रिटर्न दाखिल करते समय इन त्रुटियों से बचें, ताकि आपको नोटिस ना मिले

रिटर्न दाखिल करते समय इन त्रुटियों से बचें, ताकि आपको नोटिस ना मिले

80 सी, 80 डी और 24 (बी) जैसे विभिन्न वर्गों के तहत आयकर निर्धारणकर्ताओं की विभिन्न कर कटौती उपलब्ध हैं। ये कटौती निवेश या खर्च के लिए उपलब्ध हैं। इनके अलावा, कटौती और छूट की गणना करते समय विचार करने के लिए विभिन्न नियम और सीमाएं हैं।

कर नोटिस प्राप्त करना, वह भी करों का भुगतान करने और आईटीआर दाखिल करने के बाद! शायद वह आखिरी चीज होगी जो आप नहीं चाहेंगे।

पिछले कुछ वर्षों से आयकर रिटर्न (ITR) फाइलिंग पूरी तरह से ऑनलाइन प्रक्रिया बन गई है। हालाँकि, जैसा कि आपको विभिन्न विवरणों को भरना और आईटीआर दाखिल करते समय विभिन्न चरणों का पालन करना आवश्यक है, गलतियाँ करने या गलत जानकारी भरने की थोड़ी संभावना अवश्य रहती है। उदाहरण के लिए, आप पूरी तरह से गलत आईटीआर फॉर्म चुन सकते हैं, किसी आय का उल्लेख करने से चूक सकते हैं, गलत स्व-मूल्यांकन कर चालान विवरण या गलत टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) विवरण, कर कटौती खाता संख्या या कोई अन्य विवरण हो- ये सभी आपको एक कर नोटिस प्राप्त करने के कारण बन सकते हैं।

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आइए सबसे आम गलतियों पर नज़र डालते हैं जो आप कर सकते हैं और उनसे कैसे बचा जाए।

1. गलत आईटीआर फॉर्म का चयन करना

केवल वही आईटीआर फॉर्म चुनें जो आपके लिए लागू है। सरकार ने करदाताओं के विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग आईटीआर फॉर्म निर्धारित किए हैं, जो उनकी आवासीय स्थिति पर निर्भर करता है, जिसके तहत उनके आय के स्रोत आते हैं, जैसे कर योग्य आय का स्तर, किसी कंपनी में शेयर / निर्देशन या एक साझेदारी फर्म में सदस्य आदि। अक्सर करदाता इनमें से कुछ शर्तों की अनदेखी कर जाते हैं और इस तरह अनजाने में गलत फॉर्म का चयन कर लेते हैं। 

इसलिए, उपयुक्त आईटीआर फॉर्म का चयन करना बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यदि आप गलत आईटीआर फॉर्म में अपनी रिटर्न फाइल करते हैं तो इसे अमान्य माना जाता है या बिल्कुल भी दायर नहीं माना जाता है और ऐसे मामलों में आपको कर विभाग से नोटिस मिल सकता है।

2. किसी आय का छूट जाना

दूसरी सबसे आम गलती, जो ज्यादातर कर फाइलर करते हैं, वो है कुछ निश्चित आय की अनदेखी करना। आपके नियोक्ता टैक्स काटते हैं और आपको फॉर्म 16 देते हैं। लेकिन क्या वह एकमात्र आय है जो आपने अर्जित की है? एक साधारण बचत बैंक बैलेंस से आपको ब्याज भी तो मिलता है। वह भी कर योग्य है। यद्यपि आपका निवेश छोटा है, मगर फॉर्म में यह भी घोषित किया जाना चाहिए। आपके फॉर्म 16 ने इसे कवर नहीं किया होगा। 

कभी-कभी करदाता, विशेष रूप से वेतनभोगी, मुख्य रूप से अपने नियोक्ताओं द्वारा जारी किए गए फॉर्म 16 या टीडीएस प्रमाणपत्र के आधार पर ही अपना आईटीआर दाखिल कर देते हैं। वे अनजाने में आय के अन्य स्रोतों, जैसे कि ब्याज आय को मिस कर जाते हैं। आईटीआर फॉर्म भरते समय ऐसे विवरणों को इकठ्ठा करना चाहिए और उन्हें संभाल कर रखना चाहिए। कर रिटर्न का आकलन करते समय कर विभाग मिसिंग आय को नोटिस कर सकता है और आपको एक डिमांड नोटिस भेज सकता है।

3. टैक्स क्रेडिट में बेमेल (Mismatch)

इसका मतलब यह है कि आपने अपने कर रिटर्न में जो कर क्रेडिट का दावा किया है और आयकर अधिकारियों के रिकॉर्ड में जो उपलब्ध है, उसके बीच कुछ अंतर है। बेमेल के विभिन्न कारण हो सकते हैं। जैसे कि आपने गलत जानकारी दर्ज की हो या टीडीएस कटौतीकर्ता द्वारा विभाग के पास जमा नहीं किया गया हो या आपके फॉर्म 26AS में परिलक्षित नहीं होता हो। इसलिए, कर नोटिस से बचने के लिए फॉर्म 26AS में दर्शाए गए टीडीएस के साथ अपनी आय में से काटे गए कर की जांच करें। यदि कोई बेमेल है तो अपना टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले इसे ठीक अवश्य करवा लें।

4. गलत कटौती का दावा करना

80 सी, 80 डी और 24 (बी) जैसे विभिन्न वर्गों के तहत आयकर निर्धारणकर्ताओं की विभिन्न कर कटौती उपलब्ध हैं। ये कटौती निवेश या खर्च के लिए उपलब्ध हैं। इनके अलावा, कटौती और छूट की गणना करते समय विचार करने के लिए विभिन्न नियम और सीमाएं हैं। हालांकि, कई बार करदाता तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण एक गलत खंड के तहत एक गलत राशि या कटौती का दावा पेश कर देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी कर देयता में बदलाव आ जाता है।

इसके परिणामस्वरूप, कर नोटिस अपरिहार्य हो जाते हैं। इसलिए, कटौती का दावा करते समय कर नियमों का उचित ज्ञान होना जरूरी है। यदि आपको इस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो  ऐसे  हालात में आपको कर विशेषज्ञ या चार्टर्ड एकाउंटेंट से परामर्श लेना उचित होता है।

5. टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करना

कर रिटर्न दाखिल ही नहीं करना, जबकि आप उस श्रेणी में आते हैं, निश्चित रूप से कर नोटिस प्राप्त करने की संभावना को बढ़ाता है। याद रखें, यदि आपकी सकल आय, मूल छूट सीमा से ऊपर है, जैसे - 60 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों के लिए 2.5 लाख रुपये तक, 60 से 80 वर्ष की आयु वालों के लिए 3 लाख रुपये और 80 से अधिक आयु वालों के लिए 5 लाख रुपये,  तो आप अपना टैक्स रिटर्न फाइल अवश्य करें। अन्य मापदंड भी हैं जो कर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य बनाते हैं।

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इसके अलावा, आपको निश्चित तारीख से पहले अपना रिटर्न दाखिल करना चाहिए। इस साल नियत तारीख को 30  नवंबर 2020 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। आप उसके बाद भी 31 मार्च, 2021 तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं, लेकिन एक पेनल्टी के साथ। मूल्यांकन वर्ष (Assessment Year) समाप्त होने के बाद, यानी 31 मार्च के बाद रिटर्न दाखिल नहीं किया जा सकता है।

जब हम गलतियाँ करते हैं तो आखिरी क्षण तक चीजों को स्थगित करने से गलतियाँ होने की संभावना को हम और भी बढ़ा देते हैं। इसलिए, हमें अपना टैक्स रिटर्न बहुत ही सावधानी, सही समय और उचित परामर्श के साथ ही फाइल करना चाहिए, जिससे किसी प्रकार के नोटिस की सम्भावना ही न रहे।

जे. पी. शुक्ला