चंद्रग्रहण समाप्ति पर दान से प्राप्त होते हैं विशेष फल

चंद्रग्रहण समाप्ति पर दान से प्राप्त होते हैं विशेष फल

साल का पहला चंद्रग्रहण 26 मई को लग रहा है। 26 मई 2021 बुधवार वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस पूर्णिमा की तिथि को वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस चंद्रग्रहण की विशेषता है कि यह भारत के कुछ ही राज्यों में दिखाई देगा।

इस साल का पहला चंद्रग्रहण बैशाख पूर्णिमा को लग रहा है, वैसे तो चंद्रग्रहण खगोलीय घटना है लेकिन इसका धार्मिक महत्व भी है,  तो आइए हम आपको चंद्रग्रहण का महत्व तथा सूतक के दौरान ली जाने वाली सावधानियों के बारे में बताते हैं। 

जानें चंद्र ग्रहण के बारे में

साल का पहला चंद्रग्रहण 26 मई को लग रहा है। 26 मई 2021 बुधवार वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। इस पूर्णिमा की तिथि को वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस चंद्रग्रहण की विशेषता है कि यह भारत के कुछ ही राज्यों में दिखाई देगा। उत्तर पूर्वी राज्यों अरूणाचल, मेघालय, मिजोरम, बंगाल, नागालैंड, पूर्वी उड़ीसा, मणिपुर, असम, त्रिपुरा, मेघालय में देखा जा सकेगा। इसलिए ग्रहण का सूतक भी केवल राज्यों में मान्य होगा। साथ ही चंद्र ग्रहण का सूतक काल पूरे भारत में मान्य नहीं होगा क्योंकि यह एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण है।

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चंद्रग्रहण से जुड़ी धार्मिक मान्यता

चंद्रग्रहण की धार्मिक मान्यता भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पंडितों की मान्यता है चंद्रमा मन का कारक है इसलिए चंद्रग्रहण का सीधा प्रभाव व्यक्ति से मन पर पड़ता है। जिनकी कुंडली में चंद्रमा दोष होता है उनके ऊपर चंद्रग्रहण का असर अधिक दिखाई देता है। चंद्रमा पानी को अपनी ओर आकर्षित करता है इसलिए इस दौरान समुद्र में बड़ी-बड़ी लहरें उठती हैं।

चंद्रग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथा

शास्त्रों में चंद्रग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत को भगवान विष्णु मोहिनी रूप धारण कर देवताओं में बांट रहे थे तो स्वरभानु नाम का एक असुर देवताओं का रूप धारण कर आ गया। लेकिन सूर्य तथा चंद्रमा स्वरभानु की इस बात से अवगत थे और उन्होंने यह बात विष्णु जी को बता दी। इसके बाद भगवान विष्णु ने अपने चक्र से स्वरभानु के सिर को धड़ से अलग कर दिया। लेकिन इस बीच अमृत की कुछ बूंदें स्वरभानु के मुख में चली गयीं। इससे वह मरा नहीं और उसके सिर को राहु तथा धड़ को केतु कहा गया। ऐसी मान्यता है कि सूर्य तथा चंद्रमा ने स्वरभानु की बात विष्णु को बतायी थी इसलिए राहु-केतु सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगाकर शापित करते हैं। इस दौरान केतु चंद्रमा को राहु सूर्य को शापित करता है। 

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सूतक काल में रखें ये सावधानियां

सूतक काल में कोई नया काम ने शुरू करें। 

इस दौरान गर्भवती महिलाओं को अपनी सेहत का विशेष रखना चाहिए। क्योंकि ग्रहण के समय गर्भ में पल रहे बच्चे को हानि हो सकती है।

ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से नहीं देखें।

सिलाई और कढ़ाई-बुनाई का काम इस समय न करें।

सूतक के समय पूजा-पाठ भी नहीं करें।

इस समय भोजन नहीं बनाएं क्योंकि ग्रहण की किरणों से भोजन अशुद्ध हो सकता है।

खाने पीने के सामान को अशुद्ध होने से बचाने के लिए तुलसी का पत्ता डाल दें। 

सूतक में तुलसी को भी न छुएं। 

सूतक के समय शौचालय जाने से भी बचें।

जानें सूतक का प्रभाव

सूतक का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसके उपायों का पालन करते हैं या नहीं। अगर आप सूतक से बचने के लिए उपाय करते हैं तो आपको कोई परेशानी नहीं होती है। लेकिन यदि आप सूतक के उपायों का पालन नहीं कर रहे हैं तो आपको परेशानी हो सकती है। सूतक के समय खान-पान की वस्तुएं अशुद्ध हो जाती हैं जिससे कि उनको खाने से व्यक्ति की सेहत पर प्रभाव पड़ सकता है।

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चंद्रग्रहण का समय 

भारतीय समय के अनुसार, इस साल का पहला चंद्रग्रहण 26 मई 2021 को दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से शुरू होगा और शाम 07 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगा। इस वर्ष 2021 में दो सूर्य ग्रहण तथा दो चंद्रग्रहण होंगे।

चंद्रग्रहण के दौराऩ गर्भवती स्त्रियां रखें विशेष ख्याल 

चंद्रग्रहण काल के दौरान प्रेगनेंट महिलाओं को नुकीली वस्‍तुओं जैसे कि चाकू, कैंची और सुईं आदि का इस्‍तेमाल या इनके संपर्क में नहीं आना चाहिए। इस समय पानी न पिएं और ना ही घर का कोई काम करें। पंडितों की मान्यता है कि जब ग्रहण शुरू हो जाता है तो उस समय गर्भवती महिला को नहाना नहीं चाहिए और ग्रहण के समय घर से बाहर निकलकर चांद की रोशनी में नहीं आना चाहिए। इसके अलावा ग्रहण के दौरान व्‍यायाम भी नहीं करना चाहिए।

- प्रज्ञा पाण्डेय