डोभाल ने बुलाया, भारत आ रहे चीन के विदेश मंत्री

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी वजह से यह बैठक और भी महत्वपूर्ण हो जाती। इसमें ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के सुरक्षा और रणनीतिक अधिकारी शामिल होंगे और सबसे ज्यादा चर्चा चीन के विदेश मंत्री वांगी की मौजूदगी को लेकर है। वांगी ना सिर्फ चीन के विदेश मंत्री हैं बल्कि भारत चीन सीमा विवाद को लेकर बीजिंग के विशेष प्रतिनिधि हैं।
चीन, रूस और ईरान समेत कई बड़े देश भारत में एक साथ जुटने की तैयारी कर रहे हैं। दरअसल मौका है ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की अहम बैठक का जो 22 और 23 जून को नई दिल्ली में होने वाली है। इस बैठक को सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं बल्कि आने वाले समय की वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति की दिशा तय करने वाला मंच माना जा रहा है। इस बैठक की मेजबानी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल करेंगे। भारत इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी वजह से यह बैठक और भी महत्वपूर्ण हो जाती। इसमें ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के सुरक्षा और रणनीतिक अधिकारी शामिल होंगे और सबसे ज्यादा चर्चा चीन के विदेश मंत्री वांगी की मौजूदगी को लेकर है। वांगी ना सिर्फ चीन के विदेश मंत्री हैं बल्कि भारत चीन सीमा विवाद को लेकर बीजिंग के विशेष प्रतिनिधि हैं।
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ऐसे में उनकी भारत यात्रा बेहद अहम मानी जा रही है। उनके और एनएसए अजीत डोभाल के बीच द्विपक्षीय बैठक हो सकती है। जिसमें सीमा विवाद, क्षेत्रीय अस्थिरता और सुरक्षा मुद्दों पर विस्तार से बातचीत होने की संभावना है। वांगी 22 से 23 जून तक भारत में आयोजित होने वाली ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधियों की 16वीं बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। वहीं रूस की ओर से सुरक्षा परिषद के सचिव सिरगई शोइगो इस बैठक में शामिल होंगे। वहीं ईरान की ओर से भी सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारी मौजूद रहेंगे। यानी एक ही मंच पर दुनिया के कई ऐसे देश बैठने जा रहे हैं जिनकी भूमिका वैश्विक सुरक्षा समीकरणों में बेहद अहम थी। यह बैठक इसलिए बड़ी मानी जा रही है क्योंकि इसमें सिर्फ मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों पर ही नहीं बल्कि सितंबर में भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारी पर भी फोकस किया जाएगा।
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इस सम्मेलन में किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जाएगी? किस तरह का साझा एजेंडा बनेगा इन सभी पर चर्चा होने वाली है। वहीं सूत्रों के मुताबिक चीन के विदेश मंत्री वांगी का भारत आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन और भारत के बीच संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। खासकर सीमा विवाद के बाद बने हालातों में यह मुलाकात कूटनीतिक दृष्टि से अहम मानी जा रही है। उनके एनएसए अजीत डोभाल के साथ अलग से बातचीत की संभावना है। आपको बता दें ब्रिक्स का दायरा अब पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका है। अब इसमें भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। यानी यह समूह अब वैश्विक दक्षिण की एक बड़ी आवाज बनकर उभर रहा है। कुल मिलाकर दिल्ली में होने वाली यह बैठक सिर्फ सुरक्षा चर्चा नहीं बल्कि यह बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन की तस्वीर है। एक तरफ पश्चिमी देशों की राजनीति है तो दूसरी तरफ ब्रिक्स जैसे मंच पर उभरता हुआ नया वैश्विक ढांचा। भारत के लिए भी यह बैठक कूटनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है क्योंकि यह उसे एक ऐसे मंच पर केंद्र में लाती है जहां दुनिया की बड़ी ताकतें एक साथ बैठकर भविष्य की रणनीति तय करती हैं।
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