गुजरात दंगे: ऋषि सुनक द्वारा नरेंद्र मोदी का बचाव किए जाने के मायने को समझिए

Narendra Modi Rishi Sunak
ANI
कमलेश पांडेय । Jan 21, 2023 1:01PM
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने भी गत दिनों नई दिल्ली में अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कहा था कि "हमें लगता है कि यह एक प्रोपगेंडा है। यह पक्षपात पूर्ण है। ध्यान दें कि इसे भारत में प्रदर्शित नहीं किया गया है।

जब भारत समेत पूरी दुनिया की मीडिया पर 'एजेंडा पत्रकारिता' का आरोप लगना आम बात हो चुकी हो, तब देश-दुनिया की प्रतिष्ठित वैश्विक मीडिया प्रसारण संस्था बीबीसी की ब्रिटिश संसद में ही कलई खुलने से किसी को आश्चर्य नहीं हुआ। ऐसा इसलिए कि, गुजरात दंगों के ऊपर बीबीसी के द्वारा बनाई गई एक डॉक्यूमेंट्री में भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े कुछेक तथ्यों और कथ्यों की वस्तुनिष्ठता पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के द्वारा जिस तरह से असहमति जताई गई है, वैसा करना इस बात की पुष्टि करता है कि वास्तव में पूरी दुनिया की संपादकीय संस्थाओं का क्षरण हुआ है, जिसके बाद सुनियोजित रूप से देश-दुनिया की शख्सियत से जुड़े विरोधाभासी तथ्य-कथ्य प्रस्तुत किये जा रहे हैं, ताकि सस्ती लोकप्रियता हासिल करते हुए लक्षित नामचीन हस्ती को क्षति पहुंचाई जा सके। 

देखा जाए तो यह स्थिति किसी बौद्धिक महामारी की तरह है, जिससे लोकतंत्र की आत्मा कलुषित हुई है, मीडिया घरानों पर लोगों का विश्वास डिगा है, और मीडिया का बदनुमा चरित्र उजागर हुआ है। इससे आम जनता में भी उसकी साख अप्रत्याशित रूप से गिरी है। उम्मीद है कि निकट भविष्य में इससे बचने की कोशिश होगी, ताकि संपादकीय संस्थाओं पर इस तरह से सवालिया निशान नहीं उठेंगे। वो भी प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च स्तर पर और उन्हीं के मुखारबिंद से भी! बता दें कि ब्रिटेन के नेशनल ब्रॉडकास्टर बीबीसी की एजेंडा पत्रकारिता से तो लगभग सभी प्रबुद्ध भारतवासी वाकिफ हैं, लेकिन अब तो ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी एक तल्ख टिप्पणी करके उसकी पुष्टि कर दी है। उनके इस कदम के कुछ खास मायने हैं, जिसे सबको समझना चाहिए।

इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: BBC को भारत से नफरत क्यों है? एजेंडा पत्रकारिता कब छोड़ेगा ब्रिटिश प्रसारणकर्ता?

बता दें कि 2002 के गुजरात दंगों के दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल पर हमला करते हुए बीबीसी ने दो पार्ट की जो सीरीज प्रसारित की, उसको लेकर भारतीय मूल के लोगों द्वारा भारी नाराजगी जताने के बाद भले ही उसे चुनिंदा प्लेटफार्मों से हटा दिया गया। लेकिन वैश्विक तौर पर प्रतिष्ठित मीडिया प्रसारण संस्था बीबीसी की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान उठने लगे हैं। यह सवाल मैं या कोई अन्य भारतीय नहीं, बल्कि खुद ब्रिटेन के भारतीय मूल के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ही उठाया है। जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि "वह अपने भारतीय समकक्ष के चरित्र चित्रण से सहमत नहीं हैं।" जाहिर है, उनकी इस असहमति की अनुगूंज बहुत दूर तक  सुनाई पड़ी है।

उल्लेखनीय है कि गुजरात दंगों पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री सीरीज की न केवल प्रमुख भारतीय मूल के ब्रिटेश नागरिकों ने निंदा की है, बल्कि खुद प्रमुख यूके नागरिक लॉर्ड रामी रेंजर ने भी कहा है कि बीबीसी ने एक अरब से अधिक भारतीयों को बहुत दुःख पहुंचाया है। वहीं, जब पाकिस्तानी मूल के सांसद इमरान हुसैन ने ब्रिटिश संसद में इस मुद्दे को उठाया तो खुद वहां के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपने समकक्ष भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बचाव किया और फिर जो कुछ भी कहा, उसकी उम्मीद शायद किसी भी ब्रिटिश नागरिक को नहीं रही होगी। लेकिन व्यक्तिगत और राजनीतिक दूरदर्शिता दिखाते हुए उन्होंने जो कुछ भी कहा, उसके गम्भीर मायने हैं। उनके देश के लिए भी और शेष दुनिया के लिए भी। बशर्ते कि इसे निष्पक्ष रूप से समझने की कोशिश हर कोई करे। यही वजह है कि ऋषि सुनक की इस टिप्पणी से हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा उठा है। उम्मीद है कि पत्रकारिता की बिरादरी भी इसे गम्भीरता से लेगी और भविष्य में इस प्रकार की ओछी हरकतों से बाज आएगी। 

बता दें कि बीबीसी की एक रिपोर्ट पर सांसद इमरान हुसैन के सवाल का जवाब देते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने दो टूक शब्दों में कहा है कि "इस पर सरकार की स्थिति स्पष्ट और लंबे समय से चली आ रही है। इसमें बदलाव नहीं हुआ है।" साथ ही इस टिप्पणी से उन्होंने खुद को अलग कर लिया। फिर उन्होंने साफ-साफ यहां कह दिया कि "निश्चित रूप से जहां कहीं भी उत्पीड़न होता है हम उसको बर्दाश्त नहीं करते हैं, लेकिन सम्माननीय सज्जन का जिस तरह से चरित्र चित्रण किया गया है, उस पर मुझे यकीन नहीं है। मैं उससे/इससे बिल्कुल सहमत नहीं हूँ।"

गौरतलब है कि भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने भी गत दिनों नई दिल्ली में अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए कहा था कि "हमें लगता है कि यह एक प्रोपगेंडा है। यह पक्षपात पूर्ण है। ध्यान दें कि इसे भारत में प्रदर्शित नहीं किया गया है। इसलिए हम इस पर और अधिक जवाब नहीं देना चाहते हैं। फिर भी इसके उद्देश्य और एजेंडा पर सवाल उठना लाजिमी है।" गौरतलब है कि इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज में यूके के पूर्व सचिव जैक स्ट्रॉ ने कुछ टिप्पणियां की हैं जो बेहद गम्भीर बात है।

इसे भी पढ़ें: PM Modi पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर विदेश मंत्रालय ने कहा, यह एक प्रोपोगेंडा पीस, इसकी कोई वस्तुनिष्ठता नहीं

हालांकि, ब्रिटिश संसद में वहां के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने जिस तरह से अपने भारतीय समकक्ष और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दूरदर्शिता पूर्वक बचाव किया और उनके समर्थन में उतरे हुए दिखाई दिये, उससे उनके पद की मर्यादा और अधिक बढ़ गई है। उनके इस नेक पहल से उनकी वैश्विक प्रतिष्ठा में भी काफी इजाफा हुआ है और राष्ट्रकुल देशों में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है, क्योंकि उन्होंने लीक से हटकर सच कहने का साहस दिखाया है। उनके इस उदार पहल से भारत के साथ ब्रिटेन के सम्बन्धों को भी और अधिक मजबूती मिलेगी। वहीं, गुजरात दंगे वाली डॉक्यूमेंट्री पर पाक मूल के सांसद को जिस तरह से उन्होंने करारा जवाब दिया है, उससे पाकिस्तान भी अचंभित है। शायद अब उसे भी पीएम मोदी के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय  कद का एहसास हो चुका हो।

सच कहा जाए तो देश-दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो राजनीतिक कद है, उसका फायदा भी ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक को मिल सकता है। आमतौर पर गुजरात दंगे को लेकर वहां के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर मीडिया महकमों में जो तंज कसी गई, उससे उनकी लोकप्रियता 'वर्ग विशेष' में बढ़ी और मुख्यमंत्री पद से सीधे वो प्रधानमंत्री पद तक पहुंच गए। ऐसा होने के बाद भले ही भारतीय मीडिया खामोश हो गई, लेकिन वैश्विक मीडिया द्वारा गाहे-बगाहे तंज कसना अब भी जारी है। बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री उसकी अगली कड़ी भर नहीं तो क्या है?

 हालांकि, पहली बार किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष ने पीएम मोदी का खुलेआम बचाव किया है, जिससे पीएम मोदी को आशातीत मजबूती मिली है। इससे अब अरब देशों की भी ओछी मानसिकता निःसंदेह बदलेगी। इससे उन भारतीय लोगों की मानसिकता में भी स्वस्थ बदलाव आएगा, जो दबी जुबान में ही सही, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को उनके पूर्व के कार्यों या भूमिका को लेकर सशंकित नजरों से देखने के आदी हो चुके हैं। वहीं, दुनिया के अन्य देशों के लोगों के नजरिए में भी इस मुद्दे पर बदलाव आएगा, ऐसी उम्मीद की जाती है।

अन्य न्यूज़