Sawan 2026: व्रत शुरू करने से पहले जरूरी है संकल्प लेना, जानें इसका सही तरीका

Lord Shiva
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एकता । Jul 30 2026 6:59PM

सावन सोमवार व्रत की शुरुआत केवल निराहार रहने से नहीं, बल्कि भगवान शिव के समक्ष संकल्प लेने से होती है। इसके लिए सोमवार की सुबह स्नान के बाद दाहिने हाथ में जल, अक्षत और सिक्का लेकर मंत्र के साथ संकल्प लें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकल्प लेने से व्रत अनुशासित होता है और श्रद्धा मजबूत होती है।

सावन का पवित्र महीना शुरू हो चुका है। इस साल 30 जुलाई से 28 अगस्त तक भगवान शिव की पूजा का विशेष समय रहेगा। इस पूरे महीने में लाखों शिव भक्त कांवड़ यात्रा करते हैं, जबकि कई लोग हर सोमवार का व्रत रखते हैं। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर आप सावन सोमवार का व्रत कर रहे हैं तो सिर्फ व्रत रखना ही काफी नहीं होता। व्रत शुरू करने से पहले संकल्प लेना भी बहुत जरूरी माना जाता है।

व्रत की शुरुआत खाने से नहीं, संकल्प से होती है
अक्सर लोग सोचते हैं कि व्रत की शुरुआत सुबह कुछ न खाने से हो जाती है। लेकिन धार्मिक मान्यता कहती है कि व्रत की असली शुरुआत आपके मन के संकल्प से होती है। जब आप भगवान शिव के सामने पूरे विश्वास और सच्चे मन से संकल्प लेते हैं, तभी व्रत का महत्व और बढ़ जाता है।

संकल्प कब लेना चाहिए?
सावन के पहले सोमवार की सुबह संकल्प लेना सबसे शुभ माना जाता है। अगर संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान करें। हल्के या साफ रंग के कपड़े पहनें। भगवान शिव के सामने शांत होकर बैठें। कुछ देर मन को शांत करें और पूरे विश्वास के साथ "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें। इसे भी पढ़ें: Sawan 2026 Special: नागपंचमी और महाशिवरात्रि पर खुलने वाले ये Unique Temples, जानें इनकी पौराणिक परंपराएं

संकल्प के लिए किन चीजों की जरूरत होगी?
इस छोटी-सी पूजा के लिए आपको सिर्फ कुछ आसान चीजें चाहिए, जैसे 1 रुपये का सिक्का, थोड़े से कच्चे चावल, एक चम्मच जल, एक फूल (अगर हो तो) और शिवलिंग या भगवान शिव की तस्वीर। पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें और मन को पूरी तरह पूजा में लगाएं।

संकल्प कैसे लें?
भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग के सामने बैठें। अपने दाहिने हाथ में जल, चावल और 1 रुपये का सिक्का रखें। इसके बाद यह संकल्प मंत्र बोलें,
देवदेव महादेव नीलकण्ठ नमोऽस्तु ते।
कर्तुमिच्छाम्यहं देव श्रावण सोमवार व्रतं तव।।
तव प्रभावाद्देवेश निर्विघ्नेन भवेदिति।
कामाधाः शत्रवो मां वै पीडां कुर्वन्तु नैव हि।।

इस मंत्र का मतलब: हे देवों के देव महादेव, नीलकंठ, आपको मेरा प्रणाम। मैं पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ सावन सोमवार का व्रत रखना चाहता/चाहती हूं। कृपया मुझे आशीर्वाद दें ताकि मेरा यह व्रत बिना किसी परेशानी के पूरा हो सके। मेरे मन से क्रोध, लालच, गलत इच्छाएं और अशांत करने वाले विचार दूर करें। मुझे शांत, पवित्र और हमेशा अपनी भक्ति में बनाए रखें। इसे भी पढ़ें: Sawan 2026: सोमवार को Belpatra तोड़ने की मनाही क्यों? जानें Shivpuran के महत्वपूर्ण Rules और मान्यताओं का विश्लेषण

संकल्प के बाद क्या करें?
मंत्र बोलने के बाद भगवान शिव से अपने मन की इच्छा कहें। इसके बाद जल धीरे-धीरे शिवलिंग के चरणों में अर्पित करें। प्रेम और श्रद्धा से चावल चढ़ाएं। 1 रुपये का सिक्का अपने घर के मंदिर या पूजा स्थान पर रख दें। धार्मिक मान्यता है कि जब भक्त पूरे मन से भगवान शिव के सामने अपनी भावना व्यक्त करता है, तो उसकी भक्ति और भी मजबूत होती है।

क्या सच में संकल्प लेना जरूरी है?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संकल्प लेने से व्यक्ति का मन एक लक्ष्य पर टिकता है। इससे व्रत केवल एक परंपरा नहीं रहता, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन और भगवान शिव के प्रति समर्पण का माध्यम बन जाता है। यही कारण है कि कई विद्वान सावन सोमवार का व्रत शुरू करने से पहले संकल्प लेने की सलाह देते हैं।

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