केरल में तेजी से आगे बढ़ रही है हिंदी, राजभाषा का भविष्य यकीनन उज्ज्वल है

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8वीं तक हिंदी की अनिवार्य पढ़ाई और सूचना पटि्टकाओं पर हिंदी के उपयोग से मलयालम भाषा को कोई खतरा नहीं पैदा हुआ है, ना ही मलयाली लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँची है, ना ही कोई राजनीतिक विवाद हुआ।

तमिलनाडु में कुछ राजनीतिक तत्व भले राजभाषा हिंदी का विरोध करते रहे हों लेकिन दक्षिण भारत का ही राज्य केरल भी है, जहाँ हिंदी के बढ़ते रुतबे को देखकर मन को बेहद प्रसन्नता होती है। केरल की यात्रा के दौरान अनुभव किया कि चाहे बड़े से बड़े होटल चले जाइये, छोटे से छोटे ढाबे पर चले जाइये, शॉपिंग मॉल चले जाइये, स्थानीय पनसारी की दुकान पर चले जाइये, हर जगह हिंदी जानने वाले, बोलने वाले लोग आपको मिलेंगे। हिंदी को सबसे बड़ा समर्थन केरल की सरकार से मिलता है जिसने 8वीं कक्षा तक हिंदी पढ़ना अनिवार्य कर रखा है। आप चाहें तो 8वीं के बाद भी हिंदी की पढ़ाई कर सकते हैं। हाल ही में जब एर्नाकुलम में फर्राटेदार मलयाली बोलने वाली एक छात्रा शान्वी से मुलाकात हुई तो उसकी अच्छी हिंदी देखकर राजभाषा के उज्ज्वल भविष्य के प्रति और आशान्वित हो गया। 

यही नहीं आप केरल में कहीं भी जाइये, आपको अधिकतर सूचना पटि्टकाएं ऐसी मिलेंगी जिनमें हिंदी में भी लिखा हुआ है। तो एक बात तो यह साबित हुई कि 8वीं तक हिंदी की अनिवार्य पढ़ाई और सूचना पटि्टकाओं पर हिंदी के उपयोग से मलयालम भाषा को कोई खतरा नहीं पैदा हुआ है, ना ही मलयाली लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँची है, ना ही कोई राजनीतिक विवाद हुआ। बल्कि केरल के छात्रों को एक और भाषा पढ़कर अपना भाषायी ज्ञान बढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ। काश! तमिलनाडु के चंद हिंदी विरोधी राजनेता इस उदाहरण से कुछ सबक लें।

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केरल में हिंदी के प्रति पहला प्यार टीवी ने पैदा किया उसके बाद हिंदी फिल्में यहां छा गयीं। साथ ही केरल के भी कई सुपरस्टार अभिनेताओं, निर्माता-निर्देशकों ने अपनी हिट फिल्मों की हिंदी में डबिंग करके हिंदी के प्रति अपना समर्थन भी जताया और उन्हें जो बड़ा व्यावसायिक लाभ हुआ उससे उन्हें हिंदी की अभूतपूर्व ताकत का भी अहसास हुआ। 

केरल में लघु और मध्यम उद्योगों का जब केंद्र सरकार के समर्थन से विस्तार और कायाकल्प हुआ तो उसमें बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हुए। आप केरल में लगी विभिन्न फैक्ट्रियों, होटलों, ढाबों, दुकानों पर चले जाइये यहां कामगार के रूप में जो लोग काम कर रहे हैं वह उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत से यहां आकर बस गये हैं और इनकी पहचान 'हिंदी' लोगों के रूप में की जाती है। केरल आने से पहले यदि आप सोच रहे हैं कि मैं ना तो मलयाली जानता हूँ और ना अंग्रेजी तो काम कैसे चलेगा ? तो हम आपको बताना चाहेंगे कि केरल में अकसर आपके साथ ऐसा होगा कि सामने वाला व्यक्ति चाहे वह ड्राइवर हो या फिर कोई व्यवसायी, वह ही आपसे बोल देगा कि 'हिंदी में बात करें', या फिर 'हिंदी चलेगा' ? केरल में जो भी अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहता है उसने टूटी-फूटी ही सही लेकिन हिंदी सीखी है ताकि हिंदी भाषी लोगों से संवाद कर सके। इसके अलावा यहाँ रहने वाली बड़ी मुस्लिम आबादी उर्दू भाषा जानती है और जो उर्दू जानता है वह हिंदी भी आसानी से बोल सकता है। केरल में जितने भी बड़े-बड़े मॉल हैं उनमें एक ना एक स्क्रीन पर हिंदी फिल्म का प्रदर्शन होता रहता है।

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हम जिन 'हिंदी' लोगों की आपसे बात कर रहे हैं उनकी संख्या भी केरल में लगातार बढ़ रही है। जब हमने राज्य की पेरियार नदी पर जाकर देखा तो पता लगा कि यहाँ छठ पूजा के अवसर पर श्रद्धालुओं की बड़ी भारी भीड़ उमड़ती है। आप रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर जाकर देख लें उत्तर भारत से आने और जाने वाले लोगों की अच्छी खासी संख्या आपको दिखाई देगी। यही नहीं हिंदीभाषी राज्यों से जिस प्रकार पर्यटकों की भीड़ केरल में उमड़ रही है वह भी एक बड़ा कारण है कि लोग हिंदी सीखने के प्रति आकर्षित हो रहे हैं या हिंदी जानने वाले लोगों को रोजगार दे रहे हैं ताकि भाषा कहीं संवाद की राह में बाधा नहीं बने। तो इस प्रकार दक्षिण में हिंदी आगे बढ़ रही है, फल-फूल रही है और बिना किसी हिचक के अन्य भाषायी लोगों द्वारा स्वीकार भी की जा रही है। उम्मीद है इस राष्ट्रभाषा और आधिकारिक राजभाषा का गौरव यूँ ही बढ़ता रहेगा और क्षुद्र स्वार्थ के लिए इसका विरोध करने वालों के मन में हिंदी विरोध धीरे-धीरे कम हो जायेगा।

-नीरज कुमार दुबे

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