यूक्रेन संकट में रूस के साथ मजबूती से खड़ा है चीन? ताइवान, पूर्वी लद्दाख और दक्षिणी चीन सागर संबंधित मुद्दों को लेकर तलाश रहा अवसर

यूक्रेन के तनाव के कारण शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन करीब आ गए हैं। अमेरिका चीन को दुश्मन नं 1 मानता है। यूक्रेन में बढ़े तनाव से अमेरिका का ध्यान ताइवान से हट सकता है जो चीन चाहता है। साल 2014 में रूस ने क्रीमिया पर कब्जा किया था। इसके बाद अमेरिका ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे।
यूक्रेन पर बड़े हमले के लिए रूस पूरी तरह से तैयार दिख रहा है। रूस की तरफ से बॉर्डर पर सौ बटालियन ग्रुप और कहा जा रहा है कि रूस के ग्राउंड कॉम्बैट पॉवर का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा बॉर्डर पर तैनात है। अमेरिका ने भी चेतावनी दी है कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है। वहीं पुतिन ने ताइवान तो शी ने यूक्रेन पर एक दूसरे का साथ देने का वादा करके एक नए समीकरण बनाने के भी संकेत दे दिए हैं।
क्षेत्रीय अखंडता और घरेलू मामलों में किसी का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बीजिंग विंटर ओलंपिक के दौरान मुलाकात हुई। उसी दौरान दोनों ने साझा बयान भी दिया। जिसमें कहा गया कि कहा गया कि रूस 'वन चाइना' के सिद्धांत का समर्थन करता है। बदले में चीन ने भी यूक्रेन के मुद्दे पर अमेरिका के साथ चल रहे तनाव में रूस का समर्थन किया है। दुनिया की दो महाशक्तियों के इस मिलन से ताइवान और यूक्रेन का संकट और गहराने की आशंका है। 5300 शब्दों वाले लंबे संयुक्त बयान में रूस और चीन ने एक दूसरे के हितों की रक्षा के लिए सहयोग की बात भी कही, जिसमें उनकी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और घरेलू मामलों में किसी अन्य देश का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करना शामिल है।
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दोनों दे रहें एक-दूसरे का साथ
यहां गौर करने वाली बात है कि शी जिनपिंग पिछले दो सालों में किसी भी विदेशी नेता से आमने सामने आकर नहीं मिले। सभी के साथ उन्होंने वर्चुअल मीटिंग की है। यहां तक की अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ भी वर्चुअली ही मुलाकात हुई। लेकिन पुतिन के लिए उनका रवैया और स्वाभाव अलग ही नजर आया। लेकिन रूसी राष्ट्रपित ने भी ऐसे वक्त में चीन का दौरा किया जब अमेरिका, भारत समेत कई देशों ने बीजिंग ओलंपिक का राजनयिक बहिष्कार किया।
अमेरिका का आर्थिक प्रतिबंध और दोनों में हुई डील
यूक्रेन के तनाव के कारण शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन करीब आ गए हैं। अमेरिका चीन को दुश्मन नं 1 मानता है। यूक्रेन में बढ़े तनाव से अमेरिका का ध्यान ताइवान से हट सकता है जो चीन चाहता है। साल 2014 में रूस ने क्रीमिया पर कब्जा किया था। इसके बाद अमेरिका ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन उस वक्त चीन ने रूस की मदद की। नतीजा ये हुआ कि रूस की कंपनी गैसप्रोम ने चीन के साथ चार सौ बिलियन डॉलर की गैस डील साइन की। रूस को अच्छे दाम तो नहीं मिले लेकिन उसे ज्यादा नुकसान चीन की वजह से नहीं हुआ। रूस वर्तमान दौर में चीन को हथियार, मछली, टिम्बर खूब निर्यात कर रहा है। रूस के गैस, तेल का सबसे बड़ा खरीदार चीन है। चीन और रूस के बीच 147 बिलियन डॉलर का व्यापार है। 2015 में ये केवल 68 बिलियन था। चीन और रूस दूसरी पाइपलाइन पॉवर ऑफ साइबेरिया पर भी काम कर रहे हैं जो कभी भी खत्म हो सकती है।
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कंधे से कंधा मिलाकर पुतिन के साथ खड़े जिनपिंग
रूस पर अमेरिका आर्थिक प्रतिबंध को लेकर दबाव बना रहा है लेकिन शी जिनपिंग कंधे से कंधा मिलाकर पुतिन के साथ खड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भी चीन ने अमेरिका के प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया और रूस के साथ खड़ा रहा।दोनों देश एक दूसरे के विदेश मसले पर एक साथ खड़े नजर आ रहे हैं। जब कजाकिस्तान में दंगे हुए और रूस को वहां फौज भेजनी पड़ी तो चीन ने खुलकर कहा कि वहां हिंसा अमेरिका के कारण भड़की। वहीं विंटर ओलंपिक में रूस ने चीन का साथ दिया है और कहा कि अमेरिका चीन को बदनाम करने की साजिश कर रहा है।
चीन अपने लिए मौके तलाश रहा
यूक्रेन को लेकर टकराव बढ़ने के बीच चीन भी अपनी चालें चल रहा है। ताइवान, पूर्वी लद्दाख और दक्षिणी चीन सागर में संबंधित मुद्दों पर घिरा चीन शायद इसी तरह के अवसर की तलाश में था। चीन ने कूटनीतिक चाल चलते हुए पूतिन को विंटर ओलंपिक्स में बुलाया। यहां दोनों देशों ने संयुक्त बयान में कहा कि उनके संबंधों की कोई सीमा नहीं है। इसका मतलब यह है कि दोनों देश अमेरिका से लड़ने के लिए तैयार हैं।
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