बिक्री टीम शामिल नहीं है।

सैमसंग के भारतीय कारोबार पर दबाव कई मोर्चों से बढ़ा है। मेमोरी चिप की कीमतें दोगुने से भी ज्यादा हो गई हैं, जबकि वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रुपये में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट से आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान की लागत बढ़ी है। कच्चे माल की महंगाई ने भी कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ाया है।

गौरतलब है कि भारत में मोबाइल फोन बाजार भी हाल के समय में कमजोर हुआ है। उद्योग के अनुमान के मुताबिक, मोबाइल फोन की बिक्री में सालाना आधार पर 11 से 12 प्रतिशत तक गिरावट आई है। इसके बावजूद सैमसंग ने फिलहाल अपने मोबाइल कारोबार में कर्मचारियों की संख्या घटाने का फैसला नहीं किया है। कंपनी इस कारोबार को अपनी कमाई का सबसे अहम आधार मानती है और दिवाली के दौरान मांग बढ़ने की उम्मीद कर रही है।

प्रीमियम गैलेक्सी फोल्ड और फ्लिप जैसे महंगे मोबाइल को ग्राहकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन एक लाख रुपये से अधिक कीमत वाले मोबाइल की बाजार में हिस्सेदारी मात्रा के हिसाब से करीब 4 प्रतिशत ही है। अप्रैल से जून की तिमाही में सैमसंग भारत के मोबाइल बाजार में दूसरे से खिसककर तीसरे स्थान पर पहुंच गया। वीवो पहले और ओप्पो दूसरे स्थान पर रहा।

दिलचस्प बात यह है कि छंटनी ऐसे समय हो रही है जब सैमसंग इंडिया का कुल कारोबार मजबूत बना हुआ है। कंपनी के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में उसकी आय 12 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई थी। शुद्ध मुनाफा भी 38 प्रतिशत बढ़कर 11,287 करोड़ रुपये रहा। घरेलू उपकरण कारोबार कंपनी की बिक्री में करीब 11 प्रतिशत योगदान देता है।

कंपनी केवल कर्मचारियों की संख्या ही नहीं घटा रही, बल्कि अपने शाखा कार्यालयों का भी पुनर्गठन कर रही है। रांची को पटना, दिल्ली को गुरुग्राम और पंजाब को चंडीगढ़ के साथ मिलाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इससे कुछ पद अनावश्यक हो गए हैं। घरेलू उपकरण और टेलीविजन की बिक्री टीमों को एक करने की योजना भी बनाई गई थी, हालांकि इसे अब दिसंबर तिमाही तक टाल दिया गया है।

मौजूदा रिपोर्टों के मुताबिक, दिवाली के बाद टेलीविजन और घरेलू उपकरण कारोबार में कर्मचारियों की एक और कटौती हो सकती है। मोबाइल कारोबार में फिलहाल ऐसी कोई तत्काल योजना नहीं है, लेकिन त्योहारों के दौरान बिक्री के नतीजों के आधार पर आगे समीक्षा संभव है। यानी सैमसंग इंडिया के लिए मौजूदा स्थिति पूरी तरह संकट की नहीं, बल्कि बढ़ती लागत और बदलती मांग के बीच खर्च घटाकर कारोबार को अधिक कुशल बनाने की रणनीति का संकेत हैं।

All the updates here:

अन्य न्यूज़