कोच Hrishikesh Kanitkar का मंत्र, 'तू अपना नेचुरल गेम खेल', Vaibhav Sooryavanshi ने Sri Lanka के खिलाफ फाइनल में मचाया धमाल

Vaibhav Sooryavanshi
ANI
अंकित सिंह । Jun 23 2026 3:11PM

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने ट्राई-नेशन ए सीरीज़ के फाइनल में श्रीलंका ए के खिलाफ 29 गेंदों पर 94 रनों की तूफानी पारी खेलकर शुरुआती चुनौतियों और धीमी पिच की बाधाओं को पार किया। यह प्रदर्शन कोच कानिटकर की 'नेचुरल गेम' खेलने की सलाह का परिणाम था, जिसने उन्हें आईपीएल की आक्रामक शैली को 50 ओवर के प्रारूप के अनुकूल बनाने में मदद की और उनके उभरते टैलेंट को उजागर करते हुए भारत-ए के लिए एक शानदार जीत दिलाई।

इंडिया A के लिए अपने पहले चार मैचों में 117 रन बनाने के बावजूद, वैभव सूर्यवंशी की ट्राई-नेशन A सीरीज़ की शुरुआत कुछ खास नहीं रही। हालांकि 150.6 का स्ट्राइक-रेट उनके आक्रामक खेल को दिखाता था, लेकिन 14, 44, 21 और 38 के स्कोर उनके खुद के तय किए गए स्टैंडर्ड के हिसाब से बहुत प्रभावशाली नहीं लगे। भारत-ए के कोच हृषिकेश कानिटकर ने श्रीलंका ए के खिलाफ फाइनल से पहले अपने पूर्व अंडर-19 खिलाड़ी से मुलाकात की और उन्हें सीधी सलाह दी। उन्होंने कहा कि तू अपना स्वाभाविक खेल खेल, ज्यादा मत सोचो।

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यह सलाह काफी कारगर साबित हुई। 10 चौकों और 8 छक्कों की मदद से 324.13 के स्ट्राइक रेट से सूर्यवंशी ने श्रीलंकाई गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करते हुए सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन बनाए। इस पारी के साथ ही सूर्यवंशी ने सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। सूर्यावंशी ने स्पोर्टस्टार को बताया कि जब रन नहीं बन रहे थे, तो मैंने ऋषी सर के साथ कुछ बातें कीं और उन्होंने मुझे खुलकर खेलने की छूट दी। उन्होंने आगे कहा कि तभी उन्होंने मुझसे कहा, 'तू अपना नेचुरल गेम खेल, ज़्यादा सोच मत'। इससे मुझे हिम्मत मिली और मैंने खुद पर भरोसा बनाए रखा। मुझे खुशी है कि सब कुछ अच्छा रहा।

IPL में मिली कामयाबी के बावजूद, युवा सूर्यवंशी के लिए ट्राई-नेशन सीरीज़ एक बड़ा चैलेंज होने वाली थी। सूर्यवंशी न सिर्फ़ खराब गेंदों पर, बल्कि अच्छी गेंदों पर भी छक्के मारने में माहिर हैं। लेकिन हर गेंद को मैदान के बाहर भेजने की जल्दबाजी से बचते हुए, किसी गेंद को छोड़ने का संयम ही इस बाएं हाथ के बल्लेबाज़ की असली परीक्षा लेने वाला था। श्रीलंका की धीमी और स्पिन के लिए मददगार पिच और 50 ओवर की पारी की खास ज़रूरतों को देखते हुए उन्हें अपनी IPL वाली रणनीति में बदलाव करना था।

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उन्होंने कहा कि वहाँ के हालात थोड़े अलग थे, इसलिए शुरुआत में कुछ चुनौतियाँ आईं। मैं बहुत ज़्यादा कोशिश कर रहा था, लेकिन अपनी योजनाओं को ठीक से लागू नहीं कर पा रहा था। रविवार को फ़ाइनल में सूर्यवंशी की पारी इस बात का ताज़ा सबूत थी कि यह उभरता हुआ टैलेंट खेल को पारंपरिक तरीके से खेलने के बजाय, अपनी मर्ज़ी से खेलकर अपना रास्ता बना रहा है।

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