नीला चश्मा लगा मैक्रों ने एक तीर से किए 2 शिकार, ट्रंप की तिजोरी हुई खाली, फ्रांस के खजाने में आए ₹1,373,312,000,000

सोने की रिकॉर्ड-ऊंचाई पर पहुंचने के दौरान (जो लगभग 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी) 26 चरणबद्ध लेन-देन करके, फ़्रांसीसी केंद्रीय बैंक ने अनुमानित €12.8 बिलियन (या लगभग $14.7 बिलियन) का पूंजीगत लाभ अर्जित किया। इससे इसकी वित्तीय स्थिति में ज़बरदस्त बदलाव आया और 2024 में हुए €7.7 बिलियन (लगभग $8.8 बिलियन) के घाटे को 2025 में €8.1 बिलियन (लगभग $9.3 बिलियन) के शुद्ध लाभ में बदल दिया।
फ्रांस ने एक तीर से दो शिकार करते हुए एक तरफ अमेरिका की तिजोरी खाली कर दी और दूसरी तरफ अपने खजाने में बेतहाशा वृद्धि कर ली है। बैंक ऑफ फ्रांस ने अमेरिका में रखा अपना बाकी सोना बेच दिया है और उसकी जगह अब यूरोप में अपना नया गोल्ड भंडार बना लिया है। जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच पूरी हुई इस प्रक्रिया के साथ ही, फ्रांस की अपनी विदेशी मुद्रा भंडार का एक हिस्सा न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक में रखने की पुरानी परंपरा अब हमेशा के लिए खत्म हो गई है। सोने की रिकॉर्ड-ऊंचाई पर पहुंचने के दौरान (जो लगभग 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई थी) 26 चरणबद्ध लेन-देन करके, फ़्रांसीसी केंद्रीय बैंक ने अनुमानित €12.8 बिलियन (या लगभग $14.7 बिलियन) का पूंजीगत लाभ अर्जित किया। इससे इसकी वित्तीय स्थिति में ज़बरदस्त बदलाव आया और 2024 में हुए €7.7 बिलियन (लगभग $8.8 बिलियन) के घाटे को 2025 में €8.1 बिलियन (लगभग $9.3 बिलियन) के शुद्ध लाभ में बदल दिया। फ़्रांसीसी अधिकारियों ने इस कदम को तकनीकी उन्नयन बताया है। गवर्नर फ्रांकोइस विलेरॉय डी गैलहाउ ने इसे पुराने, "गैर-मानक" सोने के बिस्कुटों को वर्तमान अंतरराष्ट्रीय विशिष्टताओं को पूरा करने वाले बुलियन से बदलने के व्यापक प्रयास के हिस्से के रूप में वर्णित किया।
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डॉलर पर भरोसा टूटा
अमेरिका-ईरान टकराव के बीच दुनिया भर में डॉलर को लेकर भरोसे में दरार दिखने लगी है। फ्रांस ने अमेरिका की तिजोरी से अपना 129 टन सोना (करीब 2 लाख करोड़ रु.) निकालकर फ्रांस में वापस मंगा लिया है। यह उसके कुल भंडार का 516 है। यह ऑपरेशन जुलाई 2025 से मार्च 2026 के पहले सप्ताह बीच पूरा हुआ। पिछले साल जून में अमेरिका द्वारा ईरान पर बम गिराने के बाद फ्रांस ने यह कदम उठाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि जब जंग लंबी हो और डॉलर पर दबाव बढ़े, तो देश अपना सोना अपने पास रखने लगते हैं। फ्रांस के पास अब 2,437 टन सोना पूरी तरह घरेलू तिजोरी में है। उधर, ईरान ने भी चेताया है कि अमेरिकी हमले के मद्देनजर 2026 दुनिया भर के लिए ग्लोबल एनर्जी क्राइसिस का साल रहेगा।
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अमेरिका में रखा सोना फ्रांस ने बेचने का फैसला क्यों लिया?
फ्रांस ने अमेरिका की वित्तीय जटिलताओं को भांपते हुए न्यूयॉर्क के वॉल्ट से भौतिक रूप से सोना वापस लाने की लंबी और कठिन प्रक्रिया के बजाय एक बेहद चतुर रणनीतिक रास्ता चुना। जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच फ्रांस के सेंट्रल बैंक ने वहां रखे अपने 129 टन 'नॉन-स्टैंडर्ड' गोल्ड बार को वहीं बेच दिया और उस रकम से तत्काल यूरोपीय बाजार में उतना ही सोना खरीद लिया। इस चालाकी भरी अदला-बदली से फ्रांस ने न केवल ट्रांसपोर्टेशन के झंझट और अमेरिकी बाधाओं को दरकिनार किया, बल्कि कीमतों के अंतर (मार्जिन) से 12.8 अरब यूरो का भारी-भरकम मुनाफा भी कमा लिया, जिससे उसकी यह चाल एक सफल आर्थिक मास्टरस्ट्रोक साबित हुई। फ्रांस ने बिना किसी शोर-शराबे या लॉजिस्टिक मुसीबत के, अमेरिका की नाक के नीचे से अपना सोना भी निकाल लिया और अपनी तिजोरी को अरबों यूरो से भर भी लिया। यह कदम दिखाता है कि आधुनिक दौर में युद्ध सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि 'आर्थिक बुद्धिमत्ता' से भी जीते जाते हैं।
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