Pakistan के अंदर घुसकर ड्रोन हमला शुरू, अफगान ने ISIS अड्डे उड़ाए, हर तरफ हाहाकार!

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में ऐसी भयंकर तबाही मचा दी है जिसके बाद शहबाज और मुनीर कुछ भी बोलने या करने लायक नहीं बचे हैं। इस्लामाबाद में हाई अलर्ट है, डर है और मीटिंग पर मीटिंग चल रही है कि कैसे इस कोहराम से बचा जाए। कहावत है जो जिसके लिए गड्ढा खोदता है उसी में वह खुद गिरता है और पाकिस्तान इस बार गिरा नहीं बल्कि आग में लिपट चुका है और अफगान ने पाक को भस्म करने की कसम भी खा ली है।
आतंकिस्तान के अंदर घुसकर तालिबान ने अपना बदला लेना शुरू कर दिया है और ऐसा पहली बार हुआ है जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान का नामोनिशान मिटाने के लिए ड्रोन बरसाए हो। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान में ऐसी भयंकर तबाही मचा दी है जिसके बाद शहबाज और मुनीर कुछ भी बोलने या करने लायक नहीं बचे हैं। इस्लामाबाद में हाई अलर्ट है, डर है और मीटिंग पर मीटिंग चल रही है कि कैसे इस कोहराम से बचा जाए। कहावत है जो जिसके लिए गड्ढा खोदता है उसी में वह खुद गिरता है और पाकिस्तान इस बार गिरा नहीं बल्कि आग में लिपट चुका है और अफगान ने पाक को भस्म करने की कसम भी खा ली है। दरअसल बता दें कि कुछ दिन पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर एयर स्ट्राइक की थी। तालीबान का दावा है कि इन हमलों में आम नागरिक मारे गए जिनमें बच्चे और महिलाएं शामिल थी। उस वक्त काबुल ने यह साफ कहा था कि इस कार्रवाही का जवाब दिया जाएगा।
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तब पाकिस्तान को लगा था कि मामला कुछ दिनों में शांत हो जाएगा। लेकिन असली झटका अभी बाकी था। क्योंकि अब तालीबान यह दावा कर रहा है कि उसने पाकिस्तान के अंदर घुसकर जवाबी कारवाही की है। तालीबान का कहना है कि उसके लड़ाकू विमानों और ड्रोन ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तुखा में मौजूद आईएसआईएस से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया है। उन्हें नेस्तनाबूत कर दिया है। अफगान की तरफ से यह दावा किया गया कि इन जगहों का इस्तेमाल अफगानिस्तान के खिलाफ हमलों की प्लानिंग, कोऑर्डिनेशन और लॉन्चिंग के लिए किया जाता था। और यहीं से शुरू होता है इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा ट्विस्ट। सालों से पाकिस्तान दुनिया को यही बताता आया है कि वो अपनी सुरक्षा के लिए सीमा पार कारवाही करता है। पाकिस्तान का कहना होता है कि अगर उसकी सुरक्षा को खतरा होगा तो वो दूसरे देश की सीमा के अंदर जाकर भी कार्रवाही करेगा। लेकिन इस बार तालिबान ने पाकिस्तान की ही उसी दलील को उसी के खिलाफ इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। यानी अफगानिस्तान का कहना है कि उसकी सुरक्षा को खतरा था।
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इसलिए उसने पाकिस्तान के अंदर मौजूद उन ठिकानों को निशाना बनाया जिन्हें वो खतरा मानता है और यही वो बात है जिसने इस्लामाबाद की टेंशन को कई गुना ज्यादा बढ़ा दिया है क्योंकि अब मामला सिर्फ एक हमले का नहीं है| मामला इस बात का है कि पाकिस्तान जिस तर्क का इस्तेमाल सालों से करता आया अपने जिहादियों के द्वारा नफरत फैलाता आया अब वही तर्क उसके खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बलूचिस्तान के किला अब्दुल्ला और चगाई इलाके के अलावा खेबर पख्तूनखा के कुछ क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। तालीबान का दावा है कि इन इलाकों में आईएसआईएस, खुरासान से जुड़े नेटवर्क और सुविधाएं मौजूद थी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती है। सबसे बड़ा मैसेज यह है कि तालीबान पहली बार यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि अगर उसके खिलाफ सीमा पार कारवाही होगी तो जवाब भी सीमा के उस पार पहुंच सकता है। यानी अब लड़ाई सिर्फ बॉर्डर पर नहीं बल्कि रणनीति और संदेश की भी है। और यही वजह है कि पाकिस्तान के लिए यह घटना सिर्फ एक सुरक्षा चुनौती नहीं बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी बन गई है।
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