Bangladesh ने मारा यू-टर्न, भारत से मांग ली बड़ी मदद

भारत पहले से ही बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा सहारा बना हुआ है और दोनों देशों के बीच इंडिया बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन बनाई गई जो भारत के असम स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी से निकलकर पश्चिम बंगाल के रास्ते पर्वतीपुर डिपो तक जाती है करीब 131 किमी लंबी ये पाइप लाइन 2023 में शुरू हुई थी ताकि डीजल तेजी से और कम लागत में बांग्लादेश पहुंच सके।
एक तरफ बांग्लादेश भारत की खिलाफत कर रहा है। भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहा है। लेकिन सब कुछ करने के बाद भी बांग्लादेश भारत की मदद चाहता है। अभी कुछ दिन पहले बांग्लादेश की सरकार भारत पर नाराजगी जता रही थी। वजह बनी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की नई दिल्ली से हुई लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस। बांग्लादेश ने तब कहा था कि भारत ने हसीना को मंच देकर दोनों देशों के रिश्ते सुधारने की कोशिशों को नुकसान पहुंचाया। यहां तक कि बांग्लादेश ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान बताया और भारत से शेख हसीना को प्रत्यार्पित करने की मांग दोहराई। यह सब कुछ बांग्लादेश ने तीन दिन पहले किया और अब खबर है कि बांग्लादेश भारत से मदद चाहता है। मतलब जिस भारत पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उसी भारत के दरवाजे पर बांग्लादेश मदद मांगने पहुंच गया। वजह बनी ऊर्जा संकट।
बांग्लादेश में डीजल, गैस और बिजली की भारी कमी हो गई है। कई इलाकों में लोड शेडिंग हो रही है। बिजली उत्पादन प्रभावित है और ऐसे में बांग्लादेश ने भारत से कहा है कि उसे पहले से ज्यादा डीजल सप्लाई करें। यानी कि एक तरफ भारत की खिलाफत करो। भारत के खिलाफ बयानबाजी करो और दूसरी तरफ जब संकट पड़े तो भारत से मदद मांग लो। दरअसल भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के ऊर्जा और खनिज संसाधन मंत्री इकबाल हसन महमूद से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच बिजली और ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक के बाद खुद बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री ने माना कि गैस और डीजल की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है और इसलिए भारत से अतिरिक्त डीजल की मांग की गई। भारत पहले से ही बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा का एक बड़ा सहारा बना हुआ है और दोनों देशों के बीच इंडिया बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन बनाई गई जो भारत के असम स्थित नुमालीगढ़ रिफाइनरी से निकलकर पश्चिम बंगाल के रास्ते पर्वतीपुर डिपो तक जाती है करीब 131 किमी लंबी ये पाइप लाइन 2023 में शुरू हुई थी ताकि डीजल तेजी से और कम लागत में बांग्लादेश पहुंच सके। इसी पाइपलाइन के जरिए भारत हर साल करीब 1880 मीट्रिक टन डीजल बांग्लादेश को सप्लाई करता है और हाल ही में लगभग 5000 मीट्रिक टन डीजल की नई खेप भेजी गई।
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हर घंटे करीब 113 मेट्रिक टन डीजल पंप किया जा रहा है ताकि बांग्लादेश में बिजली उत्पादन परिवहन और खेती के लिए ईंधन की कमी ना हो और यह सब कुछ करने के बाद क्या हो रहा है शेख हसीना की सरकार गिरी मोहम्मद यूनुस आए उन्होंने भरभर के भारत की खिलाफत की तारिक रहमान आए और उसके बाद भी भारत बांग्लादेश के जो द्विपक्षीय रिश्ते हैं उनमें थोड़ी खटास देखी गई और हाल ही में जो प्रेस कॉन्फ्रेंस शेख हसीना ने दिल्ली से बैठकर की थी उसके बाद बांग्लादेश मीडिया में और बांग्लादेश की तरफ से भारत के खिलाफ बयानबाजी की गई और सोचिए इन सबके बावजूद बांग्लादेश ने अब अगले 4 महीनों में इसी पाइपलाइन के जरिए अतिरिक्त 500 मीट्रिक टन डीजल देने का अनुरोध भी किया है। इसके अलावा बांग्लादेश ने ऊर्जा क्षेत्र में करीब 25 अलग-अलग क्षेत्रों में भारत से सहयोग मांगा है। इसमें पावर ग्रिड टेक्नोलॉजी, स्मार्ट ग्रिड सिस्टम, बिजली क्षेत्र के कर्मचारियों की ट्रेनिंग और तकनीकी सहायता जैसी मांग शामिल है। यानी साफ है। मुश्किल की घड़ी में बांग्लादेश की सबसे बड़ी उम्मीद भारत है। लेकिन दूसरी तरफ राजनीतिक रिश्तों में तनाव भी लगातार बढ़ रहा है। ये सब कुछ बांग्लादेश की सरकार की तरफ से जब हो रहा था यानी कि एक तरफ बयानबाजी हो रही थी, एक तरफ मदद मांगी जा रही थी।
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उस बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस और उनके बेटे का एक बड़ा बयान भी बहुत चर्चा में था। सबसे पहले शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस की बात करते हैं। नई दिल्ली से हुई उनकी वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बांग्लादेश सरकार भड़क गई थी। ढाका ने आरोप लगाया था कि भारत ने हसीना को मंच देकर द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुंचाया। उसने यह भी कहा कि जुलाई 204 के आंदोलन में मारे गए लोगों का यह अपमान है। हालांकि भारत पहले साफ कर चुका है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन एक निजी मीडिया संस्था ने किया था और सरकार का इससे कोई लेना देना नहीं था। उधर प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेख हसीना ने भी बड़ा ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वह इस साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी। चाहे उन्हें जेल भेज दिया जाए या उनकी हत्या कर दी जाए। लेकिन वह वापस अपने देश जरूर जाएंगी।
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