चीन-रूस ने ईरान को दी घातक टेक्नोलॉजी, पलट गया पूरा युद्ध!

China Russia
AI Image
अभिनय आकाश । Mar 19 2026 7:22PM

ईरान के विदेश मंत्री ने किसी देश का नाम नहीं लिया लेकिन यह स्वीकार किया है कि रूस और चीन के साथ उनका सहयोग जारी है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या युद्ध के दौरान रूस और चीन से ईरान को पलटवार के लिए हथियार मिल रहा है या फिर रूस और चीन ने ईरान को अमेरिकी और इजरायली मिसाइलों को बचाने के लिए रक्षा प्रणालियां सप्लाई की है।

अमेरिका और इजराइल भले ही ईरान पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हो लेकिन ईरान के हमलों में इन्हें कितना भारी नुकसान हो रहा है उसने सबको चौंका दिया है। ईरान को यह ताकत कहीं और से नहीं बल्कि रूस और चीन से आ रही है। रूस और चीन ने ऐसा खेल किया है कि अमेरिका इजराइल के हमलों की तुलना में ईरान के हमले ज्यादा तबाही मचा रहे हैं। रूस और चीन कैसे ईरान के लिए चट्टान की तरह काम कर रहे हैं, इसका खुलासा खुद ईरान ने ही कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अराशी ने बहुत बड़ा बयान दिया है। एक मीडिया इंटरव्यू में अराशी ने कहा कि मैं दुनिया के सामने अपने मित्र देशों के साथ सहयोग की संपूर्ण जानकारी नहीं रख सकता। लेकिन मैं यह कह सकता हूं कि इन मित्र देशों के साथ हमारा पुराना सहयोग रहा है। यह साझेदारी आज भी कायम है और मैं कामना करता हूं कि ईरान से मित्र देशों का सहयोग भविष्य में जारी रहेगा। ईरान के विदेश मंत्री ने किसी देश का नाम नहीं लिया लेकिन यह स्वीकार किया है कि रूस और चीन के साथ उनका सहयोग जारी है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या युद्ध के दौरान रूस और चीन से ईरान को पलटवार के लिए हथियार मिल रहा है या फिर रूस और चीन ने ईरान को अमेरिकी और इजरायली मिसाइलों को बचाने के लिए रक्षा प्रणालियां सप्लाई की है। 

इसे भी पढ़ें: US के लिए बहुत बड़ा परमाणु खतरा है Pakistan, Tulsi Gabbard के खुलासे के बाद Donald Trump ने पकड़ा माथा

दरअसल आधिकारिक तौर पर रूस और चीन ने ईरान पर हमले की निंदा की है। लेकिन साथ ही साथ यह भी कहा है कि वह सीधे तौर पर ईरान को कोई सैन्य मदद नहीं दे रहे। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर रूस और चीन से सीधे सैन्य मदद नहीं मिल रही तो युद्ध के दौरान ये दोनों देश ईरान के साथ कौन सा सहयोग आगे बढ़ा रहे। लेकिन इसे लेकर अब दुनिया में टकराव और तनाव का आकलन करने वाली कंपनी स्पेशल यूरेशिया की हालिया रिपोर्ट में बहुत बड़ा दावा किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया कि ईरान के युद्ध में चीन और रूस की भूमिका सैन्य नहीं बल्कि तकनीक है। रूस की भूमिका सैन्य नहीं बल्कि तकनीक है। रिपोर्ट में कहा गया कि अपनी 500 से ज्यादा सेटेलाइट्स के जरिए चीन से ईरान को अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों की लोकेशन मिल रही है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि चीन ने ईरान को एक नया नेविगेशन सिस्टम यानी जीपीएस उपलब्ध कराया है। जीपीएस की वजह से अमीर रडार ईरानी मिसाइलों के सिग्नल को जाम नहीं कर पा रहा है। इसी वजह से ईरान की मिसाइलें टारगेट को तबाह करने में कामयाब हो रही हैं। 

इसे भी पढ़ें: भारत का सीक्रेट ऑपरेशन देखकर हिल गया रूस, गाड़ी ने मचाया तहलका

पिछले साल जब ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन तक युद्ध हुआ था तो अमेरिका ने इसी तकनीक का इस्तेमाल करके ईरानी मिसाइलों को भटका दिया था। लेकिन इस बार ईरान को चीन का जीपीएस सिस्टम मिल गया है। इस सिस्टम की फ्रीक्वेंसी के साथ अमेरिकी फौज छेड़छाड़ नहीं कर पा रही। तो यह रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रूस ने अपनी एक सेटेलाइट पूरी तरह ईरान को सेवा में तैनात कर दी है। यह सेटेलाइट अंतरिक्ष से इजराइली और अमेरिकी सैन्य अड्डों की हाई रेजोल्यूशन तस्वीरें ले रही है और ईरान को दे रही है। इन तस्वीरों के जरिए सैन्य अड्डों पर तैनाती से लेकर हमलों के बाद नुकसान का सटीक आकलन ईरानी फौज को मिल रहा है। भले ही रूस और चीन ने सीधे तौर पर सैन्य तैनाती नहीं की है। लेकिन ये दोनों ही देश तकनीक के जरिए ईरान को बड़ी मदद पहुंचा रहे हैं। 

All the updates here:

अन्य न्यूज़