यूपी में प्रियंका वाड्रा की मेहनत पर खुद कांग्रेस के नेता ही पानी फेर रहे हैं

यूपी में प्रियंका वाड्रा की मेहनत पर खुद कांग्रेस के नेता ही पानी फेर रहे हैं

एक तरफ तो उनकी शीर्ष नेता प्रियंका वाड्रा लगातार मंदिर-मंदिर घूम कर हिन्दुओं को खुश करने में लगी हैं तो दूसरी तरफ सलमान खुर्शीद, मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर जैसे नेता ही नहीं स्वयं राहुल गांधी भी हिन्दुओं की देशभक्ति पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस दो बातों के लिए सबसे अधिक चर्चा में है। एक तरफ कांग्रेस की महासचिव और यूपी की प्रभारी प्रियंका वाड्रा यूपी चुनाव में कांग्रेस की वैतरणी पार लगाने के लिए पूरी ताकत झोंके हुए हैं तो दूसरी और कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता प्रियंका का ‘सहारा’ बनने की बजाय पार्टी से किनारा करते जा रहे हैं। पिछले करीब छह-सात महीनों में करीब दर्जन भर कांग्रेस के दिग्गज नेता पार्टी से किनारा करके भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी का दामन थाम चुके हैं। कांग्रेस में सबसे अधिक सेंधमारी बीजेपी की तरफ से लगाई जा रही है। राजनैतिक पंडितों का कहना है कि जब कांग्रेस के नेताओं को पार्टी की ताकत बनना चाहिए था तब उनका विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक के बाद पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं है।

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जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि प्रियंका को बाहर से नहीं घर के भीतर से ही चुनौती मिल रही है। वर्ना आज कांग्रेस की स्थिति में काफी सुधार नजर आता। इस हकीकत से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि पिछले कुछ महीनों में प्रियंका ने जिस तरह से यूपी में तेजी दिखाई थी, उससे सपा-बसपा ही नहीं बीजेपी भी हलकान नजर आ रही थी, लेकिन कांग्रेसियों की दगाबाजी के चलते कांग्रेस प्रचार के मामले में अपनी बढ़त खोती जा रही है। बात कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के पार्टी छोड़कर जाने तक ही सीमित नहीं है, सच्चाई तो यह भी है जो कांग्रेसी पार्टी में मौजूद भी हैं, वह भी चुनावी मौसम में कुंभकरण की नींद सोए हुए हैं। यह लोग कहीं प्रचार में नजर नहीं आते हैं। उलटे अनाप-शनाप बयानबाजी करके पार्टी को नुकसान ही पहुंचा रहे हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री सलमान खुर्शीद इसकी सबसे बड़ी मिसाल हैं जो हिन्दुओं की तुलना आतंकवादी संगठनों से करके प्रियंका के प्रयासों पर पानी फेरने में लगे हैं। कांग्रेसी नेताओं की नासमझी ही कही जाएगी कि एक तरफ तो उनकी शीर्ष नेता प्रियंका वाड्रा लगातार मंदिर-मंदिर घूम कर हिन्दुओं को खुश करने में लगी हैं तो दूसरी तरफ सलमान खुर्शीद, मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर जैसे नेता ही नहीं स्वयं राहुल गांधी भी हिन्दुओं की देशभक्ति पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर कौन है जो प्रियंका वाड्रा और कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है? कभी कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहने वाली समाजवादी पार्टी क्यों कांग्रेस के नेताओं को तोड़कर अपनी पार्टी में शामिल करा रही है? क्या ये प्रियंका गांधी को कमजोर करने की कोई राजनीतिक रणनीति है?

     

बात कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं की कि जाए तो इसमें करीब दर्जन भर ऐसे नेता शामिल हैं जो कभी कांग्रेस की रीढ की हड्डी हुआ करते थे। जितिन प्रसाद इसमें बससे बड़ा नाम है, जिसे कांग्रेस ब्राह्मण चेहरे के रूप में आगे करे हुए थी। अब जितिन बीजेपी का ब्राह्मण चेहरा ही नहीं योगी सरकार में मंत्री भी बने हुए हैं। राहुल गांधी के करीबी और मनमोहन सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रहे जितिन प्रसाद ने सबसे पहले कांग्रेस छोड़ी। जितिन प्रसाद ने कांग्रेस छोड़ने के दौरान कहा था कि मैंने कांग्रेस किसी व्यक्ति के चलते या किसी पद के लिए नहीं छोड़ी। मेरे कांग्रेस छोड़ने का कारण यह था कि पार्टी और लोगों के बीच संपर्क टूट गया था और यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी का वोट प्रतिशत कम होता जा रहा है। इसके अलावा पार्टी को फिर से पटरी पर लाने के लिए भी कोई योजना नहीं है।

इसी तरह से पिछले दिनों कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और पूर्व सांसद राजाराम पाल ने पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के लिए मेरा खून भी समर्पित है। सपा के विजय रथ को आगे बढ़ाने में मेरा शरीर काम आया तो लगा दूंगा। इस कड़ी में पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी के बेटे और कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे राजेश पति त्रिपाठी का नाम सबसे अधिक चौंकाने वाला रहा। त्रिपाठी परिवार तीन पीढ़ियों से कांग्रेस की सेवा कर रहा था, लेकिन राजेश को भी अपनी उपेक्षा के चलते पार्टी छोड़नी पड़ गई। राजेश कांग्रेस से एमएलसी भी रहे। पूर्वांचल के ब्राह्मण वोटर्स में राजेश पति की अच्छी पकड़ मानी जाती है। राजेश पति तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। इसी तरह से कमलापति त्रिपाठी परिवार के एक और सदस्य तथा मिर्जापुर के मड़िहान से कांग्रेस के विधायक रह चुके ललितेश पति त्रिपाठी ने भी अपने पिता राजेश पति त्रिपाठी के साथ पार्टी छोड़ दी थी। ललितेश अब तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं।

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पूर्व सांसद और प्रियंका गांधी के सलाहकार समिति के सदस्य रहे हरेंद्र मलिक भी कांग्रेस छोड़कर समाजवादी हो चुके हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हरेंद्र की अच्छी पकड़ मानी जाती है। पूर्व विधायक और हरेंद्र मलिक के बेटे पंकज मलिक ने भी अब समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवाओं के बीच पंकज की अच्छी पकड़ है। हमीरपुर के राठ से पूर्व विधायक गयादीन अनुरागी भी अब समाजवादी हो चुके हैं। गयादीन ने पिछले दिनों सपा मुखिया अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ले ली थी। 2012 में कांग्रेस के टिकट से राठ विधानसभा क्षेत्र से गयादीन विधायक चुने गए थे। जालौन के उरई से विधायक रहे विनोद चतुर्वेदी प्रियंका गांधी के सलाहकार समिति के सदस्य भी थे। उन्हें बुंदेलखंड में कांग्रेस का बड़ा चेहरा माना जाता था। कांग्रेस ने तीन बार उन्हें कांग्रेस का जिलाध्यक्ष बनाया और एक बार पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी दी। विनोद अब सपा का दामन थाम चुके हैं। महोबा में कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे मनोज तिवारी भी अब समाजवादी हो गए हैं। मनोज के पिता बाबूलाल तिवारी पांच बार कांग्रेस से विधायक रहे। अभी रायबरेली की विधायक अदिती सिंह ने भी कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है, जो कांग्रेस के लिए कम बड़ा झटका नहीं है।

-अजय कुमार