• जानिए, कितनी विश्वसनीय है क्रिप्टो करेंसी? यह कैसे कार्य करती है और इसका भविष्य कैसा है

क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनी होती है। यह एक स्वतंत्र मुद्रा है जिसका कोई मालिक नहीं होता। यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती। अमूमन रुपया, डॉलर, यूरो या अन्य मुद्राओं की तरह ही इस मुद्रा का संचालन किसी राज्य, देश, संस्था या सरकार द्वारा नहीं किया जाता।

क्रिप्टो करेंसी के तौर तरीकों पर एक बार फिर देश दुनिया में बहस छिड़ी हुई है। क्योंकि गत माह यानी मई 2021 में एक मनहूस बुधवार ऐसा भी आया जिस दिन को पूरी क्रिप्टो करेंसी की दुनिया हिल गई थी। क्योंकि, इसे मार्केट कैप में करीब 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था। दरअसल, इस दिन बिनांस और कॉइनबेस सहित कई बड़े ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म क्रैश हो गए थे, जिससे इसके निवेशकों को भारी निराशा हुई थी। सुकून की बात सिर्फ इतनी रही कि, बाद के घंटों में बिटकॉइन, एथेरेउम और दोगेकोइन जैसी कई क्रिप्टोकरेंसी में सुधार देखने को मिला था। यहां पर यह स्पष्ट कर दें कि ये ताजातरीन भारी गिरावट वित्तीय और भुगतान संस्थानों को क्रिप्टो करेंसी सेवाएं देने से बैन करने के चीन के फैसले के बाद आई थी।

बता दें कि दुनिया के सबसे खतरनाक व्यवसायिक देश चीन की तीन सरकारी संगठनों यथा, नेशनल इंटरनेट फाइनेंस एसोसिएशन ऑफ चाइना, चाइना बैंकिंग एसोसिएशन और पेमेंट एंड क्लियरिंग एसोसिएशन ऑफ चाइना ने सोशल मीडिया पर उन दिनों एक चेतावनी जारी की थी। जिसमें संगठनों ने निवेशकों से दो टूक कहा था कि यदि उन्हें क्रिप्टो-करेंसी इन्वेस्टमेंट ट्रांजैक्शन्स में कोई क्षति/हानि होती है तो उनके पास इसका कोई प्रोटेक्शन नहीं होगा।

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वास्तव में, अपने तरह का अजीब कारोबारी कुचक्र रचते रहने वाले चीन के फैसले पर बाजार की जो नकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई दी, उसके बाद क्रिप्टोकरेंसी में भारी गिरावट आई, जो इन डिजिटल कॉइन्स की अस्थिर प्रकृति को उजागर करने को काफी है। दिलचस्प बात तो यह है कि, क्रिप्टो करेंसी को ट्रांजैक्शन का फ्यूचर माना जा रहा है। ताजा घटना क्रम भारत में क्रिप्टो करेंसी की वैधानिक स्थिति (लीगल स्टेटस) और उस पर सरकार के रुख पर भी ध्यान केंद्रित करता है।

# जानिए, आखिर क्या है क्रिप्टो करेंसी?

देश-दुनिया के किसी भी व्यक्ति, संस्था तथा देश को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए और आपसी लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए एक मुद्रा (करेंसी) की जरूरत होती है ताकि उसका उपयोग वह सुचारू रूप से कर सके। इसलिए, प्रत्येक देश की अपनी अलग-अलग मुद्रा होती है, जैसे-भारत में रुपया, अमेरिका में डॉलर आदि। दरअसल, यह भौतिक करेंसी होती हैं जिसे आप देख सकते हैं, छू सकते हैं और नियमानुसार किसी भी स्थान या देश में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन क्रिप्टो करेंसी इससे अलग होती है जो एक डिजिटल करेंसी है। इसे आप न तो देख सकते हैं, न छू सकते हैं, क्योंकि भौतिक रूप में क्रिप्टो करेंसी का मुद्रण नहीं किया जाता। इसलिए इसे आभासी मुद्रा कहा जाता है। यह पिछले कुछ सालों में ऐसी करेंसी काफी प्रचलित हुई है।

क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिथ्म पर बनी होती है। यह एक स्वतंत्र मुद्रा है जिसका कोई मालिक नहीं होता। यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती। अमूमन रुपया, डॉलर, यूरो या अन्य मुद्राओं की तरह ही इस मुद्रा का संचालन किसी राज्य, देश, संस्था या सरकार द्वारा नहीं किया जाता। यह एक डिजिटल करेंसी होती है जिसके लिए क्रिप्टोग्राफी का प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर इसका प्रयोग किसी सामान की खरीदारी या कोई सर्विस खरीदने के लिए किया जा सकता है।

आपको पता होना चाहिए कि सर्वप्रथम क्रिप्टो करेंसी की शुरुआत 2009 में हुई थी जो “बिटकॉइन” थी। इसको जापान के सतोषी नाकमोतो नाम के एक इंजीनियर ने बनाया था। प्रारम्भ में यह उतनी प्रचलित नहीं थी, किन्तु धीरे-धीरे इसके रेट आसमान छूने लगे, जिससे यह सफल हो गई। देखा जाए तो 2009 से लेकर वर्तमान समय तक लगभग 1000 प्रकार की क्रिप्टो करेंसी बाजार में मौजूद हैं, जो पियर टू पियर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम के रूप में कार्य करती है।

# बिटकॉइन के अतिरिक्त अन्य बहुप्रचलित करेंसी कौन-कौन सी है?

बिटकॉइन के अलावा भी अन्य क्रिप्टो करेंसी बाजार में उपलब्ध  है जिनका प्रयोग आजकल अधिक हो रहा है, जैसे- रेड कॉइन, सिया कॉइन, सिस्कोइन, वॉइस कॉइन और मोनरो। आइए, अब इनके बारे में कुछ अहम बातें जानते हैं:-

1. रेड कॉइन:- बिटकॉइन के अलावा भी अन्य कई क्रिप्टो करेंसी है जिनका उपयोग विशेष अवसरों पर किया जा सकता है जिसमें से एक है “रेड कॉइन”। इसका उपयोग लोगों को टिप देने के लिए किया जाता है।

2. सिया कॉइन:- सिया कॉइन को एस सी से अंकित किया जाता है। यह कॉइन अच्छी ग्रोथ कर रही है। इस कॉइन की कीमत और भी अधिक बढ़ सकती है।

3. एसवाईएस कॉइन (सिस्कोइन):- यह क्रांतिकारी क्रिप्टो करेंसी है जो जीरो लागत के वित्तीय लेनदेन और अविश्वसनीय गति के साथ प्रदान करता है। व्यापार संपत्ति डिजिटल प्रमाणपत्र डाटा को सुरक्षित रूप से व्यापार करने के लिए बुनियादी ढांचे को व्यवसाय प्रदान करता है। सिस्कोइन ब्लॉकचेन पर कार्य करता है जो बिटकॉइन का ही एक हिस्सा है।

4. वॉइस कॉइन:- यह उभरते हुये संगीतकारों के लिए तैयार किया गया एक ऐसा मंच है जहां गायक अपने संगीत का स्वयं मूल्य निर्धारण कर सकते हैं। वे मुफ्त में संगीत का सैंपल ट्रैक प्रदान कर सकते हैं। साथ ही, मंच पर संगीत उत्साही और उपयोगकर्ताओं से समर्थन भी प्राप्त कर सकते हैं। इस मंच का मुख्य उद्देश्य स्वतंत्र कलाकारों का मुद्रीकरण करना है।

5. मोनेरो:- यह भी एक प्रकार की क्रिप्टो करेंसी है जिसमें विशेष प्रकार की सिक्योरिटी का उपयोग किया जाता है। इसे रिंग सिग्नेचर नाम से जाना जाता है। इसका उपयोग डार्क वेब और ब्लॉक मार्केट में बहुत अधिक होता है। इसकी सहायता से स्मगलिंग की जाती है। इस करेंसी से कालाबाजारी आसानी से की जा सकती है।

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# क्रिप्टो करेंसी की ग्रोथ कैसी है?

यदि हम क्रिप्टो करेंसी की ग्रोथ के बारे में बात करें तो इसमें इन्वेस्टमेंट का करना काफी फायदे का सौदा होता है। आज मार्केट में लगभग 1000 प्रकार की क्रिप्टो करेंसी मौजूद है और इन सभी कॉइन्स की कीमत लॉन्चिंग के समय ना के बराबर थी। हालांकि कुछ ही सालों में इनकी कीमत 1000 डॉलर तक भी पहुंच गई है। अब आप बिटकोइन को ही ले लीजिए। जब बिटकॉइन लांच हुआ था तब दुनिया भर में रोजाना 1 करोड़ डॉलर की ट्रांजैक्शन होती थी जिसमें 1 डॉलर भी बिटकॉइन की ट्रांजैक्शन नहीं की जाती थी। लेकिन आज के समय में बिटकॉइन की 1 हफ्ते में 1 ट्रिलियन डॉलर की ट्रांजैक्शन की जा रही है जबकि पूरी दुनिया में फिजिकल करेंसी की हफ्ते भर की ट्रांजैक्शन लगभग 70 ट्रिलियन डॉलर की हो जाती है। 1 डॉलर की कीमत से शुरू हुआ बिटकॉइन आज 1200 डॉलर की कीमत तक पहुंच चुका है। अतः आप खुद ही अनुमान लगा सकते हैं कि क्रिप्टो करेंसी की भविष्य में क्या ग्रोथ हो सकती है।

# क्रिप्टो करेंसी से क्या-क्या लाभ है?

हमें पता है कि किसी भी वस्तु के फायदे और नुकसान दोनों ही होते हैं। इसलिए हम यहां सबसे पहले क्रिप्टो करेंसी के लाभ के बारे में बताते हैं। फिर भी, आमतौर पर हम कह सकते हैं कि क्रिप्टो करेंसी के लाभ अधिक हैं और घाटा कम। पहला, क्रिप्टो करेंसी एक डिजिटल करेंसी है जिसमें धोखाधड़ी की  उम्मीद बहुत कम होती है। दूसरा, अधिक पैसा होने पर क्रिप्टो करेंसी में निवेश करना फायदेमंद है क्योंकि इसकी कीमतों में बहुत तेजी  से उछाल आता है। लिहाजा, निवेश के लिए यह एक अच्छा प्लेटफॉर्म है। तीसरा, अधिकतर क्रिप्टो करेंसी के वॉलेट उपलब्ध हैं जिसके चलते ऑनलाइन खरीदारी, पैसे का लेन-देन  सरल हो चुका है। चौथा, क्रिप्टो करेंसी को कोई अथॉरिटी कंट्रोल नहीं करती जिसके चलते नोटबंदी और करेंसी का मूल्य घटने जैसा खतरा किसी के सामने नहीं आता। पांचवां, कई देश ऐसे हैं जहां कैपिटल कंट्रोल नहीं है। मतलब कि यह बात तय ही नहीं है कि देश से बाहर कितना पैसा भेजा जा सकता है और कितना मंगवाया जा सकता है। लिहाजा, क्रिप्टो करेंसी खरीद कर उसे देश के बाहर आसानी से भेजी जा सकती है और फिर उसे पैसे में रुपांतरित किया जा सकता है। छठा, क्रिप्टो करेंसी का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को होता है जो अपना धन छुपाकर रखना चाहते हैं। इसलिए क्रिप्टो करेंसी पैसे छुपाकर रखने का सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। सातवां, क्रिप्टो करेंसी पूरी तरह से सुरक्षित है। बस आपको उसके लिए ऑथेंटिकेशन रखने की आवश्यकता होती है, क्योंकि ऐसी करेंसी ब्लॉकचेन पर आधारित है। लिहाजा, किसी भी प्रकार का ट्रांजैक्शन करने के लिए पूरे ब्लॉकचेन को माइन करना पड़ता है।

# क्रिप्टो करेंसी के नुकसान क्या-क्या हैं?

पहला, क्रिप्टो करेंसी का सबसे बड़ा नुकसान तो यही है कि इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है, क्योंकि इसका मुद्रण नहीं किया जा सकता। मतलब कि ना तो इस करेंसी के नोट छापे जा सकते हैं और न ही कोई बैंक अकाउंट या पासबुक जारी की जा सकती है। दूसरा, इसको कंट्रोल करने के लिए कोई देश, सरकार या संस्था नहीं है जिससे इसकी कीमत में कभी बहुत अधिक उछाल देखने को मिलता है तो कभी बहुत ज्यादा  गिरावट, जिसकी वजह से क्रिप्टो करेंसी में निवेश करना जोखिम भरा सौदा है। तीसरा, इसका उपयोग गलत कामों के लिए जैसे हथियार की खरीद-फरोख्त, ड्रग्स सप्लाई, कालाबाजारी आदि में आसानी से किया जा सकता है, क्योंकि इसका इस्तेमाल दो लोगों के बीच ही किया जाता है। लिहाजा, यह काफी खतरनाक भी हो सकता है। चौथा, इसको हैक करने का भी खतरा बना रहता है। यह बात दीगर है कि ब्लॉकचेन को हैक करना उतना आसान नहीं है क्योंकि इसमें सुरक्षा के पूरे इंतजाम होते हैं। बावजूद इसके, इस करेंसी का कोई मालिक न होने के कारण हैकिंग होने से मना भी नहीं किया जा सकता है। पांचवां, इसका एक और नुकसान यह है कि यदि कोई ट्रांजैक्शन आपसे गलती से हो गया तो आप उसे वापस नहीं मंगा सकते हैं जिससे आपको घाटा होता है।

# क्या क्रिप्टो करेंसी का उपयोग कानूनन वैध है या अवैध?

बहुत से लोगों के मन में यह सवाल आता है कि क्रिप्टो करेंसी का उपयोग करना कानूनी रुप से सही है अथवा नहीं! दरअसल, यह फैसला आपकी इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस देश में रहकर इसका उपयोग कर रहे हैं, क्योंकि कुछ देशों में अभी भी क्रिप्टो करेंसी को कानूनी मान्यता नहीं मिली है जिसमें भारत भी एक है। यही नहीं, कुछ देशों ने इसे 'ग्रे जोन' में रखा है। कहने का तात्पर्य यह कि वहां ना तो इसे औपचारिक तौर पर बैन किया गया है और ना ही इसके प्रयोग की मान्यता दी गई है। निर्विवाद रूप से क्रिप्टो करेंसी में अच्छी ग्रोथ के चलते भारतीय नागरिकों का रुझान भी इसकी तरफ देखने को मिल रहा है। इसलिए उम्मीद की जाती है कि भारत सरकार भी भविष्य में कोई सकारात्मक पहल करेगी।

# भारत में क्रिप्टोकरेंसी की वैधानिक स्थिति को लेकर बना रहता है एक कन्फ्यूजन 

भारत में क्रिप्टो करेंसी की वैधानिक स्थिति यानी लीगल स्टेटस को लेकर बहुत ही कन्फ्यूजन बना रहता है। ऐसा इसलिए कि सरकार ने वर्ष 2021 की शुरुआत में एक बिल प्रस्तावित किया था, जिसमें बिटकॉइन और दोगेकोइन सहित सभी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान था। हालांकि, बाद में इसमें और कोई डेवलपमेंट नहीं हुआ। उसके बाद आई एक रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी को पूरी तरह से बैन करने का आइडिया ड्रॉप कर दिया है। इससे स्पष्ट है कि भले ही क्रिप्टोकरेंसी भारत में गैरकानूनी नहीं है। लेकिन, इन्हें रेगुलेट भी नहीं किया जाता है। मतलब कि आप बिटकॉइन खरीद और बेच सकते हैं। इसे बतौर इन्वेस्टमेंट रख भी सकते हैं। लेकिन, इसकी देखभाल या सुरक्षा के लिए कोई गवर्निंग बॉडी नहीं है। कहने का तातपर्य यह कि यदि क्रिप्टो करेंसी अर्थव्यवस्था में आपकी दिलचस्पी है तो भगवान भरोसे आप लेन देन करते रहिए। लाभ मिले तो उछलिये और हानि हो तो सिर धुनिये।

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इस स्थिति पर वज़ीरक्स के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी निश्चल शेट्टी ने सटीक टिप्पणी दी है कि, 'भारत में अभी इसे लेकर बहुत भ्रम (कनफ्यूजन) है। क्योंकि, देश में इसके लिए कोई नियमन और नियामक (रेगुलेशन) नहीं है। इसलिए जब लोग इसके बारे में सुनते हैं तो काफी भयभीत हो जाते हैं। वास्तव में, इंटरनेट पर मौजूद बहुत सारी चीजें अनरेगुलेटेड हैं, जिनमें ओला और उबेर जैसी परिवहन सुविधा कम्पनियों के नाम भी शामिल हैं। यहां तक कि ई-कॉमर्स भी भारत में अनरेगुलेटेड है।' लिहाजा, किसी भी निवेशक (इन्वेस्टर्स) के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि इसके रेगुलेटेड नहीं होने से फ्रॉड और स्कैम की संभावना बढ़ जाती है। मेरा मानना है कि दुनिया के प्रशासन में एक ऐसा वर्ग हावी है, जो अपने लिए कुछ मामलों में विशेष अपरिभाषित स्थिति चाहता है, ताकि यदि वह लूट या धोखाधड़ी भी करे तो कानून के लंबे हाथ उस तक नहीं पहुंच पाएं।

# जानिए, क्रिप्टो करेंसी आप कैसे खरीदें और बेचें?

दुनिया के बाजार में ढेरों क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म्स हैं। लिहाजा, देश में बिटकॉइन और दोगेकोइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी को खरीदना और बेचना काफी आसान है। अपने देश में भी मौजूद पॉपुलर प्लेटफॉर्म्स में वज़ीरक्स, ज़ेबपे, कोइनस्विच कुबेर और कोइन्डकस गो के नाम शामिल हैं। यहां पर यह स्पष्ट कर दें कि इन्वेस्टर्स कोइनबसे और बिनांस जैसे इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स से आप बिटकॉइन, दोगेकोइन और एथेरेउम जैसी दूसरी क्रिप्टोकरेंसी भी खरीद सकते हैं।

यहां पर आपको स्पष्ट कर दें कि शेयर बाजारों के उलट, क्रिप्टो करेंसी के लेन देन से जुड़े ये सभी प्लेटफॉर्म रात दिन यानी चौबीसों घंटे काम करते हैं। इसका आशय यह है कि आप हफ्ते में किसी भी दिन और दिन के किसी भी समय में अपने पैसे का निवेश और उसकी निकासी कर सकते हैं। यही नहीं, क्रिप्टोकरेंसी को खरीदने और बेचने की प्रक्रिया भी काफी आसान है। इसके लिए आपको केवल इन प्लेटफॉर्म्स पर साइन अप करना होगा। उसके बाद अपना केवाईसी प्रोसेस पूरा कर वॉलेट में मनी ट्रांसफर करना होगा। इसके बाद आप मनचाही खरीदारी कर पाएंगे। यहां पर यह भी बता दें कि किसी निवेशक यानी इन्वेस्टर्स के पास क्रिप्टो करेंसी की खरीदी-बिक्री के लिए प्री-डिसाइडेड लिमिट सेट करने का भी ऑप्शन होगा।

हालांकि, क्रिप्टो करेंसी को खरीदने के लिए कोई लिमिट तय नहीं है। मतलब यह कि इन्वेस्टर्स बहुत छोटे से अमाउंट से भी अपना इन्वेस्टमेंट शुरू कर सकते हैं। फिर भी यहां पर चुनौती ये है कि अधिकांश बैंक क्रिप्टो एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के साथ काम करने को तैयार नहीं हैं, जिसने इससे लेनदेन की प्रक्रिया को काफी मुश्किल बना दिया है।

निश्चल इसे विस्तार पूर्वक स्पष्ट करते हुए बताते हैं कि, 'बैंक हमें सही तरीके से डिपॉजिट एक्सेप्ट करने का ऑप्शन नहीं दे रहे हैं। ऐसे में यदि बैंकिंग सिस्टम क्रिप्टो करेंसी प्लेटफॉर्म का सपोर्ट नहीं करेगा, तो वे कैसे ठीक से काम कर सकते हैं। अभी हमें चाहिए कि हम हर हफ्ते एक नए बैंक को अपने प्लेटफॉर्म पर इंटीग्रेट करें। क्योंकि मौजूदा बैंक यदि काम करना बंद कर देते हैं तो इसका सीधा असर इसके यूजर्स पर पड़ता है।'

साफ तौर पर कहा जा सकता है कि क्रिप्टो इंडस्ट्री भारत में काफी नई है। इनमें यूपीआई ट्रांजैक्शन्स भी काम नहीं आते हैं। इसलिए किसी भी इन्वेस्टर्स को इसमें इन्वेस्ट करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। खासकर, क्रिप्टोकरेंसी की खरीदी बिक्री के लिए दूसरा ऑप्शन पी2पी ट्रांजैक्शन्स हैं, यानी कि पर्सन टू पर्सन ट्रांजैक्शन्स, यानी लेनदेन। इसमें आप इंट्रेस्टेड बायर व सेलर ढूंढ कर एक्सचेंज कर सकते हैं।

# आप क्या कर सकते हैं क्रिप्टो करेंसी के साथ?

क्रिप्टो करेंसी मार्केट ने पिछले कुछ सालों में काफी ग्रोथ पाई है। लेकिन, तल्ख सच्चाई यह है कि इसके साथ आप ज्यादा कुछ नहीं कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर बात करें तो आप इससे सैंडविच या समोसा नहीं खरीद सकते हैं। यह कड़वी बात है कि वास्तविक दुनिया में क्रिप्टो करेंसी बहुत हद तक किसी काम का नहीं है। लेकिन, बतौर 'स्टोर ऑफ वैल्यू' यह आपके बहुत काम आ सकता है। एक प्रकार से इसकी तुलना चांदी या सोने से की जा सकती है, जिन्हें लोग इसलिए खरीदते हैं, क्योंकि उनमें वैल्यू बढ़ने की संभावना देखते हैं।

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इस पर शेट्टी बिल्कुल ठीक फरमाते हैं कि, 'बिटकॉइन का मकसद बिल्कुल सोना (गोल्ड) की तरह है, यानी वैल्यू स्टोर करना। वास्तव में, यह सोने की तुलना में ज्यादा एक्सेसिबल है, क्योंकि इसे खरीदने के लिए आपको केवल एक मोबाइल फोन और इंटरनेट की जरूरत होती है। लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि सोने को बहुत आसानी से यूज किया जा सकता है, लेकिन क्रिप्टो करेंसी को नहीं। शायद यही बात क्रिप्टो को और अधिक अस्थिर बनाता है।

यहां पर यह भी बता दें कि हर क्रिप्टो करेंसी की अपनी एक अलग वैल्यू होती है। जैसे बिटकॉइन को गोल्ड के सब्सटीट्यूट के तौर पर देखा जाता है। वहीं, कुछ शीबा इनु जैसे कॉइन हैं, जिनका कोई काम नहीं है और ना इनकी कोई वैल्यू है। एक प्रकार से ये मीम कॉइन्स हैं। ऐसे में कई फैक्टर्स हैं जो किसी कॉइन का वैल्यू डिसाइड करते हैं।

आप इस बात से अवगत होंगे कि दुनिया में जो चीज सीमित मात्रा में उपलब्ध होती है, उसकी वैल्यू काफी ज्यादा होती है। कमोबेश यही बात क्रिप्टोकरेंसी पर भी लागू होती है। इसलिए बिटकॉइन इतना पॉपुलर है। क्योंकि, ये काफी लिमिटेड है। दूसरी तरफ, दोगेकोइन्स में कोई लिमिट नहीं है। जिसके चलते ये आगे चलकर फेल भी हो सकता है। साथ ही किसी क्रिप्टो कॉइन का इस्तेमाल कैसे होगा, ये फैक्टर भी इसकी वैल्यू डिसाइड करता है। यदि आप  इसका इस्तेमाल किसी खास उद्देश्य के लिए करते हैं, तो निःसन्देह इसकी वैल्यू बढ़ सकती है। अब यह आप पर निर्भर है कि आप इसका कब, कैसे और कितना उपयोग करते हैं, ताकि लाभान्वित रहें।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार