क्या आप है लिखने के शौकीन, ऐसे बनाए लेखन के क्षेत्र में अपना कॅरियर

क्या आप है लिखने के शौकीन, ऐसे बनाए लेखन के क्षेत्र में अपना कॅरियर

पढ़ने से तात्पर्य ना केवल टेक्स्ट कंटेंट पढ़ना है, बल्कि जिस विषय पर भी आप लेखन करना चाहते हैं, उस विषय पर आप वीडियोज भी देख सकते हैं। अगर आपको लगता है कि कोई संबंधित व्यक्ति उस विषय पर कुछ जानकारी रखता है, तो उससे चर्चा भी कर सकते हैं।

वर्तमान समय में कोविड-19 के संकट ने लोगों की जिंदगी में उथल-पुथल मचा दी है। ऐसे में कई लोगों के जमे जमाए कैरियर ऑप्शन डिस्टर्ब हुए हैं तो कइयों के सामने नई राह खोजने की चुनौती भी मुंह बाए खड़ी है।

इन्हीं राहों में से एक राह लेखक बनने की भी है। चूंकि वर्तमान समय में पूरी दुनिया ऑनलाइन माध्यमों पर प्रभावी ढंग से शिफ्ट होने की और बढ़ चली है, ऐसे में जाहिर तौर पर कंटेंट रायटर्स का प्रभाव अगर बहुत ज्यादा नहीं भी बढ़ेगा तो भी इसमें एक मजबूती अवश्य आएगी।

तो यह वक़्त सोचने-विचरने का है कि क्या आप भी शौकिया तौर पर लेखन करते रहे हैं? क्या आपके द्वारा लिखी सोशल मीडिया पोस्ट पर लोग प्रसन्न होते हैं और लाइक शेयर करना चाहते हैं? क्या वाकई आपको अपना लिखा पढ़कर आनंद मिलता है?

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अगर इनमें से कोई भी लक्षण आपको अपने भीतर महसूस होता है और आप लेखन को फुल टाइम या पार्ट टाइम कैरियर बनाना चाहते हैं तो आइए यह लेख आपके लिए ही है।

पढ़ना जरूरी है

आप कहेंगे कि लिखने से पढ़ने का क्या संबंध है तो आप यह जान लीजिए कि इन दोनों में बड़ा गहरा नाता है। अगर आप हजार शब्द पड़ते हैं तब कहीं जाकर 100 वर्ड लिखने की क्षमता आपके भीतर आती है। इसे आप एक काल्पनिक अनुपात मान लें, लेकिन पढ़ने की आदत आपके भीतर विचार व शब्द का भंडार बनाती है और उसे ही आप अपने कीबोर्ड द्वारा स्क्रीन पर उड़ेल सकते हैं। 

पढ़ने से तात्पर्य ना केवल टेक्स्ट कंटेंट पढ़ना है, बल्कि जिस विषय पर भी आप लेखन करना चाहते हैं, उस विषय पर आप वीडियोज भी देख सकते हैं। अगर आपको लगता है कि कोई संबंधित व्यक्ति उस विषय पर कुछ जानकारी रखता है, तो उससे चर्चा भी कर सकते हैं। ऐसे में विषय को लेकर आपके भीतर एक अच्छी समझ का विकास होगा, जिसे आप लेखन की पहली शर्त मान सकते हैं।

मौलिकता

इंटरनेट पर कंटेंट के मामले में मौलिकता, यानी यूनिक कंटेंट की डिमांड सर्वाधिक है। अगर आप पढ़ भी लेते हैं और आप काट छांट करके लिख भी लेते हैं, तो भी आप प्रभावी तब तक नहीं बनेंगे, जब तक उसमें कुछ मौलिकता ना आए। 

मौलिकता का मतलब शब्दों का ढेर और उसे उलटना-पलटना भर ही नहीं है, बल्कि इसे एक नए नजरिए से प्रस्तुत करना आप मान सकते हैं। 

इसे कुछ यूं समझें।

हाल फिलहाल तमाम टेलीविजन चैनलों पर रामायण और महाभारत आ रहे हैं।  महाभारत की ही अगर बात करें तो यह एक बहुत ही लोकप्रिय धारावाहिक रहा है।

पहला महाभारत 80 के दशक में बना था जिसे बीआर चोपड़ा ने बनाया था, वहीं कुछ साल पहले स्टार प्लस पर प्रसारित होने हेतु भी एक महाभारत बनी थी। आप ध्यान देंगे, तो दोनों की मूल कहानी एक ही है, लेकिन दोनों के प्रेजेंटेशन में एक मौलिकता भी है। 

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जाहिर तौर पर दोनों महाभारत सीरियल अपने-अपने समय में ब्लॉकबस्टर साबित हुए।

आप मौलिकता की बारे में और समझने के लिए एक ही कंटेंट को अलग-अलग वेबसाइट पर पढ़ने की कोशिश करें। जैसे अगर सुबह कोई न्यूज़ आती है तो उसे अलग चैनल वाले, अलग वेबसाइट वाले अपडेट करते हैं। उसमें काफी कुछ समानता ही होती है, लेकिन जब आप लगातार फॉलो करेंगे तो आप समझ पाएंगे कि वास्तव में मौलिकता नए तरीके से कैसे प्रजेंट की जा सकती है। 

ऐसे में कंटेंट लिखते समय आप भी निष्कर्ष निकाल सकते हैं और अपना इनपुट दे सकते हैं।

क्या है कि मौलिकता 1 दिन में सामने नहीं आती। खासकर तब, जब आप दूसरों के लिए प्रोफेशनल कंटेंट लिख रहे हों। हाँ, अगर कविता कहानी या लिटरेचर लिखना हो, तब तो आप एक हद तक मौलिक हो भी सकते हैं, लेकिन अगर प्रोफेशनल कंटेंट लिखना हो, वेबसाइट के लिए कंटेंट लिखना है, तब आपको थोड़ा समय लगता है और मौलिकता के लिए थोड़ी मशक्कत भी करनी पड़ती है।

फोकस

सफलता के लिए यह बहुत जरूरी चीज है। 

महाभारत की चर्चा ऊपर के पैराग्राफ में की गई है, तो उसी का एक उदाहरण लेते हैं। हम सबको पता है कि किस प्रकार से कुरु राजकुमारों के गुरु द्रोणाचार्य ने अपने शिष्यों की परीक्षा लेते समय चिड़िया की आंख पर फोकस करने के लिए अर्जुन को शाबाशी दी थी। 

यह सच है कि फोकस करने की अद्भुत कला ने ही अर्जुन को विश्व का महानतम धनुर्धर बनाया।

लेखन के लिए इस बात को आप यूं समझ सकते हैं कि आप पढ़िए बेशक सब कुछ, लेकिन सब कुछ लिखने की बजाय लेखन के लिए कुछ एरिया सुनिश्चित करें। कैटेगरी चुनें। 

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वह चाहे पॉलिटिक्स या समाजशास्त्र के बारे में हो, या बिजनेस की कोई एक कैटेगरी हो या इंडस्ट्री की बात करें तो किसी एक खास इंडस्ट्री पर आप लेखन हेतु फोकस कर सकते हैं। ऐसे में आप जल्दी और बेहतर परिणाम ला सकेंगे और आपको कार्य मिलने की निश्चितता भी बढ़ेगी।

कार्य कैसे ढूंढे?

शुरू में आपको थोड़ी मुश्किल ज़रूर आ सकती है, लेकिन अगर आप लगातार लगे रहे तो यकीन मानिए यह कला आपको जीविकोपार्जन के साथ साथ आगे भी बढ़ा सकती है। 

सबसे पहले आप अपने लेखन का एक प्रोफाइल बनायें। वह कोई सोशल मीडिया का पेज भी हो सकता है, लेकिन ज्यादा बेहतर होगा, अगर आप कोई ब्लॉग या कोई अपनी पर्सनल वेबसाइट मेंटेन करें। यह आपके लेखन का एक तरह से डेटाबेस बन जाता है, जिसे आप कहीं भी प्रजेंट कर सकते हैं।

हालांकि सिर्फ इतने भर से ही आपको सफलता नहीं मिलने वाली है। अगर आप अपने प्रोफाइल को मेंटेन कर लेते हैं और उसे रेगुलर अपडेट भी करते रहते हैं, उसके बावजूद भी जिस विषय पर आपकी लेखन शैली प्रभावी है, आपको यह सर्च करना पड़ेगा कि उस विषय पर कौन सी वेबसाइट या कौन सी कंपनियां कार्य कर रही हैं। 

फिर धीरे-धीरे प्रयास करते करते आप तमाम वेबसाइट, एप्लीकेशन और कंपनियों से संपर्क करते हैं और शुरुआत में कम रेट पर अपनी लेखन सर्विस को ऑफर करते हैं। ऐसे में जब आपको कार्य मिलने लगता है तो धीरे-धीरे आप इस बारे में मजबूत होते चले जाते हैं।

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ध्यान रहे यह कोई 1 दिन का गेम नहीं है, बल्कि लगातार की जाने वाली प्रक्रिया है और सुधार करते हुए जब आप साधना करते हैं, तभी आपको सफलता भी मिलती है। 

हालांकि वर्तमान में तमाम ऐसी भी वेबसाइट्स हैं, जहां पर आप रजिस्टर करके फ्रीलांस लेखन के लिए अप्लाई कर सकते हैं, लेकिन आपको फिर याद दिला दें कि यह कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, लेकिन अगर आप लगे रहे तो आपको सफलता से कोई रोक भी नहीं सकता।

हां अपनी गलतियों को पकड़ना और उसमें सुधार करना आपको निरंतर जारी रखना होगा और तब ही आप अपने शौकिया लेखन को एक व्यवसायिक रूप दे सकते हैं।

- मिथिलेश कुमार सिंह