Priyanka Gandhi की 'गोमूत्र एक्सपर्ट' टिप्पणी पर 215 Academics का फूटा गुस्सा, IIT Madras Director के बचाव में उतरे

प्रियंका गांधी की आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी को 'गोमूत्र एक्सपर्ट' बताने वाली टिप्पणी पर 215 शिक्षाविदों ने तीव्र आपत्ति जताई है। एक खुले पत्र में, शिक्षाविदों ने तर्कपूर्ण संवाद के बजाय किसी विद्वान के विचारों को लेबल से खारिज करने की निंदा की, यह मानते हुए कि यह वैज्ञानिक सोच और अकादमिक स्वतंत्रता को कमजोर करता है। यह घटना नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा सुधारों पर चल रही बहस के बीच हुई है।
200 से ज़्यादा शिक्षाविदों ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा को एक खुला पत्र लिखकर IIT मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी को गौमूत्र विशेषज्ञ बताने पर आपत्ति जताई है। 215 शिक्षाविदों (जिनमें वाइस-चांसलर और पूर्व वाइस-चांसलर भी शामिल हैं) के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में कहा गया है कि मज़ाक उड़ाना, तर्कपूर्ण बातचीत का विकल्प नहीं हो सकता। पत्र में कहा गया है कि हम IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर वी. कामाकोटी को 'गोमूत्र एक्सपर्ट' बताने वाली आपकी टिप्पणी पर निराशा ज़ाहिर करने के लिए यह पत्र लिख रहे हैं। चाहे यह बात मज़ाक में कही गई हो या राजनीतिक बयानबाज़ी के तौर पर, इस तरह की टिप्पणी से ऐसी चिंताएँ पैदा होती हैं जो किसी एक व्यक्ति से कहीं आगे तक जाती हैं। प्रोफ़ेसर कामाकोटी भारत के सबसे प्रमुख वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों में से एक के प्रमुख हैं।
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इसमें आगे कहा गया कि हर एकेडमिक की तरह, उन्हें भी परिकल्पनाएं पेश करने, पारंपरिक ज्ञान पर चर्चा करने और वैज्ञानिक बातचीत में हिस्सा लेने का अधिकार है। किसी विद्वान के विचारों के मूल पर ध्यान देने के बजाय उन्हें किसी लेबल से खारिज करना, उस वैज्ञानिक सोच को कमजोर करने का जोखिम उठाना है जिसे विकसित करने के लिए हमारा संविधान हर नागरिक से कहता है। वैज्ञानिक सोच का मतलब सिर्फ़ लीक से हटकर विचारों के प्रति संदेह रखना नहीं है; बल्कि दावों को स्वीकार करने या खारिज करने से पहले उन्हें निष्पक्ष रूप से परखने की इच्छा रखना भी है।
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पद्म श्री से सम्मानित कामाकोटी, NEET पेपर लीक कांड के बाद केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा सुधारों पर बनाई गई छह सदस्यीय टास्क फोर्स के सदस्य हैं। प्रियंका ने मंगलवार को लोकसभा में बोलते हुए यह बात कही और सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री को अपने सलाहकार बदल लेने चाहिए क्योंकि वे असलियत से बहुत दूर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें (प्रधानमंत्री को) यह समझने की ज़रूरत है कि सिर्फ़ नई कमेटियां बनाने से काम नहीं चलेगा। राधाकृष्णन कमेटी की एक भी सिफ़ारिश अब तक लागू नहीं की गई है। वहीं, नई कमेटी में IB के पूर्व चीफ़, एक IT कंपनी के मालिक और यहाँ तक कि 'गौ-मूत्र' के जानकार भी शामिल हैं।
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