वेतनभोगी लोग 90,000 सालाना और गैर-वेतनभोगी 31,500 टैक्स देते हैं, इतना अंतर क्यों है

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जे. पी. शुक्ला । Aug 30, 2022 3:35PM
एक वेतनभोगी कर्मचारी वह होता है जिसे काम के घंटों को ध्यान में रखे बिना एक निश्चित राशि का भुगतान किया जाता है। वेतनभोगी कर्मचारियों को आम तौर पर नियमित अंतराल में द्वि-साप्ताहिक या मासिक वेतन चेक मिलता है।

वेतनभोगी वर्ग भारत में सबसे अधिक कर देता है। अगर हम गैर-वेतनभोगी वर्ग के बारे में बात करते हैं तो इसमें अपना व्यवसाय करने वाले, उद्योग चलाने वाले और डॉक्टर, सीए, आर्किटेक्ट आदि जैसे पेशेवर शामिल होते हैं, जो कि उनसे बहुत कम कर देते हैं। भारत के राजस्व सचिव तरुण बजाज ने कहा है कि देश में औसतन गैर-वेतनभोगी लोग प्रति रिटर्न ₹31,500 का कर दाखिल करते हैं जबकि वेतनभोगी वर्ग प्रति रिटर्न ₹90,000 से अधिक का कर भुगतान करता है। 

भारत के राजस्व सचिव ने कहा है कि 96% गैर-वेतनभोगी लोग 10 लाख रुपये से कम का आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं। 88% गैर-वेतनभोगी लोग ₹5 लाख से कम का आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं।

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एक्सपर्ट बताते हैं कि अगर देश में आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले कुल लोगों की बात की जाये तो 75 प्रतिशत आयकर रिटर्न ₹5,00,000 प्रति वर्ष से कम पर दाखिल किया जाता है और 92% आयकर रिटर्न ₹10 लाख से कम के लिए दाखिल किए जाते हैं।

वेतनभोगी और गैर-वेतनभोगी में फर्क 

एक वेतनभोगी कर्मचारी वह होता है जिसे काम के घंटों को ध्यान में रखे बिना एक निश्चित राशि का भुगतान किया जाता है। वेतनभोगी कर्मचारियों को आम तौर पर नियमित अंतराल में द्वि-साप्ताहिक या मासिक वेतन चेक मिलता है। उनकी आय अक्सर सशुल्क छुट्टियों, देखभाल और अन्य लाभों से पूरित होती है। वहीँ गैर-वेतनभोगी कर्मचारी का मतलब उस व्यक्ति से होता है जो काम किए गए प्रत्येक घंटे के लिए प्रति घंटा की दर से वेतन प्राप्त करता है।

आखिर इस अंतर की वजह क्या है?

आखिर क्यों वेतनभोगी लोग ज्यादा टैक्स देते हैं जबकि गैर-वेतनभोगी लोग उनसे कहीं बहुत कम टैक्स देते हैं, इसकी वजह क्या है, दोनों  के टैक्स में इतना अंतर क्यों है?

एक्सपर्ट के मुताबिक़, आमतौर पर सैलरीड क्लास की पूरी इनकम एक नंबर में होती है, उन्हें कार्यालय से बैंक खाते में वेतन मिलता है और धारा 80सी सहित सभी कटौतियों को काटने के बाद नियोक्ता उनका टीडीएस काटकर वेतन का भुगतान करता है। इस वजह से वेतनभोगी वर्ग को अधिक टैक्स देना पड़ता है।

वहीँ अगर हम गैर-वेतनभोगियों के बारे में बात करते हैं तो इसमें उद्यमी, व्यवसायी और पेशेवर लोग शामिल हैं जो अपने ग्राहकों की मदद से अपना काम करते हैं। गैर-वेतनभोगी वर्ग को आयकर अधिनियम के अनुसार कई लाभ प्राप्त होते हैं, जिसकी वजह से उनकी कर देयता कम हो जाती है। आम तौर पर गैर-वेतनभोगी वर्ग अपने खर्चों को एक संख्या में अर्जित आय के बराबर दिखाते हैं। उन्हें लगभग हर तरह के खर्च पर टैक्स कटौती का फायदा मिलता है, जिससे उनकी टैक्स देनदारी कम हो जाती है।

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यदि कोई व्यक्ति अपना कोई छोटा व्यवसाय चलाता है और अपने कारखाने में एक मशीन स्थापित करता है तो आयकर अधिनियम के अनुसार, उसे हर साल मूल्यह्रास लागत के रूप में अपनी मशीन की लागत का 10% लाभ मिलता है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर किसी व्यक्ति के कारखाने में 10 लाख रुपये की मशीन है तो उसे सालाना 1,00,000 रुपये का लाभ होता है।

वह इस राशि को अपनी आय से काट सकता है। इसके साथ ही कच्चा माल खरीदने और तैयार माल बेचने के बीच के अंतर को लाभ कहा जाता है, लेकिन इसमें भी वे लोग बिजली बिल से लेकर कर्मचारियों के वेतन, पेट्रोल और डीजल पर खर्च, माल ऑर्डर करने की लागत, माल भेजने की लागत में सभी कटौती का लाभ उठा लेते हैं।

- जे. पी. शुक्ला

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