Delhi की नई EV Policy पर मचा बवाल, Taxi-Auto Union ने सरकार से पूछे तीखे सवाल

दिल्ली सरकार की 2027 से नए ऑटो-रिक्शा और दोपहिया वाहनों के लिए अनिवार्य ईवी नीति परिवहन संगठनों के विरोध का सामना कर रही है, जिन्होंने बुनियादी ढांचे की कमी को लेकर उपराज्यपाल को पत्र लिखकर नीति पर पुनर्विचार की मांग की है।
दिल्ली में नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति को लेकर परिवहन क्षेत्र से जुड़े संगठनों की ओर से विरोध के स्वर सामने आने लगे हैं। मौजूद जानकारी के अनुसार, टैक्सी और ऑटो चालकों के संगठन दिल्ली एनसीआर ट्रांसपोर्ट एकता मंच ने नई नीति के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए दिल्ली के उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना को एक पत्र भेजा है। संगठन का कहना है कि आवश्यक तैयारियां पूरी किए बिना इलेक्ट्रिक वाहनों को अनिवार्य बनाना व्यावहारिक नहीं होगा।
बता दें कि दिल्ली सरकार की नई विद्युत वाहन नीति के अनुसार एक जनवरी 2027 से राजधानी में नए तीन पहिया वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के रूप में ही किया जाएगा। इसके अलावा अप्रैल 2028 से नए दोपहिया वाहनों के लिए भी केवल इलेक्ट्रिक मॉडल के पंजीकरण का प्रावधान रखा गया है। सरकार का उद्देश्य प्रदूषण कम करना और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।
हालांकि, दिल्ली एनसीआर ट्रांसपोर्ट एकता मंच के महासचिव श्याम सुंदर ने नौ जुलाई को भेजे गए पत्र में कहा है कि मौजूदा समय में राजधानी में पर्याप्त चार्जिंग केंद्र, बैटरी बदलने की सुविधाएं, आसान वित्तीय सहायता, किफायती ऋण और पुराने बैटरियों के सुरक्षित निपटान तथा पुनर्चक्रण की स्पष्ट व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
श्याम सुंदर का कहना है कि यदि इन बुनियादी सुविधाओं के बिना इलेक्ट्रिक वाहनों को अनिवार्य किया गया तो इसका सबसे अधिक असर लाखों वाहन चालकों, छोटे परिवहन कारोबारियों और व्यक्तिगत वाहन मालिकों पर पड़ेगा। उनके अनुसार इससे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा और कई लोगों के लिए अपने पुराने वाहनों को बदलना मुश्किल हो जाएगा।
गौरतलब है कि संगठन ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि वह स्वच्छ पर्यावरण और आधुनिक तकनीक का समर्थन करता है। लेकिन किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले पर्याप्त तैयारी, जरूरी संसाधनों की उपलब्धता और सभी संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा होना आवश्यक है।
संगठन ने सरकार से मांग की है कि प्रस्तावित अनिवार्य इलेक्ट्रिक वाहन व्यवस्था पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए। साथ ही सभी परिवहन संगठनों, वाहन चालकों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ विस्तृत सार्वजनिक विचार-विमर्श आयोजित किया जाए, ताकि ऐसी नीति तैयार हो सके जिसे लागू करने में किसी वर्ग को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन इसके लिए मजबूत आधारभूत ढांचा, पर्याप्त चार्जिंग सुविधाएं, आसान ऋण व्यवस्था और व्यवहारिक बदलाव की योजना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार और परिवहन संगठनों के बीच होने वाली बातचीत इस नीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
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