प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैसे विश्व के ताकतवर नेता बन गए? उनके गूढ़ राजनीतिक गुणों के बारे में जानिए

पीएम मोदी ने पारंपरिक गुटनिरपेक्षता की नीति को बदलते हुए 'मल्टी-अलाइनमेंट' की रणनीति अपनाई। भारत ने एक ही समय में अमेरिका, रूस, यूरोप और मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) के साथ मजबूत व्यापारिक और सुरक्षा संबंध बनाए रखे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक क्षेत्रीय नेता से वैश्विक पटल पर सबसे प्रभावशाली शीर्ष नेताओं में शामिल होना, उनकी सुदृढ़ रणनीतिक सोच, जनसंपर्क क्षमता और कूटनीतिक दूरदर्शिता का परिणाम है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के सबसे प्रमुख और चर्चित चेहरों में से एक हैं। देश की जनता उन्हें अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखती है, और विपक्षी नेताओं के साथ उनके राजनीतिक समीकरणों के पीछे कई रणनीतिक कारण हैं।
तो आइए सबसे पहले उनके प्रमुख गूढ़ राजनीतिक गुण निम्नलिखित हैं:
एक, रणनीतिक कूटनीति और बहु-ध्रुवीय संतुलन: पीएम मोदी ने पारंपरिक गुटनिरपेक्षता की नीति को बदलते हुए 'मल्टी-अलाइनमेंट' की रणनीति अपनाई। भारत ने एक ही समय में अमेरिका, रूस, यूरोप और मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) के साथ मजबूत व्यापारिक और सुरक्षा संबंध बनाए रखे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच वैश्विक दबावों के बावजूद भारत के राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना और वैश्विक दक्षिण की आवाज बनना उनकी मजबूत कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है।
इसे भी पढ़ें: नरेन्द्र मोदी: दृढ़ संकल्प, सशक्त नेतृत्व, दूरदृष्टा और सर्वांगीण विकास के प्रेरणादायक प्रतीक
दो, दूरदर्शी जन-संचार और ब्रांडिंग: मोदी जी जन-संवाद के अद्वितीय विशेषज्ञ हैं। 'मन की बात', विशाल जनसभाओं और सोशल मीडिया के माध्यम से वे जनता से सीधे जुड़ते हैं। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक मंचों (जैसे- योग दिवस, जी-20 की भारत की अध्यक्षता, ब्रिक्स की अध्यक्षता) पर प्रस्तुत कर देश की 'सॉफ्ट पावर' को अत्यधिक मजबूत किया है।
तीन, साहसिक और निर्णायक निर्णय क्षमता: राजनीतिक जोखिम उठाने और बड़े फैसले लेने में वे झिझकते नहीं हैं। सर्जिकल स्ट्राइक, धारा 370 का निष्प्रभावीकरण, जीएसटी, और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं से उन्होंने यह संदेश दिया कि वे दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित के लिए कड़े कदम उठाने में सक्षम हैं।
चार, तकनीकी और कल्याणकारी सुशासन: डिजिटल इंडिया, आधार और यूपीआई के समावेश से सीधे बैंक खातों में जन-कल्याणकारी योजनाओं का पैसा पहुंचाकर उन्होंने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया और प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाई। इस मॉडल को वैश्विक स्तर पर एक सफल उदाहरण के रूप में देखा जाता है।
पांच, कैडर संगठन और विशाल राजनीतिक तंत्र: जमीनी स्तर पर काम करने और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं भारतीय जनता पार्टी के कैडर संगठन का गहरा अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वे केवल नीतियों पर ध्यान केंद्रित नहीं करते, बल्कि उन नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए पार्टी कैडर और नौकरशाही का कुशलता से उपयोग करते हैं।
# प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक विदेश नीति और प्रमुख आंतरिक सुधारों का विवरण इस प्रकार हैं:-
एक, वैश्विक विदेश नीति: 'भारत प्रथम' और बहु-ध्रुवीय कूटनीति: भारत की आधुनिक विदेश नीति को 'मोदी सिद्धांत' (Modi Doctrine) के रूप में भी देखा जाता है। इसके मुख्य स्तंभ हैं:
- पड़ोस प्रथम नीति: दक्षिण एशिया में भारत की उपस्थिति और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे, बिजली और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर विशेष ध्यान देना।
- एक्ट ईस्ट नीति: पूर्वी एशियाई और आसियान: देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को गहरा करना।
- ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: विकासशील और गरीब देशों की प्राथमिकताओं (जैसे जलवायु न्याय, ऋण राहत और खाद्य सुरक्षा) को G20 जैसे मंचों पर उठाना।
- रणनीतिक स्वायत्तता: किसी एक गुट में शामिल न होकर राष्ट्रहित के आधार पर अमेरिका, रूस, इजराइल और खाड़ी देशों के साथ स्वतंत्र संबंध बनाना।
दो, प्रमुख आंतरिक सुधार: प्रशासनिक और आर्थिक कायाकल्प के क्षेत्र, प्रमुख पहल, उसके प्रभाव और परिणाम
- डिजिटल क्रांति: डिजिटल इंडिया (UPI, Aadhaar, DigiLocker), भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल भुगतान तंत्र बन गया; पारदर्शिता में वृद्धि करना।
- कल्याणकारी तंत्र: डीबीटी (Direct Benefit Transfer) & जन धन योजना, बिचौलियों का खात्मा; करोड़ों रुपये की सीधे लाभार्थियों के खातों में डिलीवरी करना।
- कर व आर्थिक सुधार: जीएसटी & आईबीसी, "एक देश, एक कर" व्यवस्था; व्यापार में सुगमता और डूबे हुए कर्जों (NPA) का समाधान करना।
- संरचनात्मक विकास : पीएम गतिशक्ति & नेशनल इंफ्रा पाइपलाइन, राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों का तेज गति से आधुनिकीकरण करना।
- सुरक्षा और कानून : धारा 370 की समाप्ति & नया नागरिक न्याय कानून, जम्मू-कश्मीर का मुख्यधारा में एकीकरण; औपनिवेशिक कालीन आपराधिक कानूनों में सुधार करना।
# आखिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारतवासी किस किस रूप में देखते हैं? नेता उनसे क्यों चिढ़ते हैं?
आइए जानते हैं, भारतवासी प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी को किस-किस रूप में देखते हैं?
एक, कड़े और मजबूत फैसले लेने वाले नेता (निर्णायक नेतृत्व): उनके समर्थक उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो राष्ट्रहित में बड़े और साहसिक फैसले लेने से पीछे नहीं हटते (जैसे- सर्जिकल स्ट्राइक, धारा 370 का हटना या बड़े आर्थिक सुधार)।
दो, विकास पुरुष और आधुनिक भारत के निर्माता: कई लोग उन्हें डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, बुनियादी ढांचे (हाईवे, वंदे भारत एक्सप्रेस, एयरपोर्ट) के विस्तार और 'आत्मनिर्भर भारत' का विज़न देने वाले प्रशासक के रूप में देखते हैं।
तीन, कल्याणकारी योजनाओं के प्रदाता: देश का एक बड़ा गरीब और मध्यम वर्ग उन्हें उज्ज्वला योजना, जनधन खाते, पीएम आवास योजना और मुफ्त राशन जैसी सीधी योजनाओं के माध्यम से उनके जीवन को आसान बनाने वाले संरक्षक के रूप में देखता है।
चार, सांस्कृतिक पुनरुत्थान के प्रतीक: बहुसंख्यक समाज का एक वर्ग उन्हें हिंदू संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रीय गौरव को वैश्विक मंच पर पुनर्स्थापित करने वाले नेता के रूप में देखता है।
पांच, कठोर और केंद्रित प्रशासक (आलोचकों की नज़र में): आलोचक या विरोधी उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो केंद्रीकृत निर्णय लेते हैं और विपक्ष या मीडिया के साथ संवाद के सीमित अवसर देते हैं।
# राजनीतिक विरोधी और अन्य नेता उनसे क्यों असहज रहते हैं?
विपक्षी नेताओं की चिढ़ या असहमति के पीछे मुख्य रूप से राजनीतिक, वैचारिक और रणनीतिक कारण हैं:
एक, चुनावी मशीनरी और अपराजित छवि: मोदी का मजबूत संगठन (बीजेपी) और उनकी व्यक्तिगत जन-स्वीकार्यता विपक्षी दलों की पारंपरिक राजनीति और वोट बैंक को लगातार चुनौती देती है।
दो, सीधा जन-संवाद: 'मन की बात' और सोशल मीडिया के माध्यम से मोदी जनता से बिना किसी बिचौलिए के सीधे जुड़ते हैं, जिससे पारंपरिक राजनीतिक बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है।
तीन, कठोर राजनीतिक और संस्थागत टकराव: विपक्ष का आरोप रहता है कि मोदी सरकार में केंद्रीय जांच एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों पर दबाव बनाने के लिए किया जाता है।
चार, वैचारिक भिन्नता: कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे और समावेशी राजनीति के लिए उनकी हिंदुत्व आधारित विचारधारा को चुनौती मानते हैं।
बावजूद इसके पीएम नरेंद्र मोदी किसी से नहीं दबते। उन्होंने बहुत सही कार्य किए, लेकिन हिंदुत्व और जातिवाद को लेकर उनके मंत्रियों ने जो जो वैधानिक कुकृत्य किए, कराए, इससे उनका वह जनाधार दांव पर है, जिसने उन्हें हर हर मोदी, घर घर मोदी के रूप से सर्वस्वीकार्य बनाया। यदि इसकी काट वो ढूंढ लेते हैं तो एनडीए अपराजेय रहेगा, अन्यथा यूसीसी के बहाने बिहार से भगदड़ के संकेत मिलने लगे हैं।
- कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
अन्य न्यूज़














