व्हाट्सएप मैसेज पर अब पाकिस्तान के पीएम ने कहा, बीजेपी ने बालाकोट एयरस्ट्राइक का चुनावों में उठाया फायदा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 19, 2021   11:34
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व्हाट्सएप मैसेज पर अब पाकिस्तान के पीएम ने कहा, बीजेपी ने बालाकोट एयरस्ट्राइक का चुनावों में उठाया फायदा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अर्णब को एयरस्ट्राइक की जानकारी की खबरों पर आक्रोश जताया।खबरों के अनुसार इन कथित मैसेज का आदान-प्रदान एयरस्ट्राइक के तीन दिन पहले हुआ। इस बातचीत से यह संकेत मिलता है कि गोस्वामी को एयरस्ट्राइक के बारे में पहले से जानकारी थी।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक भारतीय टीवी एंकर और मीडिया उद्योग के एक पूर्व कार्यकारी के बीच कथित व्हाट्सएप मैसेज के जरिये हुई बातचीत को लेकर मीडिया में आयी खबरों पर सोमवार को आक्रोश जताया। इन खबरों के अनुसार बातचीत में यह कहा गया है कि 2019 में पाकिस्तान में भारत का एयरस्ट्राइक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनाव में जीत की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए की गई पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने चर्चित भारतीय टीवी एंकर अर्णब गोस्वामी और टीवी रेटिंग कंपनी के पूर्व प्रमुख पार्थो दासगुप्ता के बीच व्हाट्सऐप पर कथित बातचीत के बारे में भारतीय मीडिया में आयी खबरों को लेकर ट्विटर पर प्रतिक्रिया दी। खबरों के अनुसार इन कथित मैसेज का आदान-प्रदान एयरस्ट्राइक के तीन दिन पहले हुआ। इस बातचीत से यह संकेत मिलता है कि गोस्वामी को एयरस्ट्राइक के बारे में पहले से जानकारी थी और इसे लोकसभा चुनाव में मोदी की फिर से जीत की संभावना बढ़ाने के इरादे से किया गया था। गोस्वामी रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक हैं और वह मोदी एवं उनकी राष्ट्रवादी नीतियों का समर्थन करने के लिए जाने जाते हैं।

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कथित व्हाट्सएप चैट के अनुसार 26 फरवरी 2019 के एयरस्ट्राइक से तीन दिन पहले गोस्वामी ने दासगुप्ता से कहा, ‘‘कुछ बड़ा होगा और सरकार पाकिस्तान पर कुछ इस तरह से हमला करने को लेकर आश्वस्त है जो लोगों को गौरवान्वित करेगा।’’ इस पर दासगुप्ता, गोस्वामी से कहते हैं कि पाकिस्तान पर हमला मोदी को आगामी चुनाव में ‘‘बहुमत’’ दिलाएगा। इसके कुछ महीने बाद मई 2019 के चुनाव में मोदी को प्रचंडजीत मिली और उनकी पार्टी बहुमत के साथ संसद पहुंची। यह कथित बातचीत मुंबई पुलिस के उस पूरक आरोपपत्र का हिस्सा है जिसे टीवी रेटिंग में कथित हेरफेर के एक अलग मामले में दायर किया गया है। इस बारे में सोमवार को न तो दासगुप्ता और न ही गोस्वामी ने कोई टिप्पणी की। हालांकि गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार उनके खिलाफ साजिश रच रही है। पाकिस्तान पर फरवरी 2019 की यह एयरस्ट्राइक जम्मू कश्मीर में उसी महीने आतंकवादियों द्वारा किए गए आत्मघाती बम हमले के जवाब में की गयीथी। इस हमले में 40 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। भारत ने इन हमलों के लिए पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद पर आरोप लगाया था और उसने हमले की जिम्मेदारी भी ली थी। पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद के नेताओं को गिरफ्तार भी किया लेकिन मोदी नीत सरकार ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकवादी ठिकाने को निशाना बनाने की बात कहते हुए वहां रात में एयरस्ट्राइक की।

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पाकिस्तान ने कहा कि भारतीय युद्धक विमानों ने जंगल में बम गिराए जिससे कोई हताहत नहीं हुआ। इसके जवाब में पाकिस्तान ने कश्मीर में भारत के एक विमान को मार गिराया और उसके पायलट को पकड़ लिया जिसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए बाद में रिहा कर दिया गया। खान ने 2019 में संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण में आरोप लगाया था कि मोदी ने ‘‘चुनाव में फायदे के लिए’’ एयरस्ट्राइक का इस्तेमाल किया। खान ने कई ट्वीट किया, उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक समुदाय को भारत के इस विवेकहीन, सैन्य एजेंडे को रोकना होगा, अन्यथा मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इस पूरे इलाके को एक ऐसे विवाद में धकेल देगी जिस पर नियंत्रण पाना असंभव हो जाएगा।’’ पाक प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ हाल ही में भारतीय पत्रकार की बातचीत को लेकर खुलासों ने मोदी के नेतृत्व वाली सरकार और भारतीय मीडिया के बीच नापाक गठजोड़ को उजागर कर दिया है जिसका इस्तेमाल चुनावी फायदे और पूरे क्षेत्र को अस्थिर करने के इरादे से किया गया।’’ इस कथित बातचीत की भारत में विपक्ष ने भी आलोचना की है और केंद्र सरकार से इस पर जवाब मांगा है। विपक्षी कांग्रेस ने कहा कि दोनों व्यक्तियों (अर्णब और दासगुप्ता) के बीच हुई बातचीत ने भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।

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सरकार (भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार) ने एक तथाकथित पत्रकार को राष्ट्रीय सुरक्षासे संबंधित जानकारी लीक कर देश के साथ धोखा किया है। पार्टी ने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा का तथाकथित पत्रकारों के साथ राष्ट्रविरोधी गठजोड़ देश की सैन्य कार्रवाइयों से संबंधित गोपनीय जानकारियां लीक कर देश की सैन्य शक्ति को कमजोर कर रहा है। ऐसा राष्ट्रविरोधी गठजोड़ देश की सैन्य शक्ति पर आक्रमण कर रहा है।’’ कांग्रेस नेता शशि थरूर ने रविवार को ट्वीट कर कहा, ‘‘सेना की रणनीति एक टीवी चैनल के व्यावसायिक हित को पूरा करने के लिए लीक की गई। इस बारे में मोदी सरकार द्वारा गंभीरता से जांच किए की जाने की जरूरत है।





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द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की जिम्मेदारी भारत की: इमरान खान

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 27, 2021   19:39
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द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के लिए अनुकूल वातावरण बनाने की जिम्मेदारी भारत की: इमरान खान

भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बृहस्पतिवार को संयुक्त रूप से घोषणा की थी कि वे नियंत्रण रेखा पर और अन्य सेक्टरों में संघर्ष विराम समझौते का कड़ाई से पालन करेंगे।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के साथ संघर्ष विराम समझौते का शनिवार को स्वागत किया और कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के लिए “अनुकूल वातावरण” बनाने की जिम्मेदारी नयी दिल्ली की है। भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बृहस्पतिवार को संयुक्त रूप से घोषणा की थी कि वे नियंत्रण रेखा पर और अन्य सेक्टरों में संघर्ष विराम समझौते का कड़ाई से पालन करेंगे। इसके बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए खान ने कहा कि पाकिस्तान, भारत के साथ “सभी लंबित मुद्दों” का समाधान बातचीत के जरिये करने को तैयार है। 

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उन्होंने ट्वीट किया, “नियंत्रण रेखा पर फिर से संघर्ष विराम स्थापित करने का मैं स्वागत करता हूं। इसमें आगे की प्रगति के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की जिम्मेदारी भारत की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीरी लोगों द्वारा अपने निर्णय खुद करने की उनकी बहुप्रतीक्षित मांग और अधिकार के लिए भारत को आवश्यक कदम उठाने चाहिए।” खान ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, “हम हमेशा शांति चाहते हैं और सभी लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिये निकालने को तैयार हैं।” पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायु सेना द्वारा 2019 में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविरों पर हवाई हमला किया गया था। इस हमले की दूसरी सालगिरह के अवसर पर सिलसिलेवार ट्वीट कर खान ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा से शांति का पक्षधर रहा है और सभी लंबित मुद्दों का समाधान बातचीत के जरिये करना चाहता है। 

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उन्होंने कहा कि पकड़े गए भारतीय पायलट को वापस कर पाकिस्तान ने दुनिया को अपना “जिम्मेदाराना बर्ताव” दिखाया है। कश्मीर के मुद्दे पर खान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार कश्मीरी लोगों द्वारा अपने निर्णय खुद करने की उनकी बहुप्रतीक्षित मांग और अधिकार के लिए भारत को आवश्यक कदम उठाने चाहिए। गौरतलब है कि भारत पाकिस्तान से कह चुका है कि उसके अंदरूनी मामलों में टिप्पणी करने का पड़ोसी देश को कोई अधिकार नहीं है। इसके साथ ही भारत ने कहा है कि जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख संघ शासित क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा थे और रहेंगे।





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म्यांमा में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करना सभी हितधारकों की प्राथमिकता होनी चाहिए: भारत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 27, 2021   14:55
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म्यांमा में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करना सभी हितधारकों की प्राथमिकता होनी चाहिए: भारत

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने म्यांमा की स्थिति पर महासभा की अनौपचारिक बैठक में शुक्रवार को उक्त टिप्पणी की। म्यांमा में इस महीने के शुरू में सेना ने तख्तापलट कर दिया था।

संयुक्त राष्ट्र। भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में कहा कि म्यांमा में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करना सभी हितधारकों की प्राथमिकता होनी चाहिए और हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा किया जाना चाहिए। साथ में उसने दक्षिण पूर्व एशियाई देश के नेतृत्व से शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से अपने मतभेदों को हल करने के लिए मिलजुलकर काम करने का आह्वान किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने म्यांमा की स्थिति पर महासभा की अनौपचारिक बैठक में शुक्रवार को उक्त टिप्पणी की। म्यांमा में इस महीने के शुरू में सेना ने तख्तापलट कर दिया था। 

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उन्होंने कहा, “भारत म्यांमा के साथ जमीन और समुद्री सीमा साझा करता है और उसका शांति और स्थिरता बनाए रखने में सीधा हित है। इसलिए म्यांमा के हालिया घटनाक्रम पर भारत करीब से निगाह रख रहा है। हम इस बात पर चिंतित हैं कि लोकतंत्र की दिशा में म्यांमा में पिछले दशकों में हासिल की गई बढ़त को कमतर नहीं किया जाना चाहिए।“ तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत का मानना है कि कानून का शासन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बरकरार रखा जाना चाहिए, हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाना चाहिए तथा शांति कायम रहनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम म्यांमा के नेतृत्व से आह्वान करते हैं कि वे अपने मतभेदों को शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से सुलझाने के लिए मिलकर काम करें। एक फरवरी को सेना ने म्यांमा की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर दिया था और सत्ता अपने हाथ में ले ली थी। इसी के साथ स्टेट काउंसलर आंग सांग सू ची, राष्ट्रपति यू विन मिन्त और अन्य शीर्ष राजनीतिक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। तिरुमूर्ति ने कहा, लोकतांत्रिक व्यवस्था को बहाल करना म्यांमा में सभी हितधारकों की प्राथमिकता होनी चाहिए। 

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उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस महत्वपूर्ण मोड़ पर म्यांमा के लोगों को अपना रचनात्मक समर्थन देना चाहिए। इस बीच संयुक्त राष्ट्र में म्यांमा के राजदूत ने देश की सेना की अवहेलना करते हुए शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा से सैन्य तख्तापलट को खत्म करने में मदद के लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की गुहार लगाई। के एम तुन बेदखल कर दी गई असैन्य सरकार के प्रति वफादार रहे। उन्होंने कहा कि वह एनएलडी नीत असैन्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। तुन ने तख्तापलट की निंदा की और सभी सदस्य राष्ट्रों और संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वे सैन्य तख्तापलट की निंदा करें और सैन्य शासन को किसी भी माध्यम से मान्यता न दें।

न्होंने तीन उंगलियों से सलाम किया जो सैन्य शासन के खिलाफ म्यांमा में प्रदर्शनकारी कर रहे है और कहा, “ हम उस सरकार के लिए लड़ाई जारी रखेंगे जो जनता की, जनता द्वारा और जनता के लिए हो।“ म्यांमा पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव की विशेष दूत क्रिस्टीन एस बर्गनर ने महासभा से सामूहिक रूप से म्यांमा में लोकतंत्र के समर्थन में एक स्पष्ट संकेत भेजने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “इस समय, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को किनारे कर दिया गया है और स्टेट काउंसेलर तथा संघीय गणराज्य के राष्ट्रपति सहित निर्वाचित नेताओं को हिरासत में रखा गया है।“ 

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म्यांमा के रखाइन राज्य में विस्थापित लोगों के मुद्दे पर अपने संबोधन में तिरूमूर्ति ने कहा कि विस्थापित लोगों की देश वापसी के मुद्दे को हल करने में भारत का सबसे ज्यादा हित है, क्योंकि वह एकमात्र ऐसा देश है जिसकी बांग्लादेश और म्यांमा, दोनों के साथ एक लंबी सरहद है।





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सीरिया हवाई हमले पर सामने आया व्हाइट हाउस का बयान, अमेरिकी कर्मियों को लेकर कही यह अहम बात

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  फरवरी 27, 2021   14:46
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सीरिया हवाई हमले पर सामने आया व्हाइट हाउस का बयान, अमेरिकी कर्मियों को लेकर कही यह अहम बात

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा, ‘‘ राष्ट्रपति स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि वह अमेरिकियों के हितों की रक्षा करने के लिए कदम उठाने जा रहे हैं और जब खतरा होगा तो वह सही समय पर अपने हिसाब से कदम उठाएंगे।’’

वाशिंगटन। व्हाइट हाउस ने कहा है कि सीरिया में हवाई हमले कर राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अमेरिकी कर्मियों एवं ठिकानों की रक्षा की तथा ‘आने वाले हफ्तों में’ सभांवित और हमलों के खतरों को टाला है। उल्लेखनीय है कि बृहस्पतिवार को अमेरिका ने हवाई हमले में ताकतवर ईरान समर्थित इराकी सैन्य समूहों के सीरिया स्थित ठिकानों को निशाना बनाया जिसमें एक लड़ाके के मारे जाने एवं कई के घायल होने की खबर है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ राष्ट्रपति स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि वह अमेरिकियों के हितों की रक्षा करने के लिए कदम उठाने जा रहे हैं और जब खतरा होगा तो वह सही समय पर अपने हिसाब से कदम उठाएंगे।’’ 

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उन्होंने कहा, ‘‘वह (बाइडेन) इन कदमों को विचारशील तरीके से उठाएंगे और इसका उद्देश्य सीरिया और इराक के बीच तनाव कम करना है।’’ इस हवाई हमले के, ईरान के साथ दोबारा शुरू होने वाली वार्ता पर पड़ने वाले असर के बारे में पूछे जाने पर साकी ने कहा कि इस समय स्थिति यह है कि अमेरिका इन कूटनीतिक वार्ताओं के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि इस समय यूरोप ने आमंत्रण दिया है और ‘हम जवाब का इंतजार कर रहे हैं।’’ सीरिया पर हवाई हमले की वैधानिकता के सवाल पर साकी ने कहा कि यह घरेलू कानून का मामला है जिसके तहत राष्ट्रपति अमेरिकी कर्मियों की रक्षा के लिए ऐसा कदम उठा सकते हैं।





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