अपनी हरकतें सुधारें...अमेरिकी सीनेटर ने चीन को दी नसीहत

विधेयक पारित होने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल ने नई दिल्ली और बीजिंग को अपना रुख सुधारने की नसीहत दी। सीनेटर ब्लूमेंटल ने तीखे लहजे में कहा चीन और भारत के लिए हमारा सीधा संदेश है: अपनी नीतियां सुधारें। अपना तेल और गैस किसी अन्य स्रोत से खरीदें। तुष्टिकरण कोई रणनीति नहीं हो सकती।
अमेरिकी संसद (यूएस कांग्रेस) में 'रूस प्रतिबंध विधेयक' (Russia Sanctions Bill) पारित होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से भारत और चीन को सख्त चेतावनी दी गई है। अमेरिका ने साफ शब्दों में कहा है कि दोनों देश रूसी तेल और गैस पर अपनी निर्भरता तुरंत कम करें, अन्यथा उन्हें अभूतपूर्व अमेरिकी आर्थिक पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है। विधेयक पारित होने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल ने नई दिल्ली और बीजिंग को अपना रुख सुधारने की नसीहत दी। सीनेटर ब्लूमेंटल ने तीखे लहजे में कहा चीन और भारत के लिए हमारा सीधा संदेश है: अपनी नीतियां सुधारें। अपना तेल और गैस किसी अन्य स्रोत से खरीदें। तुष्टिकरण कोई रणनीति नहीं हो सकती।
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भारत पर बढ़ता पश्चिमी दबाव
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश भारत, 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण आक्रमण और पश्चिमी प्रतिबंधों के लागू होने के बाद से रियायती दरों पर बिकने वाले रूसी कच्चे तेल के सबसे बड़े खरीदारों में उभरा है। पश्चिमी देशों का तर्क है कि भारत और चीन द्वारा ऊर्जा खरीद से मॉस्को के सरकारी खजाने को युद्ध जारी रखने के लिए जरूरी वित्तीय मदद मिल रही है।
पुतिन को समझौते की मेज पर लाने की रणनीति
इस कड़े प्रतिबंध विधेयक का मुख्य उद्देश्य रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाकर उन्हें वार्ता की मेज पर लाना और यूक्रेन युद्ध को समाप्त करना है। 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026' का मकसद रूसी अधिकारियों, बैंकों और टैंकरों के उस गुप्त बेड़े पर प्रतिबंध लगाना है जो रूसी ऊर्जा की सप्लाई जारी रखते हैं। यह कानून ट्रंप को निर्देश देता है कि वे रूसी तेल या प्राकृतिक गैस के टॉप पांच आयातकों - जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं - पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाएं। हालांकि, इसमें उन देशों को छूट दी गई है जो रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम आयात करते हैं और जिन्होंने इस आयात को कम करने के लिए अहम कदम उठाए हैं। इस कानून को बुधवार को हाउस ने 262-159 वोटों से मंज़ूरी दी और अब यह ट्रंप के पास मंज़ूरी और हस्ताक्षर के लिए जाएगा।
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भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?
अमेरिकी संसद में पारित नया विधेयक भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूसी तेल या प्राकृतिक गैस का आयात करने वाले शीर्ष 5 देशों पर 100 प्रतिशत तक का आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का अधिकार देता है। वर्तमान में भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 फीसदी हिस्सा आयात करता है, जिसमें रूस एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा है। वर्ष 2022 में यूक्रेन पर रूस के सैन्य हमले के बाद से रूसी कच्चा तेल भारत के आयात बास्केट का एक बड़ा हिस्सा बन गया। 'ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव' (GTRI) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत ने रूस से 40.8 अरब डॉलर का कच्चा तेल खरीदा, जो उसके कुल कच्चे तेल आयात का लगभग एक-तिहाई है। वहीं, कमोडिटी डेटा ट्रैकर 'केपलर' (Kpler) के अनुसार, अगस्त में भारत ने रोजाना 20.8 लाख बैरल (bpd) रूसी तेल का आयात किया, जो उसके कुल तेल आयात का करीब 45 प्रतिशत था।
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