ISRO का धमाका, स्पेस में तैनात होगी भारत की तीसरी आंख EOS-05, कांपे चीन-पाकिस्तान

यूएस05 की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यह रियल टाइम मॉनिटरिंग कह सकता है। यह सेटेलाइट हर 30 मिनट में पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की हाई रेज़ोल्यूशन तस्वीरें भेजने में सक्षम है। लेकिन रुक जाइए। अगर बॉर्डर पर कोई संदिग्ध हलचल होती है तो यह हर 5 मिनट में उस जगह की तस्वीर ले सकता है।
आसमान में भारत की अब एक तीसरी आंख खुलने जा रही है। जिससे दुश्मन देशों की नींद उड़ गई है। इसरो यानी कि इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन आने वाले 4 सितंबर को अब एक बड़ा धमाका करने जा रही है। जिसकी गूंज बीजिंग से लेकर इस्लामाबाद तक सुनाई देगी। हम बात कर रहे हैं EOS05 सेटेलाइट की जिसे भारत का नया आई इन द स्काई कहा जा रहा है। US05 जो है जिसे पहले GSसेट वन के नाम से जाना जाता था। ये एक Jio इमेजिंग सेटेलाइट है। आमतौर पर जो अर्थ ऑब्जरवेशन सेटेलाइट्स होती हैं वो धरती का चक्कर लगाते हैं और किसी एक जगह की तस्वीर तभी लेते हैं जब वो उसके ऊपर से गुजरते हैं। लेकिन EOS05 जो कि धरती से 36,000 कि.मी. ऊपर Jio स्टेशनरी ऑर्बिट में तैनात किया जाएगा। इस ऊंचाई पर सेटेलाइट धरती की गति के साथ-साथ घूमता रहता है। यानी कि वो हमेशा भारत के ऊपर ही एक जगह पर स्थिर रहेगा। वो भारत का पहला ऐसा सेटेलाइट होगा जो अंतरिक्ष में एक फिक्स्ड सीसीटीवी कैमरे की तरह काम करेगा।
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यूएस05 की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यह रियल टाइम मॉनिटरिंग कह सकता है। यह सेटेलाइट हर 30 मिनट में पूरे भारतीय उपमहाद्वीप की हाई रेज़ोल्यूशन तस्वीरें भेजने में सक्षम है। लेकिन रुक जाइए। अगर बॉर्डर पर कोई संदिग्ध हलचल होती है तो यह हर 5 मिनट में उस जगह की तस्वीर ले सकता है। इसका मतलब यह है कि एलएसी से लेकर एलओसी तक भारत की निगरानी बेहद पुख्ता होने जा रही है। इन दोनों ही बॉर्डर्स पर जो भी हलचल होगी उस पर भारत की नजर 24ों घंटे होगी। पहले दुश्मनों को पता होता था कि भारतीय सेटेलाइट कब ऊपर से गुजरेगी। लेकिन अब भारत की यह आंख 24ों घंटे उन पर टिकी रहेंगी।
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क्या खास है EOS-05 में?
EOS-05 एक बेहद खास सैटलाइट है, जो पृथ्वी की तस्वीरें लेगा।
यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से पृथ्वी पर नजर रखेगा।
पहले कई भारतीय सैटलाइट निचली कक्षा से निगरानी करते थे।
EOS-05 ज्यादा बड़े इलाके पर लगातार नजर रखने में मदद करेगा।
GSLV की 19वीं उड़ान
EOS-05 को अंतरिक्ष में पहुंचाने की जिम्मेदारी GSLV-F17 की होगी।
यह भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 19वीं उड़ान होगी इस मिशन को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकंड लॉन्च पैड से लॉन्च किया जाएगा।
GSLV-F17, EOS-05
को पहले सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचाएंगा फिर निर्धारित कक्षा में जाएगा।
लगातार नज़र रखेगा सैटलाइट
जियोसिंक्रोनस कक्षा में पृथ्वी के घूमने के साथ सैटलाइट भी तालमेल बनाए रखता है। बड़े इलाकों में मौसम और पर्यावरण की निगरानी बेहतर हो सकती है।
जनवरी की नाकामी के बाद बड़ी वापसी
जनवरी में PSLV-C62 मिशन तकनीकी समस्या के कारण सफल नहीं हो पाया।
इसमें EOS-09 समेत कई उपग्रह अंतरिक्ष भेजे जाने थे।
नाकामी के बाद इसरो ने रॉकेट, मिशन की समीक्षा की।
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