रूस तो हमारा पक्का दोस्त है...अमेरिकी विदेश मंत्री के सामने जयशंकर का दिखा धांसू अंदाज

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया जटिल चुनौतियों और संघर्षों से घिरी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे उन सभी पार्टियों (देश) के साथ बेहतर संबंध हैं, जो विवादों में उलझे हुए हैं।
रूस और भारत की दोस्ती जगजाहिर है। यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका ने रूस पर कई सख्त प्रतिबंध लगाए हैं, लेकिन इन दबावों के बावजूद भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा। भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ शब्दों में भारत-रूस रिश्तों की मजबूती का जिक्र किया और कहा कि दोनों देशों के संबंध हमेशा भरोसे और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित रहे हैं। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया जटिल चुनौतियों और संघर्षों से घिरी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि हमारे उन सभी पार्टियों (देश) के साथ बेहतर संबंध हैं, जो विवादों में उलझे हुए हैं।
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विदेश मंत्री जयशंकर का यह अंदाज इस वक्त खूब चर्चा में अमेरिकी विदेश मंत्री के सामने जयशंकर ने खुलकर रूस से मजबूत रिश्तों का जिक्र किया। दरअसल अमेरिका लंबे समय से भारत और रूस के करीबी रिश्तों को लेकर चिंता जताता रहा है। खासकर ट्रंप की वापसी के बाद अमेरिका लगातार भारत पर इस बात का दबाव बनाता रहा कि भारत रूसी तेल ना खरीदे। लेकिन जयशंकर के ताजा बयान को अमेरिका के लिए एक साफ संदेश माना जा रहा है। भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेगा। दरअसल प्रेस कॉन्फ्रेंस में मार्को रूबियो के सामने जयशंकर ने कहा कि भारत दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है जिनके अमेरिका से रिश्ते अच्छे हैं, इजराइल से रिश्ते अच्छे हैं।
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ईरान से अच्छे हैं और यहां तक कि रूस और खारी देशों के साथ भी मजबूत रिश्ते हैं। उन्होंने कहा कि भारत इन रिश्तों को जीरो सम गेम की तरह नहीं देखता। यानी एक देश के साथ संबंध मजबूत करने के लिए दूसरे देश से दूरी बनाना भारत की नीति नहीं है। भारत का मकसद सभी देशों के साथ अपने हितों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के सामने बड़ी चुनौती यही है कि वह अपने सभी
रिश्तों को संतुलित तरीके से संभाले और हर मोर्चे पर अपने हितों की रक्षा करें। जयशंकर ने साफ कहा कि आज की दुनिया में भारत के हित इतने व्यापक हो चुके हैं कि उसे कई देशों के साथ एक मजबूत संबंध बनाए रखने पड़ते हैं। इस दौरान यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के रूस के साथ मजबूत रिश्ते हैं। लेकिन साथ ही यूरोप, यूक्रेन और अमेरिका के साथ भी भारत के अच्छे संबंध हैं। ऐसे में भारत का काम किसी एक पक्ष के साथ खड़ा होना नहीं बल्कि सभी रिश्तों को संतुलित रखना। उन्होंने कहा कि यही आज के भारत की मल्टी अलाइनमेंट नीति है। पश्चिम एशिया पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए उस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की बड़ी आबादी खाड़ी देशों [संगीत] में काम करती है। इसलिए वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और भलाई भारत की प्राथमिकता है। इसके अलावा भारत दुनिया का बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और उसकी बड़ी जरूरतें पश्चिम एशिया से पूरी होती हैं। इसी वजह से भारत चाहता है कि ऊर्जा की कीमतें नियंत्रित रहें और बाजार खुले रहें। इस दौरान विदेश मंत्री ने समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत सुरक्षित और बिना रुकावट वाले समुद्री व्यापार का समर्थन करता है और चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर किसी तरह की पाबंदी ना लगे। कुल मिलाकर विदेश मंत्री जयशंकर के इस बयान ने साफ कर दिया कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के साथ आगे बढ़ रहा है। अमेरिका के साथ मजबूत रिश्तों के बावजूद भारत रूस समेत दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों को भी उतनी ही अहमियत देता रहा है।
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