नीरज चोपड़ा ने 10 महीने के Injury संघर्ष पर तोड़ी चुप्पी, Glasgow CWG में सिल्वर जीतकर की शानदार Comeback

Neeraj Chopra
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Aug 6 2026 10:00PM

ग्लासगो में नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन उनके विशेषज्ञ सहयोगी दल और प्रभावी पुनर्वास प्रक्रिया की सफलता का तकनीकी विश्लेषण दर्शाता है। श्रीलंका के खिलाड़ी से मिली कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच रजत पदक हासिल करना यह प्रमाणित करता है कि चोट के लंबे अंतराल के बाद भी उनकी लय और तकनीक बरकरार है। नीरज चोपड़ा रजत पदक स्पोर्ट्स रिकवरी भाला फेंक प्रतियोगिता न्यूज।

पिछले कुछ महीनों से भारतीय एथलेटिक्स के सबसे बड़े सितारे नीरज चोपड़ा मैदान से ज्यादा अपनी फिटनेस को लेकर चर्चा में रहे। अब राष्ट्रमंडल खेल 2026 में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने पहली बार खुलकर बताया है कि बीते 10 महीने उनके खेल जीवन के सबसे कठिन दौर में से एक रहे। लगातार चोटों, लंबे पुनर्वास और अनिश्चितता के बीच उन्होंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी और आखिरकार दमदार वापसी करने में सफल रहे।

मौजूद जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा पिछले करीब एक वर्ष से एडडक्टर मांसपेशी की चोट के साथ-साथ अन्य छोटी शारीरिक परेशानियों से जूझ रहे थे। इन चोटों के कारण उनके नए सत्र की शुरुआत भी तय समय पर नहीं हो सकी। कई प्रतियोगिताओं से दूर रहने के बाद उन्होंने ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में वापसी की और 85.83 मीटर का अपना सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया।

बता दें कि नीरज चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि पिछले 10 महीनों ने उन्हें ऐसे तरीके से परखा, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने लिखा कि कई चोटों से उबरना, शरीर को फिर से मजबूत बनाना, अपनी लय वापस पाना और धैर्य बनाए रखना आसान नहीं था। कई बार वह रोज अभ्यास करते थे, लेकिन उन्हें यह भी नहीं पता होता था कि इस वर्ष किसी प्रतियोगिता में हिस्सा ले पाएंगे या नहीं।

गौरतलब है कि नीरज चोपड़ा ने वर्ष 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 86.47 मीटर भाला फेंककर स्वर्ण पदक जीता था। हालांकि वर्ष 2022 के राष्ट्रमंडल खेलों में वह चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सके थे। इसके बाद पिछले वर्ष विश्व एथलेटिक्स प्रतियोगिता से ठीक पहले उन्हें कमर के निचले हिस्से में भी चोट लगी थी, जिसके चलते वह लंबे समय तक प्रतिस्पर्धा से बाहर रहे।

मौजूद जानकारी के अनुसार, ग्लासगो में उन्हें श्रीलंका के खिलाड़ी रमेश थरंगा पाथिराजे से कड़ी चुनौती मिली। तेज हवा के बीच खेले गए मुकाबले में पाथिराजे ने 89.75 मीटर का शानदार प्रयास करते हुए स्वर्ण पदक जीता, जबकि नीरज चोपड़ा को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि चोट से वापसी के बाद यह प्रदर्शन नीरज के आत्मविश्वास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

नीरज चोपड़ा ने अपनी वापसी का श्रेय अपने सहयोगी दल को भी दिया। उन्होंने अपने फिजियो ईशान मरवाहा का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि पुनर्वास के हर चरण में उन्होंने उनका साथ दिया और दोबारा मैदान पर लौटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही उन्होंने अपने कोच जय चौधरी का भी आभार जताया, जो उनके शुरुआती दिनों से उनके साथ जुड़े हुए हैं और लगातार उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने अपने परिवार का भी धन्यवाद किया और कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी परिवार हमेशा उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा। नीरज ने स्पष्ट किया कि उनकी वापसी का सफर अभी पूरा नहीं हुआ है और वह एक-एक कदम आगे बढ़ते हुए आने वाली प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं।

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