Sensex और Nifty में गिरावट जारी, 30 सितंबर को लाल निशान पर बंद हुआ Share Market

भारतीय शेयर बाजार में 30 सितंबर को गिरावट दर्ज की गई, जहां सेंसेक्स 48.78 अंक गिरकर 72,480.29 और निफ्टी 95.75 अंक टूटकर 22,620.45 पर बंद हुआ। कच्चे तेल के ऊंचे दाम, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और तकनीकी कमजोरी से बाजार पर दबाव रहा। सितंबर में निफ्टी 6.1 प्रतिशत और सेंसेक्स 5.8 प्रतिशत गिरा, जो मार्च के बाद सबसे बड़ी गिरावट है।
शेयर बाजार में बुधवार को पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दिन के ऊपरी स्तर से सेंसेक्स करीब 600 अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी भी कमजोर होकर 22,600 के स्तर के आसपास बंद हुआ। कच्चे तेल की ऊंची कीमत, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बाजार में तकनीकी कमजोरी के कारण घरेलू शेयर बाजार पर दबाव बना रहा।
30 सितंबर को सेंसेक्स 48.78 अंक यानी 0.07% गिरकर 72,480.29 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 95.75 अंक यानी 0.42% की गिरावट के साथ 22,620.45 पर रहा। पूरे बाजार में 2,049 शेयर बढ़त में बंद हुए, जबकि 2,139 शेयरों में गिरावट रही और 185 शेयर बिना बदलाव के बंद हुए।
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज और मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट सबसे ज्यादा दबाव में रहे। दोनों शेयरों में 6% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। आईटी क्षेत्र में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और एचसीएल टेक्नोलॉजीज दिन के नीचे आए, लेकिन फिर भी 1-2% की बढ़त के साथ बंद हुए। इंफोसिस करीब 1% गिरकर निफ्टी के आईटी सूचकांक में कमजोर रहने वाला प्रमुख शेयर रहा।
एचडीएफसी बैंक में करीब 1% की गिरावट रही और इसका असर निफ्टी पर भी पड़ा। वहीं आईसीआईसीआई बैंक ने बाजार को कुछ सहारा दिया। बैंक का शेयर 3% से ज्यादा चढ़कर निफ्टी का सबसे ज्यादा बढ़ने वाला प्रमुख शेयर रहा। रियल्टी क्षेत्र में ब्रिगेड एंटरप्राइजेज, डीएलएफ, प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स, ओबेरॉय रियल्टी और फीनिक्स मिल्स के शेयर 1-4% तक मजबूत हुए। इंटरग्लोब एविएशन में भी करीब 3% की बढ़त रही। वहीं ईटरनल का शेयर करीब 3% गिरा।
गौरतलब है कि सितंबर का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए काफी कमजोर रहा है। निफ्टी में पूरे महीने 6.1% की गिरावट आई और यह 22,620.45 पर आ गया। सेंसेक्स भी सितंबर में 5.8% टूटकर 72,480.29 पर बंद हुआ। यह दोनों प्रमुख सूचकांकों की लगातार दूसरी मासिक गिरावट है और मार्च के बाद सितंबर में सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज हुई है।
सितंबर में वित्तीय कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव रहा। वित्तीय क्षेत्र का सूचकांक 6.3% गिरा। बीमा क्षेत्र के नियामक द्वारा वितरण कमीशन पर प्रस्तावित सीमा की खबरों ने भी इस क्षेत्र की धारणा पर असर डाला। बजाज फिनसर्व, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट और मैक्स फाइनेंशियल सर्विसेज में क्रमशः 14.4%, 12.8% और 12.7% की गिरावट रही। बैंक, निजी बैंक और सरकारी बैंक से जुड़े सूचकांकों में भी 4.7% से 6.9% तक की कमजोरी आई।
ऑटो क्षेत्र में सितंबर के दौरान 8.8% की गिरावट रही और लगातार 5 महीने की बढ़त का सिलसिला टूट गया। आने वाले महीनों में वाहनों की बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका भी बाजार पर असर डाल रही है।
बाजार पर कच्चे तेल की कीमतों का भी दबाव रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए धन को जारी करने से जुड़ी किसी योजना से इनकार किया है। इसके बाद तेल की कीमतों में मजबूती आई। नवंबर का ब्रेंट कच्चा तेल 0.6% बढ़कर 103.17 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी चिंता का कारण बनी हुई है। मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में शुद्ध रूप से 9,980 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जो करीब 4 महीने में सबसे बड़ा एकदिवसीय बहिर्वाह रहा। सितंबर में अब तक उनकी बिकवाली 2.7 अरब डॉलर रही है, जबकि साल की शुरुआत से यह आंकड़ा 26.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
तकनीकी संकेत भी फिलहाल बाजार में सावधानी की ओर इशारा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार निफ्टी को मजबूती दिखाने के लिए 22,750 के ऊपर टिकना जरूरी है। 22,600 का स्तर अहम सहारा माना जा रहा है। इसके नीचे जाने पर 22,500 से 22,300 तक कमजोरी बढ़ सकती है। वहीं 22,830 के ऊपर टिकने पर 23,000 के आसपास वापसी की संभावना बन सकती है।
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