सुप्रीम कोर्ट नहीं बनेगा नेताओं का अखाड़ा

Supreme Court
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सुप्रीम कोर्ट के बारे में कोई गलतफहमी या अफवाह पहले, इससे पहले ही मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए पत्रकार वार्ता आयोजित की। सीजेआई ने यह कदम इसलिए उठाया कि नेता कहीं बात का बतंगड़ नहीं बना दे और उसमें सुप्रीम कोर्ट को इसमें नहीं घसीट लें।

देश के सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह राजनीतिक दलों की सत्ता को लेकर चल रही मारामारी के बीच अखाड़ा नहीं बनेगा। सुप्रीम कोर्ट सिर्फ कायदे कानून और संविधान के दायरे में रह कर ही काम करेगा। दरअसल यह संदेश सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के जरिए तमाम राजनीतिक दलों को दिया, जोकि सुप्रीम कोर्ट के जरिए राजनीतिक फायदा उठाने का प्रयास कर रहे हैं।

यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के बारे में कोई गलतफहमी या अफवाह पहले, इससे पहले ही मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने अप्रत्याशित कदम उठाते हुए पत्रकार वार्ता आयोजित की। सीजेआई ने यह कदम इसलिए उठाया कि नेता कहीं बात का बतंगड़ नहीं बना दे और उसमें सुप्रीम कोर्ट को इसमें नहीं घसीट लें।

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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुलाकात का समय मांगा था कि वे उन्हें एक ज्ञापन सौंपना चाहते थे, जिसमें 'वोट चोरी' रोकने, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) को रोकने और पुन: मतपत्र प्रणाली पर लौटने की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने यह मांग यह कहते हुए ठुकरा दी, कि यदि सुनवाई चाहते हो तो रिट याचिका दायर करो। सीजेआई ने राहुल गांधी के आधिकारिक ईमेल के जवाब में कहा कि इस तरह की मुलाकात उचित नहीं होगी, क्योंकि जिन मुद्दों पर चर्चा की मांग की गई है, वे पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। इसी के साथ सीजेआई ने दूरदर्शिता अपनाते हुए अगले ही दिन प्रेस कांफ्रेंस करके स्थिति स्पष्ट कर दी, ताकि राजनीतिक दल उसकी बातों का गलत मतलब नहीं निकाल पाएं और सुप्रीम कोर्ट को राजनीतिक विवाद में नहीं घसीट सकें।

सीजेआई सूर्यकांत ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट, प्रशासनिक स्तर पर सरकार के कामकाज में दखल नहीं दे सकता, हालांकि नेताओं को अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक पक्ष में अदालत का दरवाजा खटखटाने की छूट है। सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में एक दो बार ही ऐसा हुआ है, जब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से मीडिया के जरिए कोई जानकारी दी गई है, वरना तो मीडिया ही सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और सुनवाई की जानकारी देता है।

भारतीय सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में जजों द्वारा मीडिया से सीधे संवाद करने या प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का सबसे चर्चित मौका 12 जनवरी 2018 को आया था। सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों—जस्टिस जे. चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी. लोकूर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। भारतीय न्यायिक इतिहास में यह पहला अवसर था जब वर्तमान जजों ने इस तरह मीडिया को संबोधित किया था।

इन जजों ने तब के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा के खिलाफ रोस्टर और प्रशासनिक कामकाज को लेकर सार्वजनिक सवाल उठाए थे। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट अपनी अधिकांश जानकारी और फैसले आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियों अपनी वेबसाइट और सुनवाई के जरिए ही साझा करता है। हाल के दौर में अदालत ने न्यायिक कार्यवाही के लाइव-स्ट्रीमिंग और उसके डिजिटल क्लिप्स के कमर्शियल इस्तेमाल को लेकर भी कड़े नियम तय किए हैं।

सीजेआई सूर्यकांत ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया था कि "मुझे कल बैठक के अनुरोध के संबंध में एक पत्र मिला था। मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया था, जिसमें उन कारणों का उल्लेख किया गया था कि मैं क्यों नहीं मिल पाऊंगा? सीजेाई ने आगे कहा, "सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या निर्वाचित निकाय के सदस्य की किसी भी याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है। हम उनकी चिंताओं को सुनेंगे और कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट से स्थिति स्पष्ट होने के बाद इंडिया गठबंधन के दलों के पास अपनी मांगों को लेकर कानूनी प्रक्रिया अपनाने का एक ही रास्ता बचा था, वह था रिट याचिका के जरिए न्याय का तकाजा। इंडिया गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट तक पैदल मार्च निकाला और रिट याचिका दायर की। जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव समेत 11 विपक्षी नेता याचिकाकर्ता हैं। इसमें चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पार्टी बनाया गया है।

दरअसल इससे पहले सीजेआई से अकेले ही मुलाकात की मांग करके कांग्रेस ने यह साबित करने की कोशिाश की थी, इंडिया गठबंधन का नेतृत्व वही करती है। बाकी सब उसके पीछे हैं, किन्तु सीजेआई द्वारा मिलने से इंकार करने से कांग्रेस को अपने दाव में सफलता नहीं मिल सकी। जब सीजेआई ने मिलने से इंकार कर दिया और कानूनी तरीका अपनाने की सलाह दी, तब गठबंधन के बाकी नेताओं को भी साथ लेकर याचिका दायर की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने जाहिर कर दिया कि गैर कानूनी और गैर संवैधानिक तरीके से इंडिया गठबंधन के नेताओं के मंसूबे कामयाब नहीं होने देगा। जो भी करेगा संविधान के दायरे में करेगा, अन्यथा सुप्रीम कोर्ट की साख पर भी बट्टा लग सकता है। यह भी निश्चित है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों को कोई खास सफलता सुप्रीम कोर्ट से हाथ नहीं लगने वाली, सिवाए एसआईआर में कुछ प्रशासनिक आदेश निर्देश के, क्यों कि ज्ञानेश कुमार को हटाया नहीं जा सकता, उन्हें संविधान का संरक्षण प्राप्त है। केवल संसद में महाभियोग के जरिए ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाया जा सकता है, वह इसलिए पूरा नहीं होगा कि संसद में मोदी सरकार का बहुमत है।

इससे पहले भी राजनीतिक इरादों को पूरा करने के विपक्षी दलों के मंसूबों पर सुप्रीम कोर्ट पानी फेर चुका है। नवम्बर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने देश में चुनावों में धांधली का आरोप लगाने वाली एक जनहित याचिका को खारिज कर दिया था। पीठ ने कहा था कि जब आप चुनाव जीतते हैं, तो ईवीएम से छेड़छाड़ नहीं होती। जब आप चुनाव हार जाते हैं, तो छेड़छाड़ हो जाती है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर तीखा व्यंग्य करते हुए पूछा कि ये याचिका दायर करने संबंधित आपको शानदार विचार कैसे मिला?

इसी तरह सुप्रीम कोर्ट ने अप्रेल 2023 में 14 विपक्षी दलों की सीबीआई और ईडी की कार्रवाई के लिए नेताओं के लिए अलग से गाइडलाइंस बनाने के निर्देश देने से इंकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि विपक्षी नेताओं के खिलाफ ईडी और सीबीआई के ज्यादा केस दिखाने वाले आंकड़ों के आधार पर केवल नेताओं के लिए गाइडलाइन की मांग नहीं कर सकते हैं। उन्हें अभियोजन से कोई छूट नहीं मिलती है। कोर्ट ने कहा कि नेता आम नागरिकों के बराबर ही होते हैं। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी। राजनीतिक दलों के मामले में दूरी बनाए रखने के सुप्रीम कोर्ट के नजरिए से साफ है कि इंडिया गठबंधन को अपने राजनीतिक मुद्दों की लड़ाई जनता की अदालत में लड़नी होगी। सत्ता किसे देनी है और किसे नहीं, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे।

- योगेन्द्र योगी

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)
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