दुनिया में सबसे बेहतर भारत के तेज गेंदबाज, जानिए कैसे भारतीय पेस बैटरी बनी इतनी खतरनाक ?

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आयशा आलम । Aug 26, 2021 1:06PM
विराट कोहली साल 2014 में भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान बनते हैं। इसके बाद टीम इंडिया में बदलाव का दौर शुरु होता। विराट कोहली अपनी फिटनेस पर ध्यान देने लगते है साथ ही वो इस फिटनेस के रिवाज को टीम इंडिया में शुरू करना चाहते हैं।

भारतीय क्रिकेट एक वक्त पर तेज गेंदबाजों के लिए तरसता था। एक दौर था जब टीम इंडिया में तेज गेंदबाजों का बड़ा अकाल था। भारत की प्लेइंग 11 में तीन-तीन स्पिनर खेला करते थे और तेज गेंदबाज को सिर्फ गेंद पुरानी करने के तौर पर ही देखा जाता था। लेकिन आज भारतीय तेज गेंदबाजी बदल चुकी है। हाल ही में लॉर्ड्स में खेले गए टेस्ट मैच में जिस तरह से भारतीय तेज गेंदबाजों ने टीम इंडिया को एतिहासिक जीत दिलाई है उसके बाद से मानों हर कोई भारत की तेज गेंदबाजी अटैक की तारीफ कर रहा है। एक समय पर विदेशी सरजमीं पर भारतीय टीम तेज गेंदबाजों की कमी खलती थी। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका से लेकर इंग्लैंड जैसे देशों में जब विरोधी टीम के तेज गेंदबाज भारत के बल्लेबाजों का विकेट निकालते थे तो हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के मन में चाहत होती थी कि काश टीम इंडिया के पास भी तेज गेंदबाजों की कमी ना होती और टीम विदेशी सरजमीं पर तेज पिचों का फायदा उठाकर जीत दर्ज करती। 

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मोहम्मद निसार और अमर सिंह से शुरू हुआ यह सफर काफी आगे बढ़ चुका है

 

साल 1932 में जब भारत ने पहली बार टेस्ट क्रिकेट खेलना शुरू किया उस समय टीम इंडिया में मोहम्मद निसार और अमर सिंह नाम के दो ऐसे तेज गेंदबाज थे जिन्होंने इंग्लैंड की नाक में दम कर दिया था। इन दोनों गेंदबाजों ने दुनिया को बताया कि भारतीय टीम के पास भी ऐसे तेज गेंदबाज है जो विरोधी टीमों को अपनी रफ्तार से परेशान कर सकते है। इसके बाद समय आगे बढ़ता गया औऱ भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट में अपने पैर जमाने लगी थी लेकिन इस दौरान भारत के पास से तेज गेंदबाजों की हमेशा ही कमी रहती थी। 70-80 के दौर के आस पास तो टीम पूरी तरह से स्पिनर्स पर निर्भर रहने लगी थी। ऐसे में भारत के लिए तेज गेंदबाजों में उम्मीद की किरण बनकर आए कपिल देव। इस ऑलराउंडर ने पूरी दुनिया में भारत के नाम का डंका बजाया। अपनी तेज गेंदबाजी से कपिल भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में 434 विकेट झटक पाए। इसके बाद भारतीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजों का आना शुरू हुआ। जहां जवागल श्रीनाथ, जहीर खान, वेंकटेश प्रसाद, इरफान पठान और आशीष नेहरा जैसे गेंदबाज आए। हालांकि इस दौरान एक कमी हमेशा से खली कि जब भी टीम इंडिया कोई मुकाबला खेलती उस समय टीम के पास प्लेइंग 11 में एक मजबूत तेज गेंदबाज हुआ करता था लेकिन कभी भारत के पास तेज गेंदबाजी की ऐसी फौज नहीं रही जिसके सभी गेंदबाज विरोधी टीम के नाक में दम कर सके। 

विराट युग में भारत में बनाई गई तेज गेंदबाजों की फैक्ट्री 

 

विराट कोहली साल 2014 में भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान बनते हैं। इसके बाद टीम इंडिया में बदलाव का दौर शुरु होता। विराट कोहली अपनी फिटनेस पर ध्यान देने लगते है साथ ही वो इस फिटनेस के रिवाज को टीम इंडिया में शुरू करना चाहते हैं। विराट चाहते थे कि भारतीय टीम फिटनेस में अव्वल हो जिसकी वजह से खिलाड़ियों के खेल में और ज्यादा निखार आएं। ऐसे में इस फिटनेस का फायदा भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण को भी हुआ और टीम इंडिया में एक एक कर इतने शानदार तेज गेंदबाज आए जिसकी वजह से भारत के पास तेज गेंदबाजी में कमाल का ग्रुप तैयार हो गया और टीम इंडिया हर विरोधी टीम पर भारी पड़ने लगी।

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हाल ही में लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट मैच में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण ने मैच के आखिरी दिन 60 ओवर के भीतर ही इंग्लैंड को ऑल आउट कर दिया। इस दौरे पर अभी तक खेले गए दोनों टेस्ट मैच में टीम इंडिया के गेंदबाजों ने सभी 40 विकेट झटके है। ऐसे में इस तरह की शानदार तेज गेंदबाजी का श्रेय भारतीय खिलाड़ियों की कमाल की फिटनेस को भी जाता है। इसके अलावा जिस तरह से विराट कोहली ने तेज गेंदबाजों को इस दौरान सपोर्ट किया और टीम में लगातार तेज गेंदबाजों को मौके देते रहे और उनके कॉन्फिडेंस को बढ़ाकर रखा। इसकी वजह से भारतीय को मौजूद दौर में वर्ल्ड क्लास तेज गेंदबाजी लाइनअप मिला।

विराट कोहली हमेशा से भारत की तेज गेंदबाजी को मजबूत करना चाहते थे और वह जानते थे कि अगर भारत की तेज गेंदबाजी यूनिट मजबूत नहीं हुई तो टीम इंडिया टेस्ट में लंबे समय तक नंबर एक के स्थान पर नहीं काबिज हो सकती। पूर्व दक्षिण अफ्रीकी क्रिकेट एलेन डोनाल्ड विराट के सात तकरीबन छह साल पहले हुई बातचीत को याद कर एक इंटरव्यू में बताते है कि “मुझे याद है कि विराट कोहली ने साल 2015 में मुझे कहा था कि भारत नंबर-1 टेस्‍ट टीम बनेगी और वो गलत नहीं था। उसे पता था कि वो कहा जा रहा था। उसने कहा था कि मुझे एक सबसे फिट टीम चाहिए। वो भारत को इस दुनिया की सबसे महान टीम बनाना चाहता था। उसे पता था कि एक दिन हम विदेशों में भी जीत दर्ज करेंगे। हम दुनिया में किसी भी टीम को हरा पाएंगे। हमारे पास बेहद शानदार गेंदबाजी अटैक होगा।”

जाहिर है फिटनेस मजबूत होने की वजह से भारतीय तेज गेंदबाजी को काफी फायदा हुआ है इसके अलावा टीम इंडिया के गेंदबाजी कोच भरत अरूण की मेहतन को भी नजरअंदाज करना गलत होगा। क्योंकि भरत अरूण की कोचिंग में टीम इंडिया के गेंदबाज हमेशा बेहतर होते गए। तभी तो आज भारतीय टीम के पास जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा, मोहम्मद शमी, शार्दुल ठाकुर, मोहम्मद सिराज, भुवनेश्वर कुमार, उमेश यादव, दीपक चाहर सहित ना जाने कितने तेज गेंदबाज मौजूद है जो किसी भी टीम के खिलाफ अकेले दम पर मैच जिताने का कारनामा कर चुके है। इसके अलावा हर साल आईपीएल में चेतन सकारिया, कार्तिक त्यागी, शिवम मावी जैसे कितने तेज गेंदबाज आते है जो भारतीय टीम में अपनी दावेदारी ठोकते हैं।

- आयशा आलम

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