डिजिटल बैंक क्या है? इसका मकसद क्या है? यह कब से अस्तित्व में आएगा?

डिजिटल बैंक क्या है? इसका मकसद क्या है? यह कब से अस्तित्व में आएगा?

नीति आयोग का मानना है कि देश का पब्लिक डिजिटल इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, खास तौर से यूपीआई ने यह प्रदर्शित किया है कि किस प्रकार बाधाओं को हटाकर राह को सुगम बनाया जा सकता है। बता दें कि यूपीआई से किए गए ट्रांजैक्‍शन का मूल्‍य 4 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है।

केंद्र में सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार ने डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने और समावेशी विकास के लिए 'डिजिटल बैंक' की अवधारणा को भी प्रॉपर चैनल से प्रस्तुत करवा दिया है। इसी सिलसिले में नीति आयोग ने डिजिटल बैंक के गठन का प्रस्‍ताव देते हुए आगामी 31 दिसम्बर तक इससे जुड़े सुझाव आमंत्रित किये हैं। कहना न होगा कि इस बैंक के आकार लेने के बाद खाताधारी बैंक उपभोक्ताओं को घर बैठे ही सभी सेवाएं मिलेंगी, क्योंकि इस बैंक का कोई भौतिक ब्रांच नहीं होगा।

इसे भी पढ़ें: जानिए क्या है आरबीआई की नई एकीकृत लोकपाल योजना?

# डिजिटल बैंक सम्बन्धी परिचर्चा पत्र जारी, दिसंबर तक दीजिये सुझाव

बता दें कि नीति आयोग ने गत बुधवार को डिजिटल बैंक बनाने का प्रस्‍ताव किया है जो पूर्ण रूप से तकनीकी कार्यकुशलता पर आधारित होगा। यह डिजिटल बैंक अपनी सेवाएं देने के लिए इंटरनेट या ऐसे किसी चैनल पर सैद्धांतिक रूप से आधारित होगा, जिसकी कोई भौतिक उपस्थिति नहीं होगी। इस निमित्त नीति आयोग ने 'डिजिटल बैंक्स: ए प्रपोजल फॉर लाइसेंसिंग एंड रेगुलेटरी रीजिम फॉर इंडिया' नामक एक परिचर्चा पत्र (डिस्कशन पेपर) में इसका जिक्र किया है, जिसमें उसने आगामी 31 दिसंबर तक सभी लोगों से सुझाव आमंत्रित किये हैं। 

# वर्चुअल तरीके से ऑपरेट होंगे डिजिटल बैंक

इसमें बताया गया है कि वर्चुअल तरीके से ये बैंक ऑपरेट किये जायेंगे, जो पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित होगा। आयोग ने अपने परिचर्चा पत्र में देश में डिजिटल बैंक की लाइसेंसिंग और नियामकीय व्‍यवस्‍था के रोडमैप की भी चर्चा की है। इसी में उसने डिजिटल बैंकों को बैंकिंग रेगुलेशन एक्‍ट, 1949 के तहत बैंक के तौर पर परिभाषित करने का इरादा जताया है। यह डिस्कशन पेपर नीति आयोग ने फाइनैंस, टेक्नोलॉजी, कानून के क्षेत्र के दिग्गजों और इंटर-मिनिस्टीरियल चर्चा करने के बाद तैयार किया है।

# डिपॉजिट्स और कर्ज जारी करेंगे डिजिटल बैंक 

ये डिजिटल बैंक डिपॉजिट्स और कर्ज जारी करेंगे। इसके साथ ही वे वैसी सभी सेवाएं भी दे सकेंगे, जिनका जिक्र बैंकिंग रेगुलेशन एक्‍ट में किया गया है। डिजिटल बैंक अपनी सेवाएं देने के लिए इंटरनेट या दूसरे संभव चैनल्‍स का सैद्धांतिक रूप से इस्‍तेमाल करेंगे। यानी कि ऐसे बैंकों की कोई भौतिक शाखा नहीं होगी। हालांकि, यह भी प्रस्तावित है कि डिजिटल बैंक मौजूदा कॉमर्शियल बैंकों के समान विवेकपूर्ण और तरलता मानदंडों के अधीन होंगे। 

# फिनटेक क्षेत्र में ग्‍लोबल लीडर बनाएगा डिजिटल बैंक

नीति आयोग का मानना है कि देश का पब्लिक डिजिटल इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, खास तौर से यूपीआई ने यह प्रदर्शित किया है कि किस प्रकार बाधाओं को हटाकर राह को सुगम बनाया जा सकता है। बता दें कि यूपीआई से किए गए ट्रांजैक्‍शन का मूल्‍य 4 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। वहीं, आधार सत्‍यापन का आंकड़ा 55 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। इससे साफ है कि भारत के पास डिजिटल बैंकों के लिए तकनीक पूरी तरह से उपलब्‍ध है। इसलिए डिजिटल बैंकिंग के लिए नियामकीय खाका और नीतियां बनाने का ब्‍लू-प्रिंट भारत को फिनटेक के क्षेत्र में ग्‍लोबल लीडर की स्थिति मजबूत करने में मददगार होगा।

इसे भी पढ़ें: आरबीआई रिटेल डायरेक्ट स्कीम क्या है? इसके क्या क्या फायदे हैं? पढ़ें सारे जानकारी

# वित्तीय समावेश का है लक्ष्य 

कहना न होगा कि भले ही भारत ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के जरिये वित्तीय समावेश के लक्ष्य को हासिल करने में बहुत प्रगति की है। फिर भी कर्ज विस्तार में धीमी गति पॉलिसी बनाने वालों के लिये हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। खासतौर से 6.30 करोड़ एमएसएमईज के लिये, जिनका देश के जीडीपी में 30 फीसदी योगदान है, मैन्युफैकचरिंग में 45 फीसदी योगदान है और निर्यात में 40 फीसदी हिस्सेदारी है। ये ऐसा सेक्टर है जो सबसे ज्यादा रोजगार सृजित करता है।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार