SEBI ने Growpital समेत 28 इकाइयों पर लगाया 25 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना

SEBI ने Growpital समेत 28 इकाइयों पर लगाया 25 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना
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बाजार नियामक सेबी ने बिना वैध पंजीकरण के सामूहिक निवेश योजना संचालित करने के आरोप में कृषि निवेश मंच ग्रोपिटल और उससे जुड़ी 28 इकाइयों पर 25 करोड़ रुपये से अधिक की पेनल्टी लगाई है। इन इकाइयों को 5,208 निवेशकों से जुटाए गए 192.88 करोड़ रुपये 12 प्रतिशत सालाना ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया गया है। साथ ही मुख्य प्रमोटरों और इकाइयों को अधिकतम पांच साल के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

बाजार नियामक सेबी ने बिना पंजीकरण के सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) चलाने के मामले में कृषि निवेश मंच ग्रोपिटल समेत 28 इकाइयों पर 25 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया है। नियामक ने इन इकाइयों को प्रतिभूति बाजार से अधिकतम पांच साल के लिए प्रतिबंधित भी किया है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने फार्म टेक साइलो एलएलपी समेत आठ इकाइयों पर दो-दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

फार्म टेक साइलो को ग्रोपिटल के नाम से भी जाना जाता है। आठ इकाइयों में कंपनी के संस्थापक ऋतुराज शर्मा भी शामिल है। इन्हें पांच साल के लिए प्रतिभूति बाजार से भी प्रतिबंधित किया गया है।

इन इकाइयों को निवेशकों से कोई और पैसा जुटाने तथा किसी सामूहिक निवेश योजना को शुरू करने या संचालित करने से भी रोक दिया गया है। सेबी ने सोमवार को जारी 166 पृष्ठ के अंतिम आदेश में कहा कि उसकी जांच में पाया गया कि ग्रोपिटल से जुड़ी इकाइयों ने 5,208 अलग-अलग निवेशकों से 192.88 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बदले निवेशकों को उनके योगदान के आधार पर इकाइयां आवंटित की गईं।

बाजार नियामक के अनुसार, यह व्यवस्था बाजार नियमों के तहत सामूहिक निवेश योजना की शर्तों को पूरा करती थी। नियामक ने यह भी पाया कि फार्म साइलो टेक एलएलपी से करीब 95.60 करोड़ रुपये बिना किसी वास्तविक कारोबारी गतिविधि के योट्टा एग्रो वेंचर्स को हस्तांतरित किए गए। नियामक ने कहा कि यह व्यवस्था सामूहिक निवेश योजना थी, जिसे आवश्यक पंजीकरण के बिना संचालित किया गया।

इसके अलावा, इसमें धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार गतिविधियों की रोकथाम संबंधी नियमों का भी उल्लंघन हुआ। सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश सी वार्ष्णेय ने कहा कि कि करीब 20 इकाइयों ने धोखाधड़ी वाली गतिविधियों में ‘मदद और सहयोग’ किया। इन इकाइयों ने विभिन्न स्तरों वाली व्यवस्था के जरिये जेडएफ एलएलपी के बैंक खातों से योट्टा तक धन पहुंचाने के लिए माध्यम के रूप में काम किया, जबकि इसके पीछे कोई वास्तविक कारोबारी गतिविधि नहीं थी।

इसके अनुसार, नियामक ने इन 20 इकाइयों पर 20-50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया और उन्हें अधिकतम तीन साल के लिए प्रतिभूति बाजार से प्रतिबंधित कर दिया। सेबी ने निवेशकों से जुटाई गई बकाया राशि 12 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया है। ब्याज की गणना 29 जनवरी, 2024 से राशि लौटाए जाने की तारीख तक की जाएगी।

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