भारत और चीन 'नरक' है, Donald Trump का विवादित बयान, अमेरिकी नौकरियों पर कब्जा करने का लगाया आरोप

भारत और चीन 'नरक' है, डोनाल्ड ट्रंप का विवादित बयान, अमेरिकी नौकरियों पर कब्जा करने का लगाया आरोप
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के सबसे चर्चित चेहरे डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयानों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक बेहद कड़ा और विवादित पत्र पोस्ट करते हुए ट्रंप ने भारत, चीन और कई अन्य देशों को 'नरक' (hellholes) करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका की दशकों पुरानी 'जन्मसिद्ध नागरिकता' (Birthright Citizenship) की नीति पर तीखा प्रहार किया है। इसमें उन्होंने भारत, चीन और दूसरे देशों को 'नरक' (hellholes) कहा है, और साथ ही अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता की कड़ी आलोचना की है।
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इस पत्र में कैलिफ़ोर्निया के टेक सेक्टर में भर्ती के तरीकों को लेकर कुछ दावे किए गए हैं। इसमें आरोप लगाया गया है कि ज़्यादातर नौकरियाँ भारत और चीन के लोगों के पास हैं। पत्र में कहा गया है कि दूसरों के लिए मौके बहुत कम हैं, हालाँकि इस दावे के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया गया है। यह पत्र जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर चल रही बहस पर केंद्रित है। यह एक अहम मुद्दा है जो अमेरिका में राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं में फिर से उठ खड़ा हुआ है। पत्र में दावा किया गया है कि इस नीति की वजह से अप्रवासी अपने बच्चों के लिए नागरिकता हासिल कर लेते हैं, और बाद में अपने परिवार के दूसरे सदस्यों को भी देश में बुला लेते हैं।
पत्र में यह तर्क दिया गया है कि जन्मसिद्ध नागरिकता के मुद्दे पर फ़ैसला अदालतों या वकीलों को नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता को वोट के ज़रिए करना चाहिए। इसमें सोशल मीडिया पर हुए एक पोल का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि ज़्यादातर लोग इस नीति पर रोक लगाने के पक्ष में हैं। साथ ही, इस मामले को देख रही कानूनी संस्थाओं पर भी अविश्वास जताया गया है।
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इस पत्र में 'अमेरिकन सिविल लिबर्टीज़ यूनियन' (ACLU) की भी आलोचना की गई है। इस पर आरोप लगाया गया है कि यह ऐसी नीतियों का समर्थन करता है जिनसे अमेरिकी नागरिकों के बजाय अवैध अप्रवासियों को फ़ायदा होता है। पत्र में इस संगठन को एक 'अपराधी' संस्था बताया गया है। यहाँ तक कि यह भी सुझाव दिया गया है कि इस पर 'RICO' कानूनों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। ये गंभीर कानूनी प्रावधान हैं जिनका इस्तेमाल आम तौर पर संगठित अपराधों के ख़िलाफ़ किया जाता है।
पत्र में आलोचना का दायरा और भी बढ़ाया गया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि अप्रवासी स्वास्थ्य सेवा जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का गलत फ़ायदा उठाते हैं। इसमें इमरजेंसी रूम में इलाज के लिए जाने का ज़िक्र करते हुए दावा किया गया है कि बिना दस्तावेज़ वाले लोगों के इलाज का खर्च टैक्स देने वाले लोगों को उठाना पड़ता है। इसके अलावा, कैलिफ़ोर्निया जैसे राज्यों में कल्याणकारी योजनाओं में कथित धोखाधड़ी को लेकर भी चिंता जताई गई है। साथ ही, यह भी दावा किया गया है कि अप्रवासन की वजह से सांस्कृतिक और भाषाई पहचान पर बुरा असर पड़ रहा है।
पत्र में जन्मसिद्ध नागरिकता को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का भी ज़िक्र किया गया है। इसमें अदालत में पेश किए गए कानूनी तर्कों पर असंतोष जताया गया है। पत्र में यह तर्क दिया गया है कि संविधान की व्याख्या अब आज की असलियत से पूरी तरह कट चुकी है। यह बात आज के ज़माने में यात्रा और अप्रवासन के बदलते तरीकों के संदर्भ में खास तौर पर कही गई है।
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