यूक्रेन के इज़ीयुम शहर पर रूस के कब्जे के बाद लोगों के पास कुछ नहीं बचा

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स्थानीय निवासियों के पास कुछ नहीं बचा है। ऑलेक्ज़ेंडर लिसेंको ने कहा, ' हमारे पास कुछ नहीं है। हम लकड़ी जलाकर चाय के लिए पानी गर्म करते हैं और दलिया आदि बनाते हैं। मेरा हाथ देखिए। मैं 75 साल का हूं और इन महिला की उम्र मुझसे भी ज्यादा है। हम सर्दियों से डरे हुए हैं।'

पूर्वी यूक्रेन का शहर इज़ीयुम उन नगरों में शामिल था जिस पर रूस ने 24 ‍फरवरी को जंग के शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही कब्ज़ा कर लिया था। मार्च के अंत तक इज़ीयुम को अलग-थलग कर दिया गया था और यहां न कोई मोबाइल फोन था और न ही बिजली की व्यवस्था रह गई थी। शहर से ज्यादातर लोगों ने पलायन कर लिया था। रूस ने इसे अपना कमान केंद्र बना लिया था। करीब छह महीने बाद इस शहर को फिर से यूक्रेन ने अपने नियंत्रण में ले लिया। यूक्रेन ने 10 सितंबर को खारकीव क्षेत्र पर जवाबी हमले के तहत शहर पर कब्जा किया।

शहर की हालत बदतर है। स्थानीय निवासियों के पास कुछ नहीं बचा है। वे जलाने के लिए एक स्कूल से लकड़ियां इकट्ठी कर रहे हैं। ऑलेक्ज़ेंडर लिसेंको ने कहा, “ हमारे पास कुछ नहीं है। हम लकड़ी जलाकर चाय के लिए पानी गर्म करते हैं और दलिया आदि बनाते हैं। मेरा हाथ देखिए। मैं 75 साल का हूं और इन महिला की उम्र मुझसे भी ज्यादा है। हम सर्दियों से डरे हुए हैं।”

उन्होंने कहा, “ मेरे पोते इस स्कूल में जाते थे और मैं इसे लूट रहा हूं।” जब सात महीने पहले जंग शुरू हुई थी तो इज़ीयुम की आबादी तकरीबन 40 हजार थी लेकिन कुछ तो रूस ही भाग गए थे। शेष लोग तहखानों में या मोटी दीवारों के पीछे छुप गए थे। रूसी सैनिक उन्हें कुछ खाने के लिए दे दिया करते थे जो उन्हें मुश्किल से ही पूरा पड़ता था। शहर के लोग बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गए थे। उन्हें यह भी नहीं पता था कि उनका क्षेत्र अब यूक्रेन में है भी या नहीं। एक महिला ने पूछा कि क्या खारकीव अब भी यूक्रेन में है? नतालिया ज़द्रोवेत्स ने कहा, “ हम दुनिया से कट गए थे। हमें नहीं पता क्या हुआ है। हमें यह भी नहीं पता था कि आसपास की सड़कों पर क्या हो रहा है।

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