उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में आतंकवादी हमला, दो सुरक्षा कर्मियों की मौत, एक घायल

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 20, 2021   09:14
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उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में आतंकवादी हमला, दो सुरक्षा कर्मियों की मौत, एक घायल

स्थानीय पुलिस ने बताया कि घटना खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के टैंक जिले में गोमल थाना क्षेत्र में हुई। उन्होंने बताया कि मृतक सिपाहियों की पहचान खालिद और अयाज के तौर पर हुई है। वहीं सिपाही मोहम्मद रमजान घायल हो गया है।

पेशावर। उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में मंगलवार देर रात मोटरसाइकिल सवार कुछ आतंकवादियों ने ‘सिक्योरिटी फोर्स रोड प्रोटेक्शन’ दल पर गोलियां चला दी, जिसमें कम से कम दो सुरक्षाकर्मी मारे गए और एक अन्य घायल हो गया। स्थानीय पुलिस ने बताया कि घटना खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के टैंक जिले में गोमल थाना क्षेत्र में हुई। 

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उन्होंने बताया कि मृतक सिपाहियों की पहचान खालिद और अयाज के तौर पर हुई है। वहीं सिपाही मोहम्मद रमजान घायल हो गया है। पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों ने घटनास्थल पर पहुंच, पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है और आतंकवादियों की तलाश शुरू कर दी है। अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।





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पाकिस्तान को सरकार प्रायोजित सीमापार आतंकवाद पर लगानी चाहिए रोक: भारत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 2, 2021   20:07
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पाकिस्तान को सरकार प्रायोजित सीमापार आतंकवाद पर लगानी चाहिए रोक: भारत

जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव पवनकुमार बधे ने कहा, ‘खराब आर्थिक स्थिति वाला देश पाकिस्तान को एक अच्छी सलाह दी जाती है कि वह परिषद और उसके तंत्र का समय बर्बाद करना बंद करे, सरकार प्रायोजित सीमापार आतंकवाद पर रोक लगाये और मानव अधिकारों का संस्थागत उल्लंघन रोके।’

जिनेवा। भारत ने मंगलवार को कहा कि खराब आर्थिक स्थिति का सामना कर रहे पाकिस्तान को सरकार प्रायोजित सीमापार आतंकवाद पर रोक लगानी चाहिए और अपने अल्पसंख्यक और अन्य समुदायों के मानवाधिकारों का संस्थागत उल्लंघन बंद करना चाहिए। मानवाधिकार परिषद के 46वें सत्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधि के एक बयान की प्रतिक्रिया में एजेंडा आइटम 2 के तहत अपने उत्तर के अधिकार का उपयोग करते हुए भारत ने पाकिस्तान को नयी दिल्ली के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार के लिए मंच का दुरुपयोग करने के लिए आड़े हाथ लिया। 

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जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव पवनकुमार बधे ने कहा, ‘‘खराब आर्थिक स्थिति वाला देश पाकिस्तान को एक अच्छी सलाह दी जाती है कि वह परिषद और उसके तंत्र का समय बर्बाद करना बंद करे, सरकार प्रायोजित सीमापार आतंकवाद पर रोक लगाये और मानव अधिकारों का संस्थागत उल्लंघन रोके।’’ बधे ने कहा, ‘‘इस परिषद के सदस्यों को अच्छी तरह से पता है कि पाकिस्तान ने खूंखार और सूचीबद्ध आतंकवादियों को सरकारी धन से पेंशन प्रदान की है और उसके यहां संयुक्त राष्ट्र द्वारा सूचीबद्ध आतंकवादियों की सबसे बड़ी संख्या है।’’

भारतीय राजनयिक ने उल्लेख किया कि पाकिस्तानी नेताओं ने इस तथ्य को स्वीकार किया है कि ‘‘वह आतंकवादी बनाने का अड्डा बन गया है।’’ भारतीय राजनयिक ने कहा, पाकिस्तान ने इस बात को नजरअंदाज किया है कि आतंकवाद मानवाधिकारों के हनन का सबसे खराब रूप है और आतंकवाद के समर्थक मानवाधिकारों का सबसे बड़े उल्लंघनकर्ता हैं।’’ बधे ने कहा कि परिषद को पाकिस्तान से पूछना चाहिए कि उसके अल्पसंख्यक समुदायों जैसे ईसाई, हिंदू और सिखों की संख्या आजादी के बाद से क्यों कम हो गई है तथा उन्हें और अन्य समुदायों जैसे अहमदिया, शिया, पश्तून, सिंधी और बलूच को ईश निंदा के कठोर कानून, प्रणालीगत उत्पीड़न, ज़बरदस्त दुर्व्यवहार और जबरन धर्मांतरण का सामना क्यों करना पड़ता है। 

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राजनयिक ने कहा, ‘‘व्यवस्था के खिलाफ बोलने वालों को पाकिस्तान में लापता होने, न्यायेत्तर हत्याएं और मनमाने तरीके से हिरासत का सामना करना पड़ता है तथा इस सब राज्य की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा दंड के भय के बिना अंजाम दिया जाता है।’’ भारत ने आर्गेनाइजेशन आफ इस्लामिक कान्फ्रेंस के जम्मू कश्मीर पर बयान को भी खारिज किया और कहा उसे इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। भारतीय राजनयिक ने कहा कि हम ओआईसी के बयान में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के संदर्भ को खारिजकरते हैं। जम्मू कश्मीर से संबंधित मामलों पर टिप्पणी करने का उसे कोई अधिकार नहीं है जो कि भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।





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म्यांमार: तख्तापलट के खिलाफ फिर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 2, 2021   18:24
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म्यांमार: तख्तापलट के खिलाफ फिर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े

म्यांमार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े है।संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि उसका मानना है कि रविवार को सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 18 लोग मारे गए थे। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को इस संकट पर चर्चा के लिए बैठक की।

यांगून। म्यांमार में पिछले महीने हुए सैन्य तख्तापलट के खिलाफ मंगलवार को प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस ने एक बार फिर आंसू गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां चलायीं। प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई के बाद फिर से एकत्रित हुए। म्यांमा के प्राधिकारियों ने हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि उसका मानना है कि रविवार को सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 18 लोग मारे गए थे। दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के विदेश मंत्रियों ने मंगलवार को इस संकट पर चर्चा के लिए बैठक की।

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कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारियों का बड़ी संख्या में सड़कों पर जमा होना जारी है। प्रदर्शनकारी उन्हें तितर-बितर करने के प्रयासों का अधिक कड़ाई से विरोध करने लगे हैं। म्यांमा के सबसे बड़े शहर यांगून में सैकड़ों प्रदर्शनकारी जमा हुए जिसमें से कई ने निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले हेल्मेट पहने हुए थे। वहां एक दिन पहले पुलिस ने कई बार आंसू गैस के गोले दागे थे। उन्होंने बैरिकेड बनाने के लिए बांस और मलबे का इस्तेमाल किया और नारे लगाए। पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले छोड़े जाने पर प्रदर्शनकारी भाग जाते थे लेकिन जल्द ही अपने बैरिकेड पर एकत्रित हो जाते थे। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में उत्तरी यांगून के इंसेन इलाके में इसी तरह के अराजक दृश्य दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने दक्षिणपूर्वी म्यांमा के एक छोटे शहर दावी की सड़कों पर मार्च किया,इस दौरान वे झंडे और बैनर लिये हुए थे। प्रदर्शनकारियों के एक समूह को सुरक्षा बलों द्वारा निशाना बनाया गया क्योंकि यह समूह रविवार की कार्रवाई में मारे गए एक व्यक्ति के घर पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एक संकरी गली में घुस रहा था। एक अन्य समूह पर शहर के मध्य में मुख्य सड़क पर हमला किया गया।

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संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के अनुसार यांगून और दावी उन शहरों में हैं जहां सुरक्षा बलों ने रविवार को कथित रूप से भारी मात्रा में गोलाबारी की। ऐसी सूचना है कि उन्होंने मंगलवार को भी गोलीबारी की लेकिन तुरंत इसकी पुष्टि नहीं की जा सकी। संयुक्त राष्ट्र की म्यांमा पर विशेष दूत क्रिस्टीन श्रैनर बर्गनर ने सीएनएन से एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैं म्यांमा के लोगों से इस जाल में न पड़ने की अपील करता हूं, इसलिए वे शांतिपूर्ण रहें।’’ उन्होंने साथ ही यह स्वीकार किया कि उनके लिए प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए अपील करना आसान है। उन्होंने प्राधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे सड़कों पर लोगों को और भड़काने के लिए हिरासत में लोगों की स्थितियों के बारे में अफवाहें फैला रहे हैं। म्यांमा में एक फरवरी को सेना ने तख्तापलट करके देश की बागडोर अपने हाथ में ले ली।





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ग्रे सूची से खुद को निकालेगा पाकिस्तान, क्या FATF की तीनों बिंदुओं को कर सकेगा पूरा?

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 2, 2021   17:39
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ग्रे सूची से खुद को निकालेगा पाकिस्तान, क्या FATF की तीनों बिंदुओं को कर सकेगा पूरा?

पाकिस्तान को तीन एफएटीएफ मापदंडों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त विधेयक की आवश्यकता होगी।रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने एफएटीएफ की अनिवार्यताओं को पूरा करने के लिए पिछले एक साल से अधिक समय में करीब तीन दर्जन कानूनों में बदलाव किया है, ऐसे में अतिरिक्त विधेयक लाने में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर धन शोधन एवं आतंकवादियों के वित्त पोषण पर नजर रखने वाले वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की 27 बिंदुओं वाली कार्य योजना के तीन बचे हुए मापदंडों को जून की नई समयसीमा समाप्त होने से पहले पूरा करने के लिए एक और विधेयक की आवश्यकता होगी। एक मीडिया रिपोर्ट में मंगलवार को यह बात कही गई। एफएटीएफ ने पाकिस्तान को जून 2018 में ग्रे सूची में डाल दिया था और उससे 2019 के अंत तक धनधोशन एवं आतंकवादियों को वित्त पोषण रोकने के लिए कार्य योजना लागू करने को कहा था, लेकिन कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण इस समय सीमा को बढ़ा दिया गया था। एफएटीएफ ने पिछले महीने नई समय सीमा तय की थी। पाकिस्तान धनशोधन एवं आतंकवाद को वित्त पोषण रोधी एफएटीएफ के नियमों का पालन नहीं करने वाले देशों की सूची में डाले जाने से बचने के लिए हालिया कुछ महीनों से काफी कोशिश कर रहा है। यदि पाकिस्तान को इस सूची में डाल दिया जाता है, तो पहले ही कमजोर उसकी अर्थव्यवस्था को और नुकसान होने की आशंका है। ‘डॉन’ समाचार पत्र ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि पाकिस्तान सरकार को बची हुई चिंताओं से निपटने के लिए विधेयक बनाने और अन्य कदमों में प्रगति को लेकर एफएटीएफ को एक महीने के भीतर अद्यतन रिपोर्ट भेजनी होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने एफएटीएफ की अनिवार्यताओं को पूरा करने के लिए पिछले एक साल से अधिक समय में करीब तीन दर्जन कानूनों में बदलाव किया है, ऐसे में अतिरिक्त विधेयक लाने में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए।

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पाकिस्तान के वित्त मंत्री अब्दुल हफीज शेख ने धनशोधन रोधी राष्ट्रीय कार्यकारी समिति (एनईसी) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए एफएटीएफ समन्वय समिति के अध्यक्ष और उद्योग एवं उत्पादन मंत्री हम्माद अजहर और वित्तीय निगरानी इकाई (एमएमयू) से संघीय सरकार की एजेंसियों एवं सशस्त्र बलों के साथ विचार-विमर्श करके अतिरिक्त विधेयक के लिए तत्काल समय सीमा तय करने को कहा। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसा देखा गया है कि पाकिस्तान ने पिछले दो साल में काफी प्रगति की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी तारीफ की है, लेकिन बार-बार अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं हो पाने और समय सीमा के भीतर काम नहीं हो पाने के कारण गलत संदेश जाता है। एनईसी को सूचित किया गया कि पाकिस्तान को एफएटीएफ को 30 दिन के भीतर बताना होगा कि वह एफएटीएफ द्वारा रेखांकित की गई अपनी कमियों को किस समय सीमा में पूरा करेगा और उसकी आगे की क्या योजना है।

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रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को एक अतिरिक्त विधेयक बनाना होगा, जिनमें मौजूदा ढांचे की उन कुछ कमजोरियों को दूर किया जाए, जो आतंकवादी संगठनों के लिए काम कर रहे लोगों को पकड़ने या उन पर प्रतिबंध लगाने समेत उनके खिलाफ कदम उठाने और उन पर मुकदमा चलाने की प्राधिकारियों की शक्तियों को सीमित करती हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान को तीन शेष बिंदुओं पर काम करना हैं। उसे यह दिखाना होगा कि प्रतिबंधित व्यक्तियों एवं संगठनों के लिए काम करने वाले लोगों एवं संगठनों को निशाना बनाकर आतंकवाद के वित्तपोषण संबंधी जांच की गईं और अभियोग चलाए गए। इसके अलावा पाकिस्तान को यह दिखाना होगा कि इन अभियोगों के कारण प्रभावशाली और पर्याप्त प्रतिबंध लगाए गए। पाकिस्तान को यह भी दिखाना होगा कि उसने सभी प्रतिबंधित आतंवादियों के खिलाफ वित्तीय प्रतिबंधों का प्रभावशाली क्रियान्वयन किया। सूत्रों ने बताया कि बैठक में बताया गया कि तीन में से एक बिंदू पर काफी काम कर लिया गया है,लेकिन जिन दो बिंदुओं को दिखाने के लिए अतिरिक्त विधेयक की आवश्यकता है, उन क्षेत्रों में लक्ष्य हासिल करने में समय लगेगा।





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