US-Iran Deal का असर, Hormuz से भारतीय जहाज़ों का रास्ता खुला, MEA ने बताया मौजूदा हाल

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय झंडे वाले दस जहाज़ अभी भी फ़ारस की खाड़ी इलाके में हैं। इसके अलावा, हमारे दो भारतीय जहाज़ इस तरफ़ से फ़ारस की खाड़ी में गए हैं। MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद से, भारत आने वाले ग्यारह जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रे हैं।
भारत ने मंगलवार को बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए हुए समझौते (MoU) के बाद, भारत आने वाले 11 जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़रे हैं, जबकि भारतीय झंडे वाले 10 जहाज़ अभी भी फ़ारस की खाड़ी (Persian Gulf) इलाके में हैं। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक नियमित प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारतीय झंडे वाले दस जहाज़ अभी भी फ़ारस की खाड़ी इलाके में हैं। इसके अलावा, हमारे दो भारतीय जहाज़ इस तरफ़ से फ़ारस की खाड़ी में गए हैं। MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद से, भारत आने वाले ग्यारह जहाज़ होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रे हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब समुद्री रास्ते के इस बेहद अहम और संकरे हिस्से (chokepoint) के आसपास लंबे समय से अस्थिरता बनी हुई है; यह हिस्सा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाइड्रोकार्बन और लिक्विफाइड गैस की ढुलाई के लिए मुख्य रास्ता है।
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हालांकि पिछले हफ़्ते वॉशिंगटन और तेहरान के बीच शुरुआती समझौते (MoU) के तहत होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को ट्रैफ़िक के लिए खोल दिया गया था, लेकिन शनिवार को लेबनान के अंदर इज़राइल के सैन्य हमलों के बाद ईरानी अधिकारियों ने इस जलमार्ग को फिर से बंद करने की घोषणा कर दी। इसी दौरान, हाल की घटनाओं के बाद इस अहम रास्ते से कमर्शियल शिपिंग ट्रैफ़िक में तेज़ी आई है। स्वतंत्र समुद्री ट्रैकिंग एजेंसियों ने पिछले कुछ दिनों में कमर्शियल शिपिंग ट्रैफ़िक में बढ़ोतरी दर्ज की है। यह ट्रांसपोर्ट वॉल्यूम में साफ़ सुधार का संकेत है, जो 28 फ़रवरी को ईरान पर अमेरिका-इज़राइल हमले के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने से आई भारी रुकावटों के बाद हुआ है।
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कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को कम से कम 36 रिसोर्स कैरियर (संसाधन ढोने वाले जहाज़) होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रे। यह फ़रवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से देखे गए सबसे व्यस्त ऑपरेशनल समय में से एक था।
पिछले हफ़्ते हुए ईरान-अमेरिका समझौते (MoU) ने लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक मुद्दों को सुलझाने के लिए 60 दिनों का डिप्लोमैटिक समय शुरू किया। यह समझौता महीनों की सीधी सैन्य झड़पों के बाद हुआ, जिसने पश्चिम एशियाई एनर्जी कॉरिडोर को बुरी तरह अस्थिर कर दिया था और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाज़ारों को उलट-पुलट कर दिया था।
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