Pregnancy Care: प्रेग्नेंसी में Dehydration का Double Attack, मां और बच्चे दोनों की Health पर मंडराया खतरा

Pregnancy Care
Creative Common License

आम महिलाओं की तुलना में प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। क्योंकि मां का शरीर बच्चे के ब्लड सर्कुलेशन, विकास और एमनियोटिक फ्लूइड को बनाए रखने में मदद करता है।

प्रेग्नेंसी में महिलाओं के शरीर में कई तरह के मानसिक और शारीरिक बदलाव होते हैं। वहीं अगर प्रेग्नेंसी के दौरान या गर्मी में महिला के शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो इससे मां और भ्रूण दोनों को कई तरह की समस्या हो सकती है। आम महिलाओं की तुलना में प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है। क्योंकि मां का शरीर बच्चे के ब्लड सर्कुलेशन, विकास और एमनियोटिक फ्लूइड को बनाए रखने में मदद करता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी में पानी की कमी कैसे मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है।

प्रेग्नेंसी में डिहाइड्रेशन से होने वाली समस्याएं

एक्सपर्ट के मुताबिक गर्मियों में अधिक पसीना आना, उल्टी होना, कम पानी पीना या लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। अगर समय रहते इस समस्या पर ध्यान न दिया जाए, तो इसका असर मां और गर्भ में पलने वाले बच्चे की सेहत पर भी असर हो सकता है।

इसे भी पढ़ें: हड्डियों और Muscles का Superfood है काला चना, रोज 1 कटोरी खाने से मिलेंगे गजब के फायदे

समय से पहले डिलीवरी का जोखिम

प्रेग्नेंसी में अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो इस पर ध्यान न दिया जाए। तो यूट्रेस सिकुड़ सकता है और इससे प्री टर्म लेबर यानी समय से पहले डिलीवरी का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए प्रेग्नेंसी में लंबे समय तक पानी की कमी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 

एमनियोटिक फ्लूइड पर असर

प्रेग्नेंसी में बच्चे की सेफ्टी और विकास के लिए मौजूद एमनियोटिक फ्लूइड जरूरी होता है। शरीर में पानी की कमी होने पर इसके लेवल पर असर हो सकता है। इससे मां और भ्रूण दोनों को नुकसान हो सकता है।

ऑक्सीजन सप्लाई पर भी असर

जब मां के शरीर में पर्याप्त फ्लूइड नहीं होता है, तो ब्लड फ्लो प्रभावित हो सकता है। इससे गर्भ में पलने वाले बच्चे तक जरूरी पोषक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचने में समस्या हो सकती है।

बच्चे की ग्रोथ कम होना

प्रेग्नेंसी के दौरान अगर लंबे समय तक गंभीर डिहाइड्रेशन बना रहता है, तो इसका असर बच्चे की ग्रोथ पर भी पड़ सकता है। इसलिए प्रेग्नेंट महिलाओं को हाइड्रेशन का ध्यान रखना चाहिए।

कमजोरी और थकान महसूस होना

प्रेग्नेंसी में शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड प्रेशर प्रभावित हो सकता है। इससे महिला को चक्कर, कमजोरी और अधिक थकान महसूस हो सकती है। कई बार अचानक चक्कर आने से गिरने या चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।

सिरदर्द और मूड स्विंग्स होना

प्रेग्नेंसी में हार्मोनल बदलाव की वजह से महिलाओं को बेचैनी और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है। ऐसे में अगर डिहाइड्रेशन हो जाए, तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है। वहीं कुछ महिलाओं को फोकस करने और सिरदर्द की भी समस्या होती है। लगातार डिहाइड्रेशन रहने से प्रेग्नेंसी में मेंटल प्रॉब्लम्स मुश्किल पैदा कर सकती है।

कब्ज और यूरिन इंफेक्शन का रिस्क

एक्सपर्ट के मुताबिक प्रेग्नेंसी की शुरूआती महीने में कब्ज की समस्या होना काफी आम समस्या है। गर्मी में अगर शरीर में पानी की कमी हो जाए, तो कब्ज की समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। वहीं प्रेग्नेंसी में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। वहीं डिहाइड्रेशन में यह खतरा ज्यादा बढ़ सकता है।

ऐसे रखें ध्यान

प्रेग्नेंसी में डाइट के साथ हाइड्रेशन का ध्यान रखना जरूरी है। इसके लिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए। जिन महिलाओं को उल्टी होती है, उनको गर्मियों में खास ध्यान रखना चाहिए। आप नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और घर के बने हेल्दी ड्रिंक्स शरीर में फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट्स बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं। वहीं आप मौसमी फल भी खा सकती हैं, इससे शरीर हाइड्रेट रहता है। वहीं अगर आप प्रेग्नेंसी में दर्द या थकान महसूस हो, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
All the updates here:

अन्य न्यूज़