जिनपिंग ने खुद को सत्ता के केंद्र में रख पार्टी को ही पीछे धकेल दिया, पूर्व CPC की नेता का दावा- करोड़ों सदस्यों की हैसियत गुलामों जैसी

जिनपिंग ने खुद को सत्ता के केंद्र में रख पार्टी को ही पीछे धकेल दिया, पूर्व CPC की नेता का दावा- करोड़ों सदस्यों की हैसियत गुलामों जैसी

राष्ट्रपति शी चिनफिंग की प्रखर आलोचक और सेंट्रल पार्टी स्कूल की पूर्व प्रोफेसर काई शिया ने चीनी राष्ट्रपति पर सत्ता के लिए अपनी ही पार्टी की हत्या का आरोप लगाया है। जिनपिंग ने खुद को सत्ता के केंद्र में रखकर पार्टी को ही पीछे धकेल दिया है और अब खुद ही पार्टी के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं।

चीन के कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना 1921 में हुई थी। वर्तमान दौर में कम्युनिस्ट पार्टी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और यह भारत की भारतीय जनता पार्टी की आधी है। 2013 में चीन में एक बार फिर एक नया चेहरा शी जिनपिंग के रूप में सामने आया। चीन में शी जिनपिंग को माओ और डेंग जिआओपिंग के बाद तीसरा सबसे बड़ा नेता माना जाता है। माना जाता है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को नया जीवन दिया है और वे पार्टी को आगे बढ़ाने के अभियान पर हैं। कम्युनिस्ट पार्टी की कामयाबी को हम केवल इस रूप में देख सकते हैं कि चीन अब एक देश की बजाए एक पार्टी बन चुका है। लेकिन आलोचकों की निगाहों से देखें तो पार्टी की तरफ से एक व्यक्ति को आगे बढ़ाया जा रहा है। आलोचकों का मानना है कि जिनपिंग ने खुद को सत्ता के केंद्र में रखकर पार्टी को ही पीछे धकेल दिया है और अब खुद ही पार्टी के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। 

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 पार्टी के सदस्यों की हैसियत गुलामों जैसी

राष्ट्रपति शी चिनफिंग की प्रखर आलोचक और सेंट्रल पार्टी स्कूल की पूर्व प्रोफेसर काई शिया ने चीनी राष्ट्रपति पर सत्ता के लिए अपनी ही पार्टी की हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी पर बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि वर्तमान में पार्टी के साढ़े नौ करोड़ सदस्य हैं। लेकिन जिनपिंग के सामने इन सदस्यों की हैसियत गुलामों जैसी है। शिया का दावा है कि पार्टी को नया जीवन देने का दावा करने वाले जिनपिंग ने खुद को पार्टी से ऊपर का दर्जा दे दिया है। इस कदम को शिया ने पार्टी के अस्तित्व के लिए खतरा बताया है।

जीवन भर शीर्ष पद पर आसीन रहने का रास्ता जिनपिंग ने किया साफ

चीन में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष माओ त्से तुंग के बाद पिछले दो दशक से पार्टी के नेता दो कार्यकाल की अनिवार्यता का पालन करते रहे थे ताकि तानाशाही से बचा जा सके और एक दलीय राजनीति वाले देश में सामूहिक नेतृत्व सुनिश्चित किया जा सके। लेकिन राष्ट्रपति के कार्यकाल को लेकर चीन ने बकायदा 2018 में संविधान संशोधन किया। चीन की संसद ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए महज दो कार्यकाल की अनिवार्यता को दो-तिहाई बहुमत से खत्म कर देश के मौजूदा राष्ट्रपति शी जिनपिंग के जीवन भर शीर्ष पद पर आसीन रहने का रास्ता साफ कर दिया।  

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कौन हैं काई शिया  

काई शिया चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग की एक मुखर आलोचक हैं।  सेंट्रल पार्टी स्कूल की प्रोफेसर रह चुकी हैं। अगस्त 2020 में शिया को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। उन्होंने राष्ट्रपति पर आरोप लगाया था कि वह चीन के लोगों का आर्थिक और सामाजिक दिक्कतों से ध्यान भटकाने के लिए भारत और चीन के बीच विवाद को भड़का रहे हैं। जिसके बाद उन्हें सेंट्रल पार्टी स्कूल की पूर्व प्रोफेसर काई शिया को निष्कासित कर दिया। स्कूल की वेबसाइट पर लगे एक नोटिस के हवाले से कहा गया कि काई (68) को इसलिए दंडित किया गया क्योंकि उन्होंने राजनीतिक समस्या पैदा करने वाले भाषण दिए। 

अमेरिका में हैं शिया

निष्कासित नेता काइ शिया ने एक अखबार को बताया था कि वह सुरक्षित हैं और अमेरिका में हैं। हालांकि उन्होंने ज्यादा कुछ कहने से इनकार कर दिया। ब्रिटेन के ‘गार्डियन’ अखबार को जून में एक साक्षात्कार में काई ने कहा था कि शी चिनफिंग चीन और भारत के बीच टकराव को बढ़ा रहे हैं और अपने फायदे तथा दबदबा बढ़ाने के लिए अमेरिका विरोधी भावनाओं को बढ़ावा दे रहे हैं।