कमजोर Dollar और कच्चे तेल में गिरावट से Gold Price में तेजी, 3 साल बाद बढ़ी ब्याज दर

Gold Rate
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Ankit Jaiswal । Sep 17 2026 10:10PM

अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा करीब तीन साल में पहली बार ब्याज दरें बढ़ाने के बावजूद गुरुवार को सोने की कीमतों में तेजी आई। कमजोर डॉलर और कच्चे तेल में गिरावट ने सोने की कीमतों को मजबूती दी। अब बाजार की नजर फेड की अक्टूबर में होने वाली बैठक पर टिकी है।

सोने की कीमतों में गुरुवार को तेज उछाल देखने को मिला है। अमेरिका में ब्याज दर बढ़ाए जाने के बावजूद कमजोर डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने सोने की मांग को सहारा दिया है। बाजार में निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, गुरुवार को शुरुआती कारोबार में हाजिर सोने की कीमत करीब 2.4 प्रतिशत बढ़कर 4,366.93 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई थी। वहीं, सोने के वायदा भाव में करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 4,406.75 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहा। बाद में भी सोना मजबूत बना रहा। रायटर के मुताबिक, हाजिर सोना दिन में करीब 2.3 प्रतिशत ऊपर 4,361.07 डॉलर प्रति औंस पर था।

सोने की इस तेजी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट है। हाल के दिनों में तेल की कीमत और सोने के बीच उलटा संबंध देखने को मिला है। जब तेल महंगा होता है तो महंगाई बढ़ने की चिंता मजबूत होती है। इससे ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका बढ़ जाती है और बिना ब्याज देने वाली संपत्ति के रूप में सोने पर दबाव आ सकता है।

इसके उलट, तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई को लेकर दबाव कुछ कम होने की उम्मीद बनती है। गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतें एक सप्ताह के निचले स्तर तक पहुंच गईं। आपूर्ति को लेकर चिंता कम होने से भी तेल बाजार में दबाव देखने को मिला है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता अभी बनी हुई है।

डॉलर में कमजोरी ने भी सोने को सहारा दिया है। अमेरिकी डॉलर सूचकांक सात सप्ताह के ऊंचे स्तर से नीचे आया है। आम तौर पर डॉलर कमजोर होने पर दूसरी मुद्राओं में सोना खरीदने वालों के लिए इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम हो जाती है। इससे सोने की मांग बढ़ सकती है।

गौरतलब है कि अमेरिका के केंद्रीय बैंक ने बुधवार को ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इसके बाद दरों का लक्ष्य 3.75 से 4 प्रतिशत के बीच हो गया है। यह करीब तीन साल में पहली बार है जब अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ाई है। फैसला सभी सदस्यों की सहमति से लिया गया है और केंद्रीय बैंक ने कहा है कि महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक के प्रमुख केविन वॉर्श ने महंगाई पर काबू पाने की प्रतिबद्धता दोहराई है। बाजार में अब अक्टूबर की अगली बैठक को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज के आंकड़ों के आधार पर कारोबारियों को अक्टूबर में फिर ब्याज दर बढ़ने की करीब 51 प्रतिशत संभावना दिखाई दे रही है, जो एक दिन पहले करीब 44 प्रतिशत थी।

ब्याज दर बढ़ने से आम तौर पर सोने पर दबाव आता है, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता, जबकि सुरक्षित माने जाने वाले सरकारी बांड से निवेशकों को ब्याज मिलता है। हालांकि इस समय डॉलर और तेल की चाल तथा महंगाई को लेकर बदलती उम्मीदों ने सोने को मजबूती दी है। अमेरिकी सरकारी बांड की 10 साल की ब्याज दर में भी गिरावट आई है, जिससे सोने के लिए माहौल कुछ बेहतर हुआ है।

बता दें कि सोने के साथ अन्य कीमती धातुओं में भी तेजी रही है। चांदी करीब 4.6 प्रतिशत, प्लैटिनम 1.9 प्रतिशत और पैलेडियम 1.4 प्रतिशत तक चढ़े हैं। जानकारों का मानना है कि आगे सोने की दिशा तय करने में अमेरिकी ब्याज दरों, डॉलर, कच्चे तेल और वैश्विक तनाव की भूमिका अहम रहेगी। ऐसे में आने वाली केंद्रीय बैंक बैठकें और महंगाई से जुड़े आंकड़े बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

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