Russia में NSA डोभाल, यूरोप में एस जयशंकर, भारत बड़ा गेम कर गया!

आतंकवाद को लेकर उन्होंने भारत का संदेश बेहद स्पष्ट तरीके से कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। जिम्मेदार देशों को यह तय करना होगा कि वह आतंकवाद को समर्थन देने वालों के साथ खड़े हैं या उनके खिलाफ निर्णायक कारवाई के लिए साथ में हैं।
मॉस्को में भारत के एनएसए अजीत डोभाल मौजूद हैं। तमाम बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। कई अहम बयान भी उन्होंने दिए हैं। इसके अलावा भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर यूरोप के साथ बैठक करने के लिए साइपरस पहुंचे हुए हैं। यूरोपीय देशों के साथ तो वहां उन्होंने मुलाकात की है लेकिन जो एक उसमें अहम मुलाकात जो है वो यूक्रेन से हुई है। ऐसे वक्त में जब जयशंकर खुद साइपस में मौजूद हैं। यूरोपीय विदेश मंत्रियों के साथ बैठक कर रहे हैं तो दूसरी तरफ यूक्रेन से मिल रहे हैं। वहीं भारत के एनएसए अजीत डोभाल रूस में मौजूद हैं। भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने मॉस्को में एक अहम बैठक में हिस्सा लिया। वहां एक कार्यक्रम आयोजित हुआ जो पहला अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा फोरम था। सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधियों के 14वीं बैठक में भी उन्होंने हिस्सा लिया। इस बैठक की मेजबानी रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सारगाई शोइगू कर रहे थे। इस मंच पर बहुध्रय विश्व व्यवस्था यानी कि मल्टीपोलर वर्ल्ड को लेकर जो टिप्पणी हुई है वह बहुत अहम है और इस दौरान भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने आतंकवाद पर एक रेड लाइन ड्रॉ कर दिया है। आतंकवाद को लेकर उन्होंने भारत का संदेश बेहद स्पष्ट तरीके से कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। जिम्मेदार देशों को यह तय करना होगा कि वह आतंकवाद को समर्थन देने वालों के साथ खड़े हैं या उनके खिलाफ निर्णायक कारवाई के लिए साथ में हैं।
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यह बयान ऐसे वक्त में है जब दुनिया के कई हिस्सों में आतंकवाद प्रॉक्सी युद्ध अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का सामना करता रहा है। इसलिए उसकी यह बात वैश्विक मंच पर बहुत महत्व रखती है। अजीत डोभाल ने अपने संबोधन में यह भी कहा है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में बनाई गई वैश्विक संस्थाओं और संरचनाओं में अब व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने साफ किया है कि मौजूदा संस्थाएं आज की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम नहीं है। उन्होंने ग्लोबल साउथ यानी कि विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने, उनकी आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने पर जोर दिया है। यह भारत की उस विदेश नीति का हिस्सा है जिसमें वह खुद को विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मजबूत आवाज के रूप में स्थापित कर रहा है। देश के एनएसए अजीत डोवाल यहीं नहीं रुके। उन्होंने स्टेट ऑफ हार्मोस को लेकर भी बयान दिया है और एनएसए का इस तरीके से बयान देना बहुत महत्वपूर्ण भी हो जाता है क्योंकि पश्चिम एशिया की जो स्थिति है उसको लेकर उन्होंने बहुत चिंता व्यक्त की है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है।
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उन्होंने विशेष रूप से स्टेट ऑफ होर्मज को लेकर और रेड सी में जिस तरह के हालात बने हुए हैं उसको लेकर समुद्री मार्गों में सुरक्षा सुनिश्चित करने पर और लगातार बिना किसी रोक-टोक के व्यापारिक आवाजाही हो सके इसकी महत्वपूर्ण परिस्थिति पर जोर दिया है और उन्होंने कहा है कि यह बिल्कुल आवश्यक है। यह वक्त की मांग है और एक तरीके से उन्होंने भारत का स्टैंड भी वहां क्लियर किया है। इस पूरे रसाकशी के माहौल में भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने रूस और भारत की जो साझेदारी है उसको सराहा है जो बहुआयामी साझेदारी है। रूसी रक्षा परिषद के सचिव शोगोई के साथ उन्होंने द्विपक्षीय बैठक में आगे व्यापक सहयोग पर भी जोर दिया है। तो एक तरफ एनएसए डोभाल मॉस्को में तो दूसरी तरफ भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर का साइपरस में दौरा हुआ। साइपस में यह बहुत देखिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। जहां यूरोपीय नेताओं के साथ उन्होंने मुलाकात की है। साइपरस के शहर लीमासोल में यह मुलाकातें हुई हैं। जहां यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की अनौपचारिक जिमनिक बैठक में वह शामिल हुए और यह केवल औपचारिक कूटनीति का मंच नहीं था बल्कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में नई साझेदारी और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने का अवसर भी है। यह बात यूरोप भी रियलाइज़ कर चुका है कि सिर्फ अमेरिका के साथ उसकी गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकती है। अमेरिका का हैरान कर देने वाला रुख यूरोप देख चुका है।
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