24 घंटे 32 स्ट्राइक, सऊदी और हूतियों में भयानक युद्ध छिड़ा

अगर सऊदी ने हमला बढ़ाया तो क्या होती लाल सागर को युद्ध का अगला मोर्चा बना देंगे? एक तरफ सऊदी, दूसरी तरफ होती और बीच में यमन।
हूतियों ने सऊदी के तेल ठिकानों पर मिसाइलें दागी। सऊदी ने जवाब में यमन के अंदर बम बरसाए। लेकिन अब सवाल सिर्फ हमले का नहीं है। सवाल है अगली मिसाइल का। क्योंकि अगर होती फिर सऊदी के तेल ठिकानों पर हमले करते हैं तो क्या रियाद सिर्फ जवाब देगा? या इस बार हूती के ठिकानों को जड़ से मिटाने का ऑपरेशन शुरू होगा? अगर सऊदी ने हमला बढ़ाया तो क्या होती लाल सागर को युद्ध का अगला मोर्चा बना देंगे? एक तरफ सऊदी, दूसरी तरफ होती और बीच में यमन। लेकिन इसके पीछे खड़ा है पूरा मिडिल ईस्ट, ईरान का प्रभाव। लाल सागर का रास्ता बाब अल मनदेव और दुनिया की तेल सप्लाई। तो क्या यह सिर्फ बदले की 32 एयर स्ट्राइक हैं? या फिर यमन में एक ऐसा युद्ध शुरू होने वाला है जिसकी आग सऊदी से निकल कर पूरे मिडिल ईस्ट और दुनिया के तेल बाजार तक पहुंच सकती है।
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यमन में आसमान से आग बरस रही है। सऊदी अरब ने हतियों के हमले का ऐसा जवाब दिया है कि अब पूरा मिडिल ईस्ट एक और बड़े युद्ध की तरफ बढ़ता दिखाई दे रहा है। दावा है कि सिर्फ 24 घंटे में यमन के चार प्रांतों में 32 एयर स्ट्राइक मारिव, अल्जोफ, ताइफ़, होदईदा एक के बाद एक ठिकाने निशाने पर सवाल सीधा है। क्या सऊदी ने अब होतियों के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया है? क्या होतियों के एक हमले ने सऊदी की युद्ध रणनीति ही बदल दी है? और सबसे बड़ा सवाल, अगर होती अगला हमला और बड़ा करते हैं, तो सऊदी का अगला जवाब कितना खतरनाक होगा?
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हूती ने सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से के चार शहरों अब, खामिस मुशैत, जिजान और नज़रान को निशाना बनाया। मिसाइलें दागी गई। ड्रोन भेजे गए। ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमला हुआ। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक 73 लोग घायल हुए। जबकि कुछ ऊर्जा प्रतिष्ठानों में आग लगने के बाद ऑपरेशन भी प्रभावित हुआ। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसे बेहद गंभीर और खतरनाक एस्केलेशन बताया है। लेकिन फिर आया सऊदी का पलटवार। होती मीडिया का दावा है कि सऊदी समर्थित बलों ने यमन के चार प्रांतों में 32 हवाई हमले किए। मारिब में हमले, अलजोफ में हमले, ताइज़ और होदेई तक हमले। यानी संदेश साफ है। अगर सऊदी पर हमला होगा तो जवाब यमन के अंदर तक जाएगा। क्योंकि इस बार हूतियों ने सिर्फ सैन्य ठिकानों पर हमला नहीं किया। निशाने पर तेल और ऊर्जा से जुड़ी अहम संरचनाएं भी थी और सऊदी अरब के लिए तेल सिर्फ कारोबार नहीं है। तेल उसकी आर्थिक ताकत है। उसकी रणनीतिक ताकत है और दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का भी बड़ा हिस्सा इसी से जुड़ा है। इसीलिए जब तेल प्रतिष्ठानों पर हमले होते हैं तो रियाद इसे सिर्फ एक सैन्य हमला नहीं मान सकता और यहीं से कहानी खतरनाक होती है क्योंकि होती सिर्फ यमन तक सीमित नहीं है। उनके पास मिसाइल हैं, ड्रोन हैं और सबसे अहम लाल सागर तक पहुंच है।
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