Smoking और Pollution से डैमेज हुए Lungs क्या खुद ठीक हो सकते हैं, समझें रिकवरी प्रक्रिया

धूम्रपान और प्रदूषण से क्षतिग्रस्त फेफड़ों में खुद को ठीक करने की प्राकृतिक क्षमता होती है, लेकिन इसके लिए इनके संपर्क से बचना जरूरी है। धूम्रपान छोड़ने और नियमित व्यायाम करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता सुधरती है। किसी भी फर्जी डिटॉक्स के बजाय संतुलित जीवनशैली अपनाएं और गंभीर श्वसन लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें।
एक सेहतमंद जीवन जीने के लिए सबसे जरुरी सांस। अच्छे से सांस लेने के लिए फेफड़ों का हेल्दी रहना काफी जरुरी है। आज के समय में बढ़ता हुआ प्रदूषण और धूम्रपान करना, फेफड़ों का सबसे बड़ा दुश्मन है। ज्यादातर लोगों के दिमाग में यह सवाल होता है कि स्मोकिंग और पॉल्यूशन के संपर्क में रहने से फेफड़े हमेशा के लिए डैमेज हो चुके हैं या फिर इसको सही किया जा सकता है।
हालांकि, इसका जवाब आपको काफी खुश कर सकता है। दरअसल, फेफड़ों की खुद को रिपेयर और सही करने की अद्भुत शक्ति होती है, लेकिन इसके लिए आपको एक्सपोजर को रोकना होता है।
वैसे यह लंग्स की रिकवरी पर निर्भर करता है कि आप कितने समय तक स्मोकिंग या पॉल्यूशन के संपर्क में रहे हैं और इसकी गंभीरता, आपकी उम्र और छिपी हुई हेल्थ क्या है या आपके फेफड़ों में स्ट्रक्चरल डैमेज हुई है या नहीं।
क्या है लंग्स की रिकवरी का पैंतरा?
असल में हर सिगरेट, सेकंड हैंड स्मोक या प्रदूषित हवा में संपर्क आने से रेस्पिरेटरी सिस्टम में खतरनाक और क्षति पहुंचाने वाले पार्टिकल्स पहुंच जाते हैं। यह स्मोकिंग सीओपीडी का मुख्य कारण है और धीरे-धीरे फेफड़ों की क्षमता को खत्म कर देती है। अगर आप काफी समय तक पॉल्यूशन के महीन दूषित पदार्थों के संपर्क में रहने से भी रेस्पिरेटरी और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज होती है। स्पोकिंग करने वाले व्यक्ति के लिए इसे छोड़ना एकमात्र और सबसे जरुरी कदम है, जो आपके लंग के बचे हुए फंक्शन को बचा सकते हैं।
स्मोकिंग छोड़ने के बाद क्या होता है?
जब आप स्मोकिंग बंद कर देते हैं, तो खून के अंदर कार्बन मोनोऑक्साइड लेवल कम होने लगते हैं और धीरे-धीरे फेफड़े बलगम व दूषित पदार्थों को बेहतर तरीके से साफ करने लगते हैं। वहीं, कुछ हफ्तों और महीनों के बाद खांसी, सांस के साथ सीटी की आवाज आना, सांस फूलने जैसे लक्षण घटने लगते हैं और लंग फंक्शन सुधर जाता है।
एयर पॉल्यूशन के बारे में क्या कहना है?
असल में पॉल्यूशन स्मोकिंग से अलग होता है, क्योंकि इसका सीधा संपर्क एन्वायरमेंटल से होता है और इससे बचना इतना आसान नहीं है। प्रदूषण के कारण सांस की नली को नुकसान पहुंच सकती है और लॉन्ग टर्म रेस्पिरेटरी समस्या विकसित होती है।
प्रदूषण का संपर्क लंबे समय तक रहने से कई हेल्दी समस्याओं का खतरा होचा है। ऐसे में कई व्यक्ति काफी सालों से दूषित हवा के बीच रह रहा है, तो बाहर की हवा की क्वालिटी बहुत ज्यादा खराब होने के दौरान घर से बाहर कम जाना चाहिए। घर के अंदर प्रदूषण को कम करें, पर्याप्त वेंटिलेशन और फिल्ट्रेशन करना जरुरी है। जो लोग स्मोकिंग करते हैं, उन लोगों को खासतौर से पॉल्यूशन से नुकसान पहुंचने का खतरा अधिक रहता है।
क्या एक्सरसाइज करने से फायदा मिलता है?
अगर लंग के टिश्यू नष्ट हो चुके हैं, तो एक्सरसाइज करके दोबारा नहीं बनाया जा सकता है,लेकिन यह संपूर्ण रेस्पिरेटरी फिटनेस को सुधार जरुर करता है। नियमित फिजिकल एक्टिविटी से शरीर द्वारा इस्तेमाल होने वाली मसल्स मजबूत बनती है, कार्डियोवैस्कुलर प्रभावशाली बढ़ती है और व्यक्ति को उपलब्ध ऑक्सीजन को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने में मदद मिलती है।
जिन लोगों को क्रॉनिक रेस्पिरेटरी डिजीज है, उन्हें सही गाइडेंस में एक्सरसाइज और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन करने से एक्सरसाइज कैपासिटी और लाइफ क्वालिटी बढ़ाने में मदद मिलता है।
लंग डिटॉक्स के दावों से सावधान
अक्सर आपने सुना होगा कि कोई चाय, सप्लीमेंट, तेल या क्विक डिटॉक्स ट्रीटमेंट जादुई तरीकों से सालों से हो रही स्मोकिंग या पॉल्यूशन को खत्म नहीं करता है। बलगम और बाहरी तत्वों को साफ करने के लिए फेफड़ों की प्राकृतिक क्षमता होती है। सबसे प्रभावी तरीका संपर्क के सोर्स को हटाना है, इसलिए फिजिकल एक्टिविटी करें, बैलेंस्ड डाइट लें और रेस्पिरेटरी डिजीज को मैनेज करें।
डॉक्टर को कब दिखाएं?
अगर आप काफी समय से प्रदूषण में रहते हैं और स्मोकिंग करते हैं, तो आपको गंभीर लंग डिजीज हो सकती है। लगातार खांसते रहना, बेवजह सांस फूलना, सांस के साथ आवाज आना, बार-बार चेस्ट इंफेक्शन होना, खांसी में खून आना, सीने में दिक्कत होना या एक्सरसाइज करने की क्षमता का कम होना जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना है।
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