जिनपिंग को देखते ही उछल पड़े किम जोंग, प्योंगयांग में वार्ता

विमान से उतरने के बाद दोनों नेताओं ने गर्मजशी से हाथ मिलाया और फिर एक साथ स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। उत्तर कोरिया की ओर से किया गया यह स्वागत साफ संकेत देता है कि पोंगयांग अभी बीजिंग को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार मानता है।
नॉर्थ कोरिया की राजधानी पियंगयांग में आज एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। दरअसल चीन के राष्ट्रपति शी जिमपिंग के स्वागत में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंगुन खुद एयरपोर्ट पहुंचे। उनके साथ वहां उनकी पत्नी भी मौजूद थी। जैसे ही जिमपिंग का विमान रनवे पर पहुंचता है। किम जोंग उन मुस्कुराते हुए उनका इंतजार करते नजर आते हैं। विमान से उतरने के बाद दोनों नेताओं ने गर्मजशी से हाथ मिलाया और फिर एक साथ स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। उत्तर कोरिया की ओर से किया गया यह स्वागत साफ संकेत देता है कि पोंगयांग अभी बीजिंग को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार मानता है।
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दरअसल पिछले 7 साल में यह पहला मौका है जब कोई चीनी राष्ट्रपति उत्तर कोरिया पहुंचा हो। इसलिए यह यात्रा सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। एयरपोर्ट समारोह के बाद शी जिमपिंग को पंग्यांग के मुख्य चौक पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच शिखर वार्ता शुरू हुई। माना जा रहा है कि बातचीत में आर्थिक सहयोग, रक्षा संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। इस मुलाकात की टाइमिंग भी काफी बड़ी मानी जा रही है। हाल के सालों में उत्तर कोरिया ने रूस के साथ अपने रिश्ते काफी मजबूत किए। यूक्रेन युद्ध के दौरान पियोयांग ने मॉस्को को सैनिक और हथियार उपलब्ध कराए। जिसके बदले रूस से आर्थिक और सैन्य सहयोग मिला। इसके बाद ही यह चर्चा शुरू हो गई थी कि कहीं उत्तर कोरिया धीरे-धीरे चीन से ज्यादा रूस के करीब तो नहीं जा रहा। ऐसे में जिनपिंग की यह यात्रा एक तरह से चीन की शक्ति और प्रभाव का प्रदर्शन भी मानी जा रही है।
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बीजिंग यह दिखाना चाहता है कि उत्तर कोरिया पर उसका प्रभाव अभी भी बरकरार है और क्षेत्रीय राजनीति में उसकी भूमिका सबसे अहम बनी हुई है। चीन इस दौरे के दौरान उत्तर कोरिया को आर्थिक राहत देने के लिए बड़े पैकेज का ऐलान कर सकता है। इसमें खाद्य सहायता, पर्यटन और कई संयुक्त विकास परियोजनाएं शामिल हो सकती। लंबे समय से प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव का सामना कर रहे उत्तर कोरिया के लिए यह मदद बेहद बड़ी हो सकती है। वहीं दूसरी तरफ इस यात्रा को अमेरिका के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हाल ही में शेज जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन से मुलाकात की थी। ऐसे में पोंगयांग पहुंचकर उन्होंने यह संकेत देने की कोशिश की है कि एशिया की राजनीति में चीन की पकड़ मजबूत है और उत्तर कोरिया उसके सबसे भरोसेमंद साझेदारों में से एक बना हुआ है।
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