Operation Safed Sagar Review | IAF की जांबाजी और बलिदान की दमदार कहानी, जिमी शेरगिल और सिद्धार्थ का बेहतरीन अभिनय

Operation Safed Sagar Review
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रेनू तिवारी । Aug 7 2026 4:57PM

1999 के कारगिल युद्ध की गाथा को भारतीय सिनेमा ने कई बार भुनाया है, लेकिन नेटफ्लिक्स की नई वेब सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' इस ऐतिहासिक लड़ाई के उस पहलू को सामने लाती है, जिसकी चर्चा अक्सर कम होती है।

1999 के कारगिल युद्ध की गाथा को भारतीय सिनेमा ने कई बार भुनाया है, लेकिन नेटफ्लिक्स की नई वेब सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' इस ऐतिहासिक लड़ाई के उस पहलू को सामने लाती है, जिसकी चर्चा अक्सर कम होती है—इंडियन एयर फोर्स (IAF) का ऐतिहासिक हाई-एल्टीट्यूड कॉम्बैट मिशन। 'असुर' फेम डायरेक्टर ओनी सेन के निर्देशन में बनी यह सीरीज 'गोल्डन एरो स्क्वाड्रन' के पराक्रम और वॉर ज़ोन के पीछे की मानवीय संवेदनाओं को बेहद ईमानदारी से पर्दे पर उतारती है।


कहानी और प्लॉट: 18,000 फीट की ऊंचाई पर IAF का शौर्य

यह सीरीज 1999 में कारगिल की बर्फ़ीली और दुर्गम पहाड़ियों में 16,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई पर चलाए गए ग्राउंड अटैक ऑपरेशन्स पर केंद्रित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे MiG-21, MiG-23 और MiG-27 जैसे फाइटर जेट्स के जरिए भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी घुसपैठियों के ठिकानों को तबाह किया था। कहानी सिर्फ हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह वर्दी के पीछे छिपे इंसानों के बीच की दोस्ती, उन पर टिके जिम्मेदारी के भारी बोझ और घर पर उनका इंतजार कर रहे परिवारों के त्याग को भी गहराई से छूती है।

ऑपरेशन सफेद सागर: परफॉर्मेंस

जिमी शेरगिल इस सीरीज़ की जान हैं। वे विंग कमांडर बी.एस. धनोआ 'टोनी' के किरदार में बिना ज़्यादा कोशिश किए ही अधिकार और शांति का भाव लाते हैं। सिद्धार्थ ने स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा के तौर पर हाल के समय की अपनी सबसे सधी हुई परफॉर्मेंस दी है। वे इस रोल में गरिमा, साहस और भावनात्मक गहराई लाते हैं।

अभय वर्मा, मिहिर आहूजा, तारुक रैना और अर्णव भसीन युवा फाइटर पायलट के तौर पर असरदार लगे हैं। उनकी केमिस्ट्री सहज लगती है और आप उनके लिए महसूस करते हैं। कम स्क्रीन टाइम के बावजूद दीया मिर्ज़ा और आदिल हुसैन अपनी गहरी छाप छोड़ते हैं। प्राजक्ता कोली ने ईमानदारी से काम किया है, हालांकि उनके किरदार के लिए और बेहतर लेखन की ज़रूरत थी और कभी-कभी वे कहानी के बहाव में ठीक से फिट नहीं बैठती थीं।

ऑपरेशन सफ़ेद सागर: सबसे बेहतरीन पल

हवाई लड़ाई के सीन 'ऑपरेशन सफ़ेद सागर' की सबसे बड़ी खासियत हैं। ये सीन रोमांचक और असरदार हैं, और बिना किसी दिखावे के भी देखने में शानदार लगते हैं। VFX पर बहुत मेहनत की गई है, और यह साफ़ दिखता है।

'ऑपरेशन सफ़ेद सागर' की सबसे बड़ी खूबियों में से एक इसकी कास्टिंग है। हर एक्टर अपने रोल के लिए एकदम सही लगता है, जिससे किरदार तुरंत असली लगने लगते हैं। अक्सर कहा जाता है कि अच्छी कास्टिंग बेहतरीन स्क्रिप्ट को और भी बेहतर बना सकती है, और यह बात यहाँ भी सच साबित होती है। चाहे मुख्य कलाकार हों या सहायक कलाकार, हर किरदार का अपना मकसद है और वे कहानी में आसानी से घुल-मिल जाते हैं। वे सब मिलकर कहानी में वज़न, सच्चाई और इमोशनल गहराई लाते हैं।

स्क्वाड्रन के लोगों के बीच का आपसी तालमेल भी खास है। पायलटों के बीच तनावपूर्ण और हल्के-फुल्के पलों की वजह से इमोशनल सीन और भी ज़्यादा असरदार लगते हैं। परिवार वाले सीन, जब छोटे रखे जाते हैं, तो कहानी में अपनापन लाते हैं और दर्शकों को याद दिलाते हैं कि युद्ध के मैदान से दूर भी कितनी कुर्बानियाँ दी जाती हैं। वे आपको रुककर सोचने पर मजबूर करते हैं कि सेना के परिवारों में कितनी बहादुरी होती है।

ऑपरेशन सफ़ेद सागर: डायरेक्शन

सुपरहिट 'असुर' सीरीज़ के डायरेक्टर ओनी सेन ने इस गंभीर विषय को बहुत समझदारी से संभाला है। वे देशभक्ति को बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाते और न ही असर पैदा करने के लिए ज़ोरदार डायलॉग का सहारा लेते हैं। इसके बजाय, वे कहानी और किरदारों को ही मुख्य फोकस में रखते हैं। और यह सच्चाई पूरी फ़िल्म में दिखती है। ऑपरेशन के माहौल से लेकर मिलिट्री की बारीकियों तक, इतिहास के इस हिस्से को फिर से दिखाने में की गई मेहनत साफ़ नज़र आती है।

बड़े कैनवस पर होने के बावजूद, उन्होंने भावनाओं को ज़मीन से जुड़ा रखा है। उनकी सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि वे दर्शकों को मिशन से पहले उसमें शामिल लोगों की परवाह करने के लिए प्रेरित करते हैं।

ऑपरेशन सफ़ेद सागर: क्या अच्छा है और क्या नहीं

यह सीरीज़ अपनी असलियत की वजह से खास बन जाती है। इसमें की गई गहरी रिसर्च, एयर फ़ोर्स की असली लोकेशन और दमदार एक्टिंग इसे भरोसेमंद बनाती है। एक्शन सीन बहुत अच्छे से फ़िल्माए गए हैं और कहीं भी बढ़ा-चढ़ाकर नहीं दिखाए गए। इमोशनल पल, खासकर स्क्वाड्रन के सदस्यों के बीच, दिल को छू लेते हैं। इसमें पॉलिटिक्स भी है। हालांकि, आपको एक पल के लिए भी ऐसा नहीं लगेगा कि यह कहानी या सीरीज़ के असल मकसद पर हावी हो रही है। ऑपरेशन सफ़ेद सागर का असली हीरो एयर मिशन है। और आखिरी यानी छठे एपिसोड के अंत तक यही इसका मुख्य हिस्सा बना रहता है।

हालांकि, कुछ जगहों पर इसकी रफ़्तार धीमी पड़ जाती है। कुछ इमोशनल सीन ज़रूरत से ज़्यादा लंबे खिंच जाते हैं। प्राजक्ता कोली के किरदार 'माधवी' वाले कुछ सीन कहानी से भटकाव जैसे लगते हैं। हालांकि इनका मकसद अफ़सरों के मानवीय पहलू को दिखाना और उनके परिवारों के संघर्ष को उजागर करना था, लेकिन ये हमेशा कहानी को आगे नहीं बढ़ाते।

सीरीज़ की एडिटिंग और बेहतर हो सकती थी। कुछ बातचीत में उन्हीं भावनाओं को दोहराया गया है जो पहले ही दिखाई जा चुकी हैं। मौजूदा सब-प्लॉट को खींचने के बजाय कुछ सपोर्टिंग किरदारों को बेहतर ढंग से दिखाया जा सकता था।

ऑपरेशन सफ़ेद सागर: आखिरी राय

ऑपरेशन सफ़ेद सागर सिर्फ़ एक और वॉर ड्रामा नहीं है। यह इंडियन एयर फ़ोर्स और उन जांबाज़ों को एक सच्ची श्रद्धांजलि है जिन्होंने भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे मुश्किल कॉम्बैट मिशन में हिस्सा लिया था। यह उनकी बहादुरी का सम्मान करती है और साथ ही ड्यूटी के दौरान जुड़ी भावनाओं को भी नज़रअंदाज़ नहीं करती। और सबसे अच्छी बात? यह बिना किसी फालतू बात के सीधे मुद्दे पर बात करती है।

इसके बावजूद, सीरीज़ में कुछ कमियां भी हैं। कुछ धीमी गति वाले हिस्से इसकी रफ़्तार पर असर डालते हैं। लेकिन दमदार एक्टिंग, बेहतरीन डायरेक्शन और रोमांचक एरियल सीक्वेंस इसे शुरू से आखिर तक दिलचस्प बनाए रखते हैं।

ओटीटी प्लेटफॉर्म: नेटफ्लिक्स (Netflix)

निर्देशक: ओनी सेन

मुख्य कलाकार: जिमी शेरगिल, सिद्धार्थ, अभय वर्मा, मिहिर आहूजा, तारुक रैना, दीया मिर्जा, आदिल हुसैन और प्राजक्ता कोली

रेटिंग: 3.5/5 स्टार

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