चीन ने दुनिया की सबसे तेज ट्रेन का किया अनावरण, जानिए क्या है इस ट्रेन की खासियत?

चीन ने दुनिया की सबसे तेज ट्रेन का किया अनावरण, जानिए क्या है इस ट्रेन की खासियत?

जानकारी के लिए बता दें कि इस यात्रा में विमान से 3 घंटे और चीन में मौजूदा हाई-स्पीड रेन इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा 5.5 घंटे लगेंगे। उदाहरण के लिए समझें तो, इस स्पीड से, दिल्ली और मुंबई के बीच 1,460 किलोमीटर की दूरी को 3 घंटे के भीतर कवर किया जाएगा।

चीन ने दुनिया की सबसे तेज मैग्लेव ट्रेन का अनावरण करते हुए एक और मील का पत्थर हासिल कर लिया है। इसकी जानकारी चीनी राज्य मीडिया ने दी है। टीओआई में छपी एक खबर के मुताबिक, यह ट्रेन 600 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड में चलती है। बता दें कि ट्रेन को चीन द्वारा देश के पूर्वी प्रांत शेडोंग प्रांत के तटीय शहर किंगदाओ में दुनिया के सबसे तेज जमीनी वाहन करार दिया है। बीजिंग से शंघाई तक 600 किलोमीटर प्रति घंटे की यात्रा केवल 2.5 घंटे में ट्रेन द्वारा कवर की जाएगी। जानकारी के लिए बता दें कि इस यात्रा में विमान से 3 घंटे और चीन में मौजूदा हाई-स्पीड रेन इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा 5.5 घंटे लगेंगे। उदाहरण के लिए समझें तो, इस स्पीड से, दिल्ली और मुंबई के बीच 1,460 किलोमीटर की दूरी को 3 घंटे के भीतर कवर किया जाएगा। 

क्या है इस ट्रेन की खासियत?

आपको बता दें कि चीन की  मैग्लेव ट्रेनें मेगनेट द्वारा चलती हैं, जो ट्रेन को ट्रैक से थोड़ा ऊपर रखने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ये सामान्य ट्रेनों की तुलना में अधिक कुशल होती हैं क्योंकि ये ब्रेक लगाने या तेज करने के लिए घर्षण पर बिल्कुल निर्भर नहीं होती हैं। ये ट्रेनें काफी मंहगी होती हैं और जापान, फ्रांस, स्पेन, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे कुछ ही देशों में ही ये परिवहन संचालन किया जा रहा हैं। चीन लगभग दो दशकों से टेक्नॉलिजी का इस्तेमाल कर रहा है।इस समय मेगासिटी शंघाई में एक छोटी मैग्लेव लाइन है जो हवाई अड्डे से शहर तक चल रही है। वर्तमान में चीन में कोई इंटरसिटी मैग्लेव लाइनें नहीं हैं, लेकिन शंघाई और चेंगदू जैसे कुछ शहरों ने रिसर्च करना शुरू कर दिया है।

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चीन के ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि मैग्लेव ट्रेन 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली देश की मौजूदा हाई-स्पीड ट्रेनों और 800 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ने वाले हवाई जहाजों के बीच अंतर को भरने में मदद करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, सुपर फास्ट ट्रेन यात्रियों के लिए वाई-फाई और वायरलेस चार्जिंग से भी लैस है। बता दें कि मैग्लेव परियोजना अक्टूबर 2016 में शुरू हुई।