जो बाइडन, कमला हैरिस ने अमेरिका के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 21, 2021   10:19
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जो बाइडन, कमला हैरिस ने अमेरिका के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली

जो बाइडन ने बुधवार को आयोजित ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और देश को एकजुट करने का वादा करते हुए नागरिकों से देश को बांटने वाले ‘‘अशिष्ट युद्ध’’ को समाप्त करने का आह्वान किया।

वाशिंगटन। जो बाइडन ने बुधवार को आयोजित ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और देश को एकजुट करने का वादा करते हुए नागरिकों से देश को बांटने वाले ‘‘अशिष्ट युद्ध’’ को समाप्त करने का आह्वान किया। कमला देवी हैरिस ने देश की पहली महिला, पहली अश्वेत और पहली भारतीय अमेरिकी उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों द्वारा संसद भवन पर छह जनवरी को हुए हमले के मद्देनजर आज सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और पूरा समारोह बिना किसी रुकावट के संपन्न हुआ।

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चेन्नई मूल की भारतीय प्रवासी माता और जमैका से ताल्लुक रखने वाले अफ्रीकी पिता की बेटी 56 वर्षीय हैरिस ने देश की पहली महिला उपराष्ट्रपति बनकर इतिहास में नाम दर्ज कराया है। राष्ट्रपति के रूप में अपने पहले भाषण में बाइडन ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा, ‘‘हमें इस असभ्य युद्ध को समाप्त करना ही होगा जो लाल को नीले के खिलाफ (अमेरिकी झंडे के रंग), गांवों को शहरों के खिलाफ और कट्टरपंथियों को उदारवादियों के खिलाफ खड़ा करता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम यह कर सकते हैं, अगर हम अपने दिल के दरवाजे बंद करने की जगह उन्हें खोल दें। अगर हम थोड़ा धैर्य और मानवता दिखाएं, और अगर हम दूसरों के नजरिए से सोचने का प्रयास करें (हम ऐसा कर सकते हैं।)’’ बाइडन ने अमेरिका के साझेदारों के साथ संबंधों को दुरुस्त करने और दुनिया के साथ एक बार फिर साझेदारी बढ़ाने का वादा किया। उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका ने परीक्षा दी है और मजबूत होकर उभरा है।

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हम अपने साझेदारों के साथ संबंधों को दुरुस्त करेंगे और एक बार फिर दुनिया के साथ अपना मेल-जोल बढ़ाएंगे।’’ बाइडन ने कहा, ‘‘हम सिर्फ अपनी शक्ति के आधार पर नेतृत्व नहीं करेंगे, बल्कि उदाहरण पेश करेंगे और उसके आधार पर आगे चलेंगे। हम शांति, प्रगति और सुरक्षा के लिए मजबूत तथा विश्वस्त साझेदार साबित होंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आज अमेरिका का दिन है। आज लोकतंत्र का दिन है। इतिहास और आशा का दिन है।’’ राष्ट्रपति ने कहा, ‘आज हम एक उम्मीदवार की जीत का नहीं बल्कि एक मकसद की जीत का जश्न मना रहे हैं। लोगों, लोगों की इच्छाओं को सुना गया है और उनकी आकांक्षाएं समझी गई हैं।’’ नवंबर में चुनाव में मिली जीत को अस्वीकार करने के पूर्वराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रयासों का परोक्ष संदर्भ देते हुए बाइडन ने कहा, ‘‘हमने फिर से सीखा है कि लोकतंत्र मूल्यवान है। लोकतंत्र नाजुक है। मेरे दोस्तो, मौजूदा स्थिति में लोकतंत्र की जीत हुई है।’’ गौरतलब है कि ट्रंप ने देश की 152 साल पुरानी परंपरा को नजरअंदाज करते हुए बाइडन के शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा नहीं लिया और व्हाइट हाउस से निकल कर सीधे फ्लोरिडा चले गए। अपने 21 मिनट लंबे भाषण में बाइडन ने चुनौती स्वीकार करने और लोकतंत्र को पुन: बहाल करने के लिए अमेरिकी नागरिकों की प्रशंसा की।

कोरोना वायरस संक्रमण और नस्ली अन्याय के खिलाफ लड़ाई जैसी चुनौतियों का संदर्भ देते हुए बाइडन ने कहा, ‘‘एकजुट होकर हम बहुत कुछ कर सकते हैं।’’ महामारी को हराने, हालात सुधारने, देश को एकजुट करने के अपने दृष्टिकोण से सभी को अवगत कराते हुए उन्होंने कहा, ‘‘एकजुटता ही आगे का रास्ता है।’’ बाइडन ने इस बात पर जोर दिया कि वह सभी अमेरिकी नागरिकों के राष्ट्रपति हैं, उन्हें वोट देने वालों के भी और नहीं देने वालों के भी। उन्होंने यह भी कहा कि देश को श्वेत नस्ल की श्रेष्ठता की मानसिकता के खिलाफ लड़ना होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि उपराष्ट्रपति के रूप में हैरिस का शपथ ग्रहण दिखाता है कि देश में कितने सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह मत कहिए कि चीजें बदल नहीं सकती हैं।’’ उन्होंने क्रोध और विभाजन को शह देने वालों की आलोचना की और उनका विरोध करने वालों से कहा ‘‘एक बार मेरी बात सुनें।’’

बाइडन ने राजनीतिक सत्ता और लाभ के लिए झूठ बोलने वालों की आलोचना की और कहा ‘‘सच और झूठ सब सामने आते हैं।’’ अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अपने संदेश में बाइडन ने अमेरिका के साझेदारों के साथ संबंधों को दुरुस्त करने और दुनिया के साथ एक बार फिर साझेदारी बढ़ाने का वादा किया। उन्होंने कहा कि देश ने परीक्षा की घड़ी पार की है और मजबूत बनकर उभरा है। डेमोक्रेटिक पार्टी के 78 वर्षीय अनुभवी नेता ने अपने भाषण में कहा, ‘‘हम शांति, प्रगति और सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत और विश्वस्त साझेदारी होंगे।’’ बाइडन के शपथ ग्रहण समारोह में तीन पूर्व राष्ट्रपतियों बराक ओबामा (डेमोक्रेटिक पार्टी से), जॉर्ज डब्ल्यू बुश (रिपब्लिकन पार्टी से) और बिल क्लिंटन (डेमोक्रेटक पार्टी से) ने भाग लिया। शपथ ग्रहण के बाद बाइडन ने आधिकारिक रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति के ट्विटर हैंडल @पीओटीयूएस को स्वीकार कर लिया है।

अमेरिका में @पीओटीयूएस राष्ट्रपति का जबकि @एफएलओटीयूएस देश की प्रथम महिला का आधिकारिक ट्विटर हैंडल है। ट्विटर ने शपथ ग्रहण समारोह के बाद हैंडल @पीओटीयूएस @एफएलओटीयूएस @वीपी और @व्हाइटहाउस को आधिकारिक रूप से बाइडन प्रशासन को सौंप दिया। ये सभी ट्विटर हैंडल अमेरिकी सरकार में शीर्ष पदों से जुड़े हुए हैं और किसी के निजी हैंडल नहीं हैं। ट्रंप के हैंडल @पीओटीयूएस को अब @पीओटीयूएस45 के नाम से आर्काइव कर दिया जाएगा, बिलकुल वैसे ही जैसे ओबामा के हैंडल को @पीओटीयूएस44 के नाम से किया गया था। शपथ ग्रहण के बाद राष्ट्रपति बाइडन और उपराष्ट्रपति हैरिस ने पारंपरिक सैन्य परंपरा के तहत ‘पास इन रिव्यू’ किया।





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राजनीतिक संकट के बीच कुवैत में नयी कैबिनेट ने शपथ ली

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 3, 2021   18:56
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राजनीतिक संकट के बीच कुवैत में नयी कैबिनेट ने शपथ ली

कुवैत में संसद के साथ गहराते गतिरोध के बीच बुधवार को नयी कैबिनेट ने शपथ ग्रहण की। सरकारी मीडिया में आयी खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री शेख सबा अल-खलीद अल हमद अल सबा ने ऐसे चार मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर कर दिया जिनकी नियुक्ति से सांसद नाराज थे।

दुबई। कुवैत में संसद के साथ गहराते गतिरोध के बीच बुधवार को नयी कैबिनेट ने शपथ ग्रहण की। सरकारी मीडिया में आयी खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री शेख सबा अल-खलीद अल हमद अल सबा ने ऐसे चार मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर कर दिया जिनकी नियुक्ति से सांसद नाराज थे। उनके स्थान पर प्रधानमंत्री ने कम विवादित और अनुभवी नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी है। इसे संसद के साथ संबंधों को सुधारने के प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है। तेल संसाधनों के धनी खाड़ी देश में अमीर द्वारा नियुक्त सरकार और निर्वाचित संसद के बीच जारी गतिरोध और मौजूद खाई शेख नवाफ अल अहमद अल सबा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

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अमीर शेख नवाफ पिछले ही साल गद्दी पर बैठे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने नाराज सांसदों और संसद को मनाने के लक्ष्य से चार पुराने मंत्रियों को बाहर करके अन्य लोगों को कैबिनेट में जगह दी है। सरकार और संसद के बीच जारी लड़ाई से जनता का भरोसा कमजोर हुआ है, हालात अस्थिर हुए हैं और 1990 की इराकी घुसपैठ के बाद पहली बार देश इतने बड़े ऋण संकट में फंसा है। कुवैत के जनरल रिजर्व फंड में नकदी नहीं है और सांसद गहरे तक फैले भ्रष्टाचार के कारण ऋण लेने के पक्ष में भी नहीं हैं। गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी और कच्चे तेल के गिरते दाम के कारण अर्थव्यवस्था की हालत खराब होने पर अन्य खाड़ी देशों ने ऋण का सहारा लिया है।

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अमीर शेख नवाफ ने बुधवार को शपथ ग्रहण समारोह में बढ़ते संकट को दूर करने के लिए एकता बनाए रखने को कहा। उन्होंने मंत्रियों से कहा, ‘‘आप पर बहुत जिम्मेदारियां हैं, खास तौर से इस महत्वपूर्ण समय में और मुझे विश्वास है कि आप सभी साथ मिलकर एक टीम की तरह काम कर सकेंगें।’’ अब देखना यह है कि नए कैबिनेट पर सांसदों की क्या प्रतिक्रिया होती है। अभी तक उनकी ओर से कुछ नहीं कहा गया है।





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लोगों की आवाज दबाने के लिए म्यांमार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर रबड़ की गोलियां दागीं

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 3, 2021   17:32
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लोगों की आवाज दबाने के लिए म्यांमार पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर रबड़ की गोलियां दागीं

म्यांमार में सैन्य तख्तापलट का विरोध कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने बुधवार को प्रर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और रबड़ की गोलियां दागीं।

यंगून। म्यांमार में सैन्य तख्तापलट का विरोध कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने बुधवार को प्रर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े और रबड़ की गोलियां दागीं। विभिन्न शहरों से आई खबरों के मुताबिक, पुलिस ने कारतूस का भी इस्तेमाल किया जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई। एक फरवरी को हुए सैन्य तख्तापलट के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को दबाने के लिए म्यांमा के नए सैन्य शासकों ने हिंसक बल प्रयोग बढ़ा दिया है और सामूहिक गिरफ्तारियां करना शुरू कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि ऐसी आशंका है कि रविवार को कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। हिंसा बढ़ने के बाद, म्यांमा के राजनीतिक संकट का हल निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी बढ़ा दिए गए हैं। संरा सुरक्षा परिषद शुक्रवार को म्यांमा के हालात को लेकर बैठक कर सकती है।

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परिषद के राजनयिकों ने बताया कि इस बैठक के लिए ब्रिटेन ने अनुरोध किया था। दस राष्ट्रों के क्षेत्रीय समूह दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों के संगठन(आसियान) के विदेश मंत्रियों की मंगलवार को टेलिकॉन्फ्रेंस बैठक हुई जिसमें सहायक कदमों पर आम सहमति बनाने का प्रयास किया गया। इस समूह की अपील को दरकिनार करते हुए म्यांमा के सुरक्षा बलों ने बुधवार को भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बल प्रयोग करना जारी रखा।

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स्वतंत्र समाचार सेवा डेमोक्रेटिक वॉइस ऑफ बर्मा के मुताबिक, मोनयावा शहर में कम से कम तीन लोगों को गोली मारी गई। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में दावा किया गया कि यिंगयांग में 14 वर्षीय लड़के को गोली मारी गई। सोशल मीडिया पर और स्थानीय समाचार प्रदाताओं की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसक कार्रवाई तथा मरने वालों के बारे में लगातार खबरें आ रही हैं।





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कोविड-19 टीकों की आपूर्ति के लिए सीरिया की मदद करेगा भारत, दुनियाभर में हो रही प्रशंसा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  मार्च 3, 2021   17:01
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कोविड-19 टीकों की आपूर्ति के लिए सीरिया की मदद करेगा भारत, दुनियाभर में हो रही प्रशंसा

भारत ने कहा कि, सीरिया में कोविड-19 टीकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संरा संग काम करने को तत्पर है। बता दें कि दुनियाभर को कोविड-19 टीकों की अहम आपूर्ति मुहैया कराने के कारण भारत की व्यापक स्तर पर प्रशंसा हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र। दुनियाभर के देशों को कोविड-19 टीकों की अहम आपूर्ति करने वाले भारत ने कहा है कि वह महामारी के कारण पैदा हुए ‘‘गंभीर’’ हालात का सामना कर रहे सीरिया के लोगों को टीकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र एवं उसकी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने को लेकर तत्पर है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि के नागराज नायडू ने सीरिया में मानवाधिकार हालात पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय पैनल से कहा कि भारत इस जरूरत के समय में सीरिया के लोगों के साथ खड़ा है।

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नायडू ने कहा, ‘‘10 साल तक चले सीरियाई संघर्ष के कारण सीरिया के लोगों को बहुत कुछ सहना पड़ा है। देश कोविड-19, सर्दी के मौसम और खाद्य असुरक्षा के कारण मुश्किल हालात का सामना कर रहा है, जिसके कारण 62 लाख विस्थापितों समेत एक करोड़ 70 लाख सीरियाई लोगों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।’’ भारत ने द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय माध्यमों से एक करोड़ 20 लाख डॉलर की मानवीय सहायता दी है और पिछले साल जुलाई में वैश्विक महामारी से निपटने में सीरिया की मदद के लिए 10 मीट्रिक टन से अधिक चिकित्सकीय आपूर्ति की गई थी। इस महीने की शुरुआत में 2000 मीट्रिक टन भोजन की आपूर्ति की गई थी। नायडू ने कहा, ‘‘हम सीरिया के लोगों के लिए कोविड-19 टीकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र और उसकी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने को लेकर तत्पर हैं।’’

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दुनियाभर को कोविड-19 टीकों की अहम आपूर्ति मुहैया कराने के कारण भारत की व्यापक स्तर पर प्रशंसा हो रही है। नायडू ने कहा कि स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की ताजा रिपोर्ट और संघर्ष में शामिल पक्षों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन के मामले बताते हैं कि प्रभावशाली देशों की संलिप्तता के कारण इस संघर्ष का अंतरराष्ट्रीयकरण हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘हम संघर्ष के सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे राजनीतिक मार्ग पर मौजूदा गतिरोध को दूर करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाएं।’’ उन्होंने कहा कि बाह्य तत्वों की संलिप्तता के कारण सीरिया और क्षेत्र में आतंकवाद बढ़ा है।





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