चीनी सैटेलाइट से ईरान ने उड़ाया अमेरिकी अड्डा, गए 7 लाख करोड़

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अभिनय आकाश । Apr 16 2026 12:18PM

लीक हुए कुछ डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक इस सेटेलाइट का कंट्रोल ईरान की सिविलियन स्पेस एजेंसी के पास नहीं बल्कि सीधे आईआरजीसी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स के पास था। इस खबर के बाहर आते ही अपने आप में एक बहुत बड़ी चर्चा शुरू हो गई। आखिरकार ईरान ने जो हमले किए अब उसके पीछे चाइनीस सेटेलाइट्स का हाथ बताया जा रहा है।

कुछ दिन पहले जब ईरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए थे। अमेरिका के सैन्य ठिकानों को कई जगह निशाना बनाया था। उस वक्त पूरी दुनिया दंग रह गई थी और सवाल उठा कि आखिर ईरान के पास इतनी सटीक लोकेशन कहां से आई? आज एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने इस राज से पर्दा उठा दिया है। इस रिपोर्ट के आने के बाद से सिर्फ ईरान ही नहीं एक और देश है जो अब अमेरिका के निशाने पर आ गया है। दरअसल फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने कुछ साल पहले चाइना से एक सेटेलाइट ली थी। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में ऐसा छापा गया है कि ईरान ने 2024 के अंत में चाइना से गुपचुप तरीके से एक स्पाई सेटेलाइट खरीदी थी जिसका नाम TE01 भी है। इसे बनाया और ल्च किया गया चाइना की एक कंपनी अर्थ आई द्वारा। कागजों पर तो यह कमर्शियल डील दिखती है, लेकिन इसके पीछे का सच कुछ और है। लीक हुए कुछ डॉक्यूमेंट्स के मुताबिक इस सेटेलाइट का कंट्रोल ईरान की सिविलियन स्पेस एजेंसी के पास नहीं बल्कि सीधे आईआरजीसी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स के पास था। इस खबर के बाहर आते ही अपने आप में एक बहुत बड़ी चर्चा शुरू हो गई। आखिरकार ईरान ने जो हमले किए अब उसके पीछे चाइनीस सेटेलाइट्स का हाथ बताया जा रहा है। 

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दरअसल इसका असर कुछ ऐसे हुआ कि मार्च 2026 के महीने में जब ईरान ने अमेरिका के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हमला किया तो उसके ठीक 24 घंटे पहले ही सटीक तस्वीरें इसी सेटेलाइट ने ईरान को भेजी थी। हमला खत्म होने के बाद नुकसान कितना हुआ इसकी जानकारी भी इसी सेटेलाइट ने दी। यानी चाइना की तकनीक ईरान के लिए आंख और कान का काम कर रही थी। तो कुल मिलाकर देखा जाए तो अमेरिका पर जो हमले ईरान ने किए उसमें कहीं ना कहीं इस चाइनीस सेटेलाइट का भी एक बड़ा रोल था और यहां पर सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि इस हमले में अमेरिका को नुकसान कितना हुआ। समझना बहुत जरूरी है क्योंकि अमेरिका ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि इस जंग में उनके फाइटर जेट्स को नुकसान पहुंचा है। लेकिन लिस्ट बहुत लंबी है। इस जंग में अमेरिका को भारी नुकसान हुआ और कहीं ना कहीं इसके पीछे इस चाइनीस सेटेलाइट का भी एक बड़ा रोल रहा है। इस जंग में ईरान को तो नुकसान हुआ लेकिन अमेरिका ने उम्मीद नहीं की होगी कि उसे इतना भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। सबसे पहले अमेरिका का F-15 ई स्ट्राइक ईगल गिराया गया। 

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A10 थंडरब्ट टू गिराया गया। MQ9 रिपर ड्रोन कम से कम 20 से 24 ड्रोंस ऐसे गिराए गए। इसके अलावा चीनूक हेलीकॉप्टर यहां तक कि ब्लैक हॉक के डैमेज होने की भी रिपोर्ट्स थी। ईरान ने तो यह तक दावा किया था कि उसने एक अमेरिकी F-35 तक गिरा दिया है। और इसके साथ ही साथ कई सैन्य ठिकानों पर भी ईरान ने हमला किया। हालांकि इस नुकसान की पुष्टि भारत तक नहीं करता है। देखिए आमतौर पर जंग के दौरान दोनों तरफ नुकसान पहुंचता है। ईरान को भी नुकसान हुआ, अमेरिका को भी नुकसान हुआ। लेकिन अमेरिका को जो नुकसान हुआ वो इसलिए चर्चा में आया क्योंकि अमेरिका ने जिस तरह से बयानबाजी की थी और हमले की तैयारी की थी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि ईरान अमेरिका को इतना भारी भरकम नुकसान पहुंचा पाएगा। और अब जब फाइनेंसियल टाइम्स की ये रिपोर्ट सामने आई है तो चाइनीस सेटेलाइट को भी इसके पीछे जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। देखिए हथियारों की अगर बात करें जो अमेरिकी विमान गिराए गए उसमें तो मान लीजिए जंग का वक्त है। दोनों तरफ से हमले हुए कोई भी नुकसान हो सकता है। लेकिन जो सटीक हमले अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर किए गए उसके पीछे चाइनीस सेटेलाइट्स का हाथ हो सकता है। देखिए जो रिपोर्ट्स सामने आई हैं उसके मुताबिक इस सेटेलाइट ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस की 13, 14 और 15 मार्च की तस्वीरें ली।

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14 मार्च को ट्रंप ने खुद माना था कि इस बेस पर मौजूद अमेरिकी विमानों को नुकसान हुआ था। इसके अलावा इस सेटेलाइट ने जॉर्डन के मुआफक साल्टी एयरबेस पर भी नजर रखी। साथ ही बहरीन में अमेरिकी नौसेना के यूएस फिफ्थ फ्लट के बेस और इराक के एरेबल एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों को भी मॉनिटर किया गया। यही नहीं कुवैत, जिबूती, ओमान और यूएई में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के कोऑर्डिनेट्स की पूरी लिस्ट इस चाइनीस सेटेलाइट के पास थी। ये अमेरिका की इंटेलिजेंस के लिए एक बहुत बड़ा फेलोर माना जा रहा है। रिपोर्ट्स कहती है कि ईरान ने इस सेटेलाइट की मदद से अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर नजर रखा और उसी हिसाब से हमलों की तैयारी की। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।  

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