अमेरिका में एक आयोग ने सेना की सभी शाखाओं के लिये मानकीकृत वर्दी नीति की सिफारिश की

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अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा गठित एक आयोग ने सिफारिश की है कि अमेरिकी सेना की सभी शाखाओं को एक मानकीकृत वर्दी नीति अपनानी चाहिए, जो सैनिकों को पगड़ी पहनने, दाढ़ी रखने, हिजाब और टोपी पहनने जैसे अपने धार्मिक नियमों का पालन करने की अनुमति देती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन द्वारा गठित एक आयोग ने सिफारिश की है कि अमेरिकी सेना की सभी शाखाओं को एक मानकीकृत वर्दी नीति अपनानी चाहिए, जो सैनिकों को पगड़ी पहनने, दाढ़ी रखने, हिजाब और टोपी पहनने जैसे अपने धार्मिक नियमों का पालन करने की अनुमति देती है। एशियाई अमेरिकी, हवाई के मूल निवासी और प्रशांत द्वीप समूह में रहने वाले विभिन्न धार्मिक समुदायों के लोगों पर राष्ट्रपति के सलाहकार आयोग ने शुक्रवार को अपनी एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें 12 मई को स्वीकृत सिफारिशों का विवरण दिया गया है।

दरअसल, अमेरिकी सेना की 1981 में जारी वर्दी संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत सैनिकों के पगड़ी पहनने, दाढ़ी रखने, हिजाब और यहूदी पुरुषों द्वारा पहनी जाने वाली विशेष टोपी के पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अमेरिकी थल सेना और वायु सेना ने क्रमश: 2017 और 2020 में अपनी वर्दी नीतियों में बदलाव करते हुए सैनिकों को अपनी-अपनी धार्मिक आस्था की चीजें पहनने की अनुमति प्रदान कर दी थी।

राष्ट्रपति द्वारा गठित आयोग ने कहा, ‘‘अब, सैकड़ों सैनिक मौजूदा समय में अमेरिकी थल सेना और वायु सेना में अपनी धार्मिक आस्थाओं का पालन करते हुए नौकरी कर सकते हैं।’’ आयोग ने कहा, ‘‘लेकिन, अमेरिकी नौसेना ने सैनिकों को सीमित दायरे के तहत ही अपनी धार्मिक आस्था का पालन करने की अनुमति प्रदान की है। नतीजतन, उन्हें अपने देश की सेवा करने के लिए अपनी धार्मिक मान्यताओं का उल्लंघन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।’’ आयोग ने कहा कि सेना की विभिन्न शाखाओं में धार्मिक समायोजन केलिये प्रक्रिया और नीति में भिन्नता है।

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