Saraswati Vandana: शारदीय नवरात्र में Saraswati Puja आज, छात्र और कलाकार ऐसे करें मां शारदा की उपासना

Saraswati Puja
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शारदीय नवरात्र के दौरान 17 अक्तूबर 2026 को सरस्वती पूजा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन देवी सरस्वती की उपासना के लिए सुबह 06:22 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक का समय सबसे शुभ माना गया है। छात्र अपनी पुस्तकों और कलाकार वाद्य यंत्रों की पूजा कर विद्या, बुद्धि तथा रचनात्मकता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

देवी सरस्वती को विद्या, ज्ञान, कला और संगीत की देवी माना जाता है। देवी सरस्वती की आराधना का यह पर्व लेखकों, शिक्षकों, छात्रों और कला से जुड़े लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना करने से ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है। इस बार आज यानी की 17 अक्तूबर 2026 को सरस्वती पूजा का पर्व मनाया जा रहा है। तो आइए जानते हैं सरस्वती पूजा की तिथि, मुहूर्त, पूजन विधि और महत्व आदि के बारे में...

तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के मुताबिक शारदीय नवरात्र के दौरान सरस्वती पूजा 17 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन पूजा का प्रमुख समय सुबह 06:22 मिनट से लेकर दोपहर 12:06 मिनट तक है। वहीं दोपहर में पूजा का मुहूर्त 03:54 मिनट से लेकर शाम 06:14 मिनट तक है।

पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें और पूजा स्थल की सफाई करें। अब चौकी पर मां सरस्वती की प्रतिमा को स्थापित करें। फिर देवी सरस्वती को अक्षत, फूल, चंदन और फल आदि अर्पित करें। पूजा के दौरान घी का दीपक जलाएं और मां सरस्वती की वंदना करें। वहीं छात्र अपनी किताबें, कॉपी और कलम आदि को पूजान स्थल पर रखकर देवी सरस्वती का आशीर्वाद लें। वहीं संगीत और कला से जुड़े लोग अपने वाद्य यंत्रों की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। फिर मां सरस्वती को फल, मिठाई और खीर आदि का भोग लगाएं।

धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक देवी सरस्वती को वाणी, विवेक और रचनात्मकता की देवी माना गया है। देवी सरस्वती की पूजा लेखकों, शिक्षकों, संगीतकारों, कलाकारों और छात्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां सरस्वती की आराधना से सीखने की क्षमता, एकाग्रता और बुद्धि के विकास का आशीर्वाद मिलता है।

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