Pakistan Atrocities in PoJK: 90 नागरिकों की मौत, MEA बोला- खोखली चुनावी प्रक्रिया से नहीं छिपेगा सच

राष्ट्रीय राजधानी में हर दो हफ़्ते में होने वाली प्रेस ब्रीफ़िंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoK में यह तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह से दिखावा है। असल में वहां जनता विरोध-प्रदर्शन कर रही है और पाकिस्तानी सेना आम लोगों की बेरहमी से हत्या कर रही है। ऐसी खोखली कवायदें सच्चाई को छिपा नहीं सकतीं।
भारत ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए तथाकथित चुनावों को लेकर पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की और दुनिया भर से अपील की कि वे आम नागरिकों पर पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा किए जा रहे अत्याचारों पर ध्यान दें। राष्ट्रीय राजधानी में हर दो हफ़्ते में होने वाली प्रेस ब्रीफ़िंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoK में यह तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह से दिखावा है। असल में वहां जनता विरोध-प्रदर्शन कर रही है और पाकिस्तानी सेना आम लोगों की बेरहमी से हत्या कर रही है। ऐसी खोखली कवायदें सच्चाई को छिपा नहीं सकतीं।
इसे भी पढ़ें: मध्यस्थ ही संदिग्ध...अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान OUT, ट्रंप को सऊदी पर भरोसा
उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि जून के बाद से पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा आम नागरिकों को बिजली कटौती, डराने-धमकाने और दमन का शिकार बनाने के कारण कम से कम 90 नागरिकों की जान जा चुकी है; यह सब एक खोखली चुनावी प्रक्रिया को वैधता दिलाने की कोशिश में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस साल जून से, लगातार हो रही कार्रवाई में कम से कम 90 आम नागरिकों की जान गई है। पाकिस्तानी प्रशासन ने जनता की नाराज़गी का जवाब गोलियों, ब्लैकआउट, डराने-धमकाने और दमन से दिया है, और अब एक खोखली चुनावी प्रक्रिया के ज़रिए अपनी वैधता साबित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस्लामाबाद को जवाबदेह ठहराने की अपील की।
उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, और दुनिया को मानवाधिकारों पर पाकिस्तान के पाखंडपूर्ण उपदेशों के खोखलेपन को समझना चाहिए।
इसे भी पढ़ें: Pakistan-Iran Diplomacy: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच Islamabad बना मध्यस्थ, Ishaq Dar ने अरागची को भेजा न्योता
उनकी यह टिप्पणी PoJK में स्थानीय चुनाव के दौरान आम नागरिकों पर हुई बेरहम कार्रवाई के बीच आई है। रविवार को हुए चुनाव में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, लॉजिस्टिक्स की विफलता और लगातार विरोध-प्रदर्शन देखने को मिले, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लग गया और इसकी विश्वसनीयता पर नए सिरे से सवाल उठने लगे।
अन्य न्यूज़













